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HIV Drugs: एड्स मरीजों की जीवन रक्षक दवाइयों का अकाल, एएसआई ने सरकार को चेताया

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, मुंबई Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 27 Aug 2022 05:06 PM IST
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सार

HIV Drugs: एएसआई के अध्यक्ष डॉ. ईश्वर गिलाडा ने बताया कि देश में रिट्रो वायरल थेरेपी (एआरटी) के 1050 सरकारी केंद्र और कई प्राइवेट केंद्र हैं। लेकिन एआरटी केंद्रों पर लगातार दवाइयों का अभाव बना हुआ है...

HIV Drugs: not enough supply in country of AIDS medicines for the last two months
aids HIV Drugs - फोटो : istock
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विस्तार

देश में एड्स मरीजों की जीवन रक्षक दवाइयों के अकाल पर एड्स सोसायटी ऑफ इंडिया (एएसआई) ने केंद्र सरकार को आगाह किया है कि जल्द दवाइयों की आपूर्ति बहाल की जाए। वरना, न केवल एड्स उन्मूलन की दिशा में लगातार जारी कठिन प्रयास प्रभावित होगा, बल्कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के 2030 तक एड्स को खत्म करने का लक्ष्य हासिल करने में भी कठिनाई होगी।

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एएसआई के अध्यक्ष डॉ. ईश्वर गिलाडा ने बताया कि देश में बीते दो महीने से एड्स की दवाइयों की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है। ऐसे में उन मरीजों की तकलीफें बढ़ जाएंगी। देश में रिट्रो वायरल थेरेपी (एआरटी) के 1050 सरकारी केंद्र और कई प्राइवेट केंद्र हैं। लेकिन एआरटी केंद्रों पर लगातार दवाइयों का अभाव बना हुआ है। इसको लेकर दिल्ली में बीते 36 दिन से डेल्ही नेटवर्क फॉर पॉजिटिव पीपुल से जुड़े लोग धरने पर बैठे हैं। डब्ल्यूएचओ ने 2030 तक दुनिया से एड्स उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है। पांच मार्च 1986 में मुंबई के जेजे अस्पताल में एड्स का देश का पहला क्लीनिक चलाने वाले डॉ. गिलाडा कहते हैं कि अगर, एड्स के मरीज नियमित दवा का सेवन करते रहे तो एचआईवी वायरस नियंत्रण में रहेगा और नए मरीज नहीं आने से 2030 तक एड्स पर नियंत्रण पाया जा सकता है। इसलिए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) से अपील है कि मरीजों कि मरीजों को दवाइयां जल्द उपलब्ध कराए।  

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…तो एड्स मरीजों को कराना होगा रेजिस्टेंट टेस्ट

एड्स के मरीज यदि अधिक दिनों तक दवा का सेवन नहीं कर सकेंगे, तो उन्हें रेजिस्टेंट टेस्ट कराना पड़ेगा जो काफी खर्चीला है। इससे मरीज पर 15 से 20 हजार रुपये का आर्थिक भार बढ़ जाएगा। डॉ गिलाड़ा कहते हैं कि फिलहाल, एड्स के मरीजों के लिए 20 प्रकार की दवाइयां हैं जिसमें से तीन दवाइयों डेलुटेग्राविर, टेनोफोविर और लेमिवुडीन (टीएलडी) के लगातार सेवन की सलाह दी जाती है। लेकिन अधिक दिनों तक दवा के सेवन नहीं करने वाले मरीजों पर इन दवाइयों के बेअसर होने का खतरा है। ऐसे में रेजिस्टेंट टेस्ट रिपोर्ट के अनुरूप दवाइयां दी जा सकेगी। ऐसी स्थिति में मरीज को बेवजह आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

देश में हैं 17 लाख एड्स के मरीज

आंकड़े बताते हैं कि देश में 17 लाख एचआईवी संक्रमित मरीज हैं, जिसमें से 14 लाख लोग जीवन रक्षक दवाइयां ले रहे हैं। लेकिन तीन लाख लोग दवा का सेवन नहीं कर रहे हैं। डॉ. गिलाडा के अनुसार देश में कुल एचआईवी संक्रमित में से 50 फीसदी मरीज महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश के हैं। बाकी 50 फीसदी मरीज पूरे देश में हैं। डॉ. गिलाडा बताते हैं कि दवाइयों के नियमित सेवन से एड्स का मरीज सेक्सुअल लाइफ के साथ अपनी पूरी जिंदगी जी सकता है। क्योंकि दवाइयों के सेवन से तीन-चार महीने में ही वायरस डिडक्टेबल हो जाता है, इसलिए एड्स के मुकाबले मधुमेह का रोग ज्यादा खतरनाक है।

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