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Maharashtra Politics: आंध्र प्रदेश से जुड़ा बिल मुंबई के लिए खतरे की घंटी? शिवसेना UBT ने अमरावती पर पूछे सवाल

आईएएनएस, मुंबई Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Sat, 04 Apr 2026 05:14 PM IST
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सार

शिवसेना (यूबीटी) ने अमरावती को राजधानी बनाने वाले विधेयक को मुंबई के लिए खतरा बताया है। सामना में कहा गया कि यह फैसला भविष्य में राज्यों की शक्तियां कमजोर कर सकता है। पार्टी ने आशंका जताई कि मुंबई को केंद्रशासित क्षेत्र बनाया जा सकता है। आइए, विस्तार से इस पूरे मामले को समझते हैं।
 

How Amravati Bill a Warning Bell for Mumbai Shiv Sena (UBT) Raises Several Questions
उद्धव ठाकरे, प्रमुख, शिवसेना (यूबीटी) - फोटो : ANI
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विस्तार

आंध्र प्रदेश की नई राजधानी अमरावती को लेकर पारित विधेयक अब महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद बन गया है। शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में इस मुद्दे को उठाते हुए इसे मुंबई के लिए “खतरे की घंटी” बताया है। पार्टी ने कहा कि यह सिर्फ एक राज्य का मामला नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी असर देश के अन्य बड़े शहरों, खासकर मुंबई पर भी पड़ सकते हैं।

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संपादकीय में कहा गया कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन विधेयक, 2026 के तहत अमरावती को राजधानी घोषित करना एक ऐसा कदम है जो भविष्य में संवैधानिक परंपराओं को बदल सकता है। पार्टी ने चिंता जताई कि अब तक किसी राज्य की राजधानी तय करने का अधिकार राज्य के पास होता था, लेकिन संसद द्वारा यह फैसला लेना एक नई मिसाल बन सकता है।
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क्या यह फैसला संविधान की परंपरा को बदल रहा है?
‘सामना’ में कहा गया कि संविधान का अनुच्छेद तीन संसद को राज्यों की सीमाएं बदलने का अधिकार देता है, लेकिन राजधानी तय करने का अधिकार पारंपरिक रूप से राज्य सरकारों के पास रहा है। ऐसे में संसद के जरिए अमरावती को राजधानी घोषित करना एक “खतरनाक उदाहरण” बन सकता है, जिससे भविष्य में राज्यों की शक्तियां कमजोर हो सकती हैं।

क्या मुंबई को केंद्र के अधीन लाने की आशंका जताई गई?
संपादकीय में एक बड़ा राजनीतिक संकेत देते हुए कहा गया कि भविष्य में संसद मुंबई को “नेशनल इकोनॉमिक जोन” घोषित कर सकती है। इसके बाद उसे केंद्रशासित प्रदेश में बदला जा सकता है। पार्टी ने कहा कि यह एक संभावित रणनीति हो सकती है, जिससे महाराष्ट्र की भूमिका कमजोर की जा सकती है।

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क्या महाराष्ट्र सरकार पर भी निशाना साधा गया?
शिवसेना (यूबीटी) ने राज्य की मौजूदा सरकार पर भी हमला बोला। पार्टी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अन्य नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि वे ऐसे किसी फैसले को भी “गौरव” बताने से नहीं चूकेंगे। पार्टी ने आरोप लगाया कि मौजूदा नेतृत्व में “महाराष्ट्र गौरव” की कमी है।

क्या अमरावती परियोजना पर भी सवाल उठाए गए?
संपादकीय में अमरावती परियोजना की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए। कहा गया कि किसानों से हजारों एकड़ जमीन लेकर यह शहर बनाया गया, लेकिन आज भी कई इमारतें अधूरी हैं और विकास धीमा है। पार्टी ने इसे एक असफल मॉडल बताते हुए चेतावनी दी कि इसी तरह के फैसले भविष्य में अन्य राज्यों पर भी थोपे जा सकते हैं।

क्या यह मुद्दा आगे और राजनीतिक विवाद बढ़ाएगा?
शिवसेना (यूबीटी) ने चेतावनी दी कि अगर महाराष्ट्र का नेतृत्व कमजोर रहा तो भविष्य में मुंबई को राज्य से अलग करने जैसे फैसले भी सामने आ सकते हैं। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है और आने वाले समय में यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक टकराव बन सकता है।


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