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सरकार कैसे भरेगी खाली पद?: भर्ती प्रकिया तेज करने के उपायों पर संसदीय समिति ने किया मंथन, CSAT पर भी चर्चा?

एएनआई, नई दिल्ली Published by: Asmita Tripathi Updated Tue, 23 Jun 2026 08:44 AM IST
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सार

एक संसदीय समिति ने केंद्र सरकार में खाली पड़े पदों को भरने और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में सीएसएटी के प्रभाव पर चर्चा की। समिति जल्द संसद को रिपोर्ट सौंपेगी। 

How will the government fill vacant posts Parliamentary committee deliberates on the recruitment process
खाली पदों पर समिति का मंथन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

एक संसदीय समिति ने सोमवार को केंद्र सरकार में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने के मुद्दे पर चर्चा की। इसके साथ ही बैठक में सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा में सिविल सेवा योग्यता परीक्षा (सीएसएटी) के प्रभाव और उसके परिणामों पर भी चर्चा की।

बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या?
कार्मिक, लोक शिकायत, विधि एवं न्याय संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष बृज लाल ने बैठक के बाद कहा कि भर्ती प्रक्रिया में प्रगति सही है। वहीं, समिति विचार-विमर्श के बाद संसद को एक रिपोर्ट पेश करेगी। उन्होंने कहा, ‘मुख्य एजेंडा केंद्र सरकार के भीतर खाली जगहों और उसकी भर्ती पर केंद्रित था। इसके साथ ही साथ डीओपीटी, एसएससी, यूपीएससी और सिविल सेवा परीक्षाओं से संबंधित चर्चाएं भी शामिल थीं।’

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राज्यसभा में क्या बताया गया है?
जब उनसे पूछा गया कि क्या केंद्र सरकार के खाली पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया में प्रगति ठीक है, तो उन्होंने कहा हां। सरकार ने इस साल की शुरुआत में राज्यसभा को सूचित किया था कि यूपीएससी ने प्रारंभिक परीक्षा आयोजित होने के बाद अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अनंतिम उत्तर कुंजी जारी करने के लिए दिशानिर्देश तैयार कर लिए हैं। यह नियम सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 से यूपीएससी द्वारा आयोजित सभी संरचित परीक्षाओं पर लागू होगा। प्रारंभिक परीक्षा के अंक परीक्षा के अंतिम परिणाम की घोषणा के बाद ही जारी किए जाएंगे।

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वहीं, वैकल्पिक विषयों में समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए, यूपीएससी अंतर-विषय मॉडरेशन लागू करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी उम्मीदवार को किसी भी प्रकार का नुकसान न हो। चाहे उसने कोई भी वैकल्पिक विषय चुना हो। 


सीएसएटी क्या है?
इसमें कहा गया है कि CSAT एक योग्यता परीक्षा है। इसका उद्देश्य गुणवत्ता और विश्लेषणात्मक क्षमता का न्यूनतम मानक सुनिश्चित करना है। प्रश्नों का स्तर मैट्रिकुलेशन स्तर के अनुरूप है। वहीं, तथ्यात्मक त्रुटियों को चुनौती देने के लिए, यूपीएससी के पास प्रश्न पत्र प्रतिनिधित्व पोर्टल (क्यूपीआरईपी) नामक एक समर्पित पोर्टल है, जो उसकी वेबसाइट पर उपलब्ध है। उम्मीदवार प्रश्न पत्र और अनंतिम उत्तर कुंजी (सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 से आगे के लिए) में विसंगतियों के संबंध में पोर्टल के माध्यम से अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।

यूपीएससी केंद्रीयकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीग्राम) और ईमेल के माध्यम से उम्मीदवारों द्वारा प्रस्तुत शिकायतों का भी निपटारा करता है। 

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