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भारत-भूटान रिश्तों में नई ऊर्जा: पुनात्सांगछू-1 परियोजना का काम फिर शुरू, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल का दौरा
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Nirmal Kant
Updated Sun, 12 Apr 2026 01:30 AM IST
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सार
भारत-भूटान ऊर्जा साझेदारी का नया अध्याय शुरू हुआ। सात साल बाद 1,200 मेगावाट क्षमता वाली पुनात्सांगछू-1 परियोजना का निर्माण कार्य फिर से शुरू हुआ। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बांध में कंक्रीट डालने के कार्य का शुभारंभ करते हुए इसे मजबूत द्विपक्षीय सहयोग का प्रतीक बताया। पढ़िए रिपोर्ट-
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर
- फोटो : एक्स/मनोहर लाल खट्टर
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विस्तार
भारत और भूटान के बीच ऊर्जा सहयोग के क्षेत्र में नया अध्याय शुरू हो गया। भूटान की 1,200 मेगावाट क्षमता वाली पुनात्सांगछू-1 (पीएचईपी-1) जलविद्युत परियोजना पर 7 साल के ठहराव के बाद दोबारा निर्माण शुरू हुआ है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने शुक्रवार को परियोजना स्थल का दौरा कर बांध में कंक्रीट डालने के काम का आरंभ कराया।
भू-गर्भीय चुनौतियों और बांध के दाहिने किनारे की ढलान अस्थिर होने से परियोजना का मुख्य कार्य 2019 से रुका था। भारत से वित्तपोषित यह परियोजना भूटान की सबसे बड़ी संयुक्त जलविद्युत पहल है। मनोहर लाल ने परियोजना स्थल पर आयोजित समारोह में कहा, यह परियोजना भारत-भूटान ऊर्जा साझेदारी की मजबूती का प्रमाण है। भारत के तकनीकी और वित्तीय सहयोग से इसे सुरक्षा मानकों के साथ 5 वर्षों में पूरा किया जाएगा।
रन ऑफ द रिवर तकनीक पर आधारित परियोजना
भूटान के ऊर्जा व प्राकृतिक संसाधन मंत्री जेम शेरिंग ने द्विपक्षीय सहयोग की सराहना की। यह परियोजना रन ऑफ द रिवर तकनीक पर आधारित है। फरवरी 2026 तक इसका 88% भौतिक काम पूरा हो गया है। इसके चालू होने से भूटान की कुल जलविद्युत क्षमता में 30% की वृद्धि होगी। इससे सालाना 5,670 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होगी।
ये भी पढ़ें: इस्लामाबाद वार्ता: ईरान के राष्ट्रपति की दो टूक- बहादुरी से बातचीत करेंगे, राष्ट्रीय हित से समझौता मंजूर नहीं
पीएम मोदी ने पुनात्सांगछू-2 परियोजना का किया था उद्घाटन
इससे पहले केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने पुनात्सांगछू-2 परियोजना का निरीक्षण किया। इसका उद्घाटन नवंबर 2025 में पीएम नरेंद्र मोदी और भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने किया था। यह संयंत्र बिजली उत्पादन कर भारत को निर्यात कर रहा। पुनात्सांगछू-1 से उत्पादित अधिशेष बिजली भी भविष्य में भारत को बेची जाएगी। इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को बल मिलेगा।
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भू-गर्भीय चुनौतियों और बांध के दाहिने किनारे की ढलान अस्थिर होने से परियोजना का मुख्य कार्य 2019 से रुका था। भारत से वित्तपोषित यह परियोजना भूटान की सबसे बड़ी संयुक्त जलविद्युत पहल है। मनोहर लाल ने परियोजना स्थल पर आयोजित समारोह में कहा, यह परियोजना भारत-भूटान ऊर्जा साझेदारी की मजबूती का प्रमाण है। भारत के तकनीकी और वित्तीय सहयोग से इसे सुरक्षा मानकों के साथ 5 वर्षों में पूरा किया जाएगा।
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रन ऑफ द रिवर तकनीक पर आधारित परियोजना
भूटान के ऊर्जा व प्राकृतिक संसाधन मंत्री जेम शेरिंग ने द्विपक्षीय सहयोग की सराहना की। यह परियोजना रन ऑफ द रिवर तकनीक पर आधारित है। फरवरी 2026 तक इसका 88% भौतिक काम पूरा हो गया है। इसके चालू होने से भूटान की कुल जलविद्युत क्षमता में 30% की वृद्धि होगी। इससे सालाना 5,670 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होगी।
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पीएम मोदी ने पुनात्सांगछू-2 परियोजना का किया था उद्घाटन
इससे पहले केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने पुनात्सांगछू-2 परियोजना का निरीक्षण किया। इसका उद्घाटन नवंबर 2025 में पीएम नरेंद्र मोदी और भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने किया था। यह संयंत्र बिजली उत्पादन कर भारत को निर्यात कर रहा। पुनात्सांगछू-1 से उत्पादित अधिशेष बिजली भी भविष्य में भारत को बेची जाएगी। इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को बल मिलेगा।