फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   IAF Chief said Lagging in technology means defeat war every Drone component must be manufactured in India

भविष्य के युद्ध के लिए भारत तैयार? वायु सेना प्रमुख बोले- 'टेक्नोलॉजी में देरी मतलब हार, हर पुर्जा यहां बने'

Thu, 30 Jul 2026 06:01 PM IST
प्रशांत तिवारी एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Thu, 30 Jul 2026 06:01 PM IST
सार

भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने भारत ड्रोन एंड रोबोटिक्स मंथन 3.0 सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने घरेलू उद्योग, स्टार्टअप, शिक्षण संस्थानों और निवेशकों से मिलकर तेजी से अत्याधुनिक रक्षा तकनीक विकसित करने का आह्वान किया। साथ ही चेताया कि तकनीक अपनाने में देरी भविष्य के युद्धक्षेत्र में भारी पड़ सकती है।
 

विज्ञापन
IAF Chief said Lagging in technology means defeat war every Drone component must be manufactured in India
भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत ड्रोन एंड रोबोटिक्स मंथन 3.0' सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए घरेलू उद्योग और नवाचार क्षेत्र के साथ मिलकर काम करने का एक स्पष्ट और दूरदर्शी रोडमैप प्रस्तुत किया। वायु सेना प्रमुख का मानना है कि वास्तविक आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए अब और तेजी से आगे बढ़ने की जरूरत है।

विज्ञापन


आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका क्यों तेजी से बढ़ रही है?
उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में कम लागत वाले मानव रहित सिस्टम (अनमैन्ड सिस्टम) की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारत के रक्षा क्षेत्र को तेजी से बदलती तकनीकों के साथ कदम मिलाकर चलना होगा, क्योंकि थोड़ी-सी भी देरी या हिचकिचाहट भविष्य में भारी नुकसान का कारण बन सकती है।
विज्ञापन


स्टार्टअप और इनोवेटर्स के लिए IAF ने क्या नई व्यवस्था बनाई है?
एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि परिचालन जरूरतों को स्पष्ट रूप से तय करना उपयोगकर्ता यानी वायु सेना की जिम्मेदारी है। उन्होंने हाल ही में स्थापित 'डायरेक्टोरेट ऑफ एयरोस्पेस डिजाइन' को स्टार्टअप, उद्योग और इनोवेटर्स के साथ सीधे संवाद स्थापित करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने कहा कि जरूरत या समस्या की जानकारी हमें ही देनी होगी। हमारे पास 'डायरेक्टोरेट ऑफ एयरोस्पेस डिजाइन' है, जो उद्योग, स्टार्टअप और उन सभी लोगों से बातचीत कर सकता है जो हमारी आवश्यकताओं को समझना चाहते हैं। उन्हें यह जानना होगा कि हमें किस प्रकार के ड्रोन, उपकरण या सेंसर चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


ड्रोनथॉन 2026 से क्या बदलने वाला है?
पारंपरिक और लंबी मूल्यांकन प्रक्रिया से बचने के लिए भारतीय वायु सेना ने सितंबर में 'ड्रोनथॉन 2026' आयोजित करने की घोषणा की है। इसमें कंपनियों से कागजी प्रस्तुतियों या रिकॉर्ड किए गए वीडियो के बजाय अपने उत्पाद का वास्तविक समय में लाइव प्रदर्शन करने को कहा गया है, ताकि तकनीक की क्षमता का सीधे आकलन किया जा सके।

'हर पुर्जा भारत में ही बने' पर IAF चीफ ने इतना जोर क्यों दिया?
विदेशी आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता से जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए एयर चीफ मार्शल सिंह ने स्पष्ट कहा कि रक्षा क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भरता तभी संभव होगी, जब ड्रोन और उससे जुड़ी हर तकनीक तथा हर पुर्जा भारत में ही विकसित और निर्मित हो। उन्होंने कहा कि हर पुर्जा भारत में ही बनना चाहिए। तभी हम कह सकते हैं कि हम पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं। 

तकनीक में देरी को लेकर एयर चीफ ने क्या चेतावनी दी?
नौकरशाही प्रक्रियाओं से होने वाली देरी पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, "तकनीक में देरी का मतलब है तकनीक का हाथ से निकल जाना।" उन्होंने शिक्षण संस्थानों, नियामक संस्थाओं, निवेशकों, उद्योग और विनिर्माताओं से मिलकर काम करने की अपील की, ताकि प्रयोगशालाओं में विकसित समाधान जल्द से जल्द मोर्चे तक पहुंच सकें।


ये भी पढ़ें: Explainer: वंदे मातरम् के अपमान पर मिलेगी कितने साल की सजा, सरकार के नए कानून से क्या-क्या बदल जाएगा?

क्या ड्रोन लड़ाकू विमानों की जगह लेने वाले हैं?
एयर चीफ मार्शल सिंह ने स्पष्ट किया कि ड्रोन का उद्देश्य मानव संचालित प्लेटफॉर्म की जगह लेना नहीं, बल्कि उनकी क्षमता को और मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि भारतीय वायु सेना की यह पहल केवल नई तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि परिचालन चुनौतियों को देश के उभरते एयरोस्पेस स्टार्टअप और उद्यमियों के लिए नए अवसरों में बदलने की दिशा में भी बड़ा कदम है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि अगर हम वही करते रहेंगे जो आज तक करते आए हैं, तो हमें वही परिणाम मिलेंगे जो अब तक मिलते रहे हैं। यदि हमें अलग परिणाम चाहिए, तो हमें अलग तरीके से काम करना होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed