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'बाबा साहेब न होते तो मोदी भी यहां नहीं होते': आंबेडकर जयंती पर PM ने किया आर्काइव पोस्ट, पंचतीर्थ का भी जिक्र

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Tue, 14 Apr 2026 01:00 PM IST
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सार

आंबेडकर जयंती पर मोदी आर्काइव ने पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की नीतियां बाबा साहेब के विचारों समानता, संविधान और अंत्योदय को आगे बढ़ा रही हैं। इसमें पंचतीर्थ का विकास, संविधान दिवस की घोषणा और स्टैंड-अप इंडिया, मुद्रा व भीम ऐप जैसी योजनाओं के जरिए वंचित वर्गों के सशक्तिकरण का जिक्र किया गया।

If Baba Saheb hadn't been there, Modi wouldn't be here either': PM Modi posts archive post on Ambedkar Jayanti
मोदी आर्काइव ने आंबेडकर जयंती पर पोस्ट साझा की - फोटो : X (@modiarchive)
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विस्तार

डॉ. भीमराव आंबडेकर की 135वीं जयंती के अवसर पर मोदी आर्काइव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बाबा साहेब आंबडेकरर के विचारों के बीच गहरे संबंध को रेखांकित किया। पोस्ट में बताया गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने वर्षों से आंबेडकर की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं।

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पोस्ट में पीएम के किस कथन का उल्लेख किया गया

पोस्ट में पीएम मोदी के उस कथन का उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर बाबा साहेब नहीं होते, तो नरेंद्र मोदी भी यहां नहीं होते। इसके जरिए उन्होंने यह संदेश दिया कि एक साधारण पृष्ठभूमि से देश के प्रधानमंत्री पद तक उनकी यात्रा भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की देन है। पीएम मोदी अक्सर इस बात को दोहराते हैं कि आंबडेकर की सबसे बड़ी विरासत एक ऐसा भारत है, जहां जन्म नहीं बल्कि अवसर तय करते हैं कि कोई कितना आगे बढ़ सकता है।

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पोस्ट में आंबडेकर से जुड़े पंचतीर्थ का जिक्र

मोदी आर्काइव की पोस्ट में आंबेडकर से जुड़े 'पंचतीर्थ' का भी जिक्र किया गया है, जिसमें उनकी जन्मभूमि महू से लेकर दिल्ली के 26 अलीपुर रोड और लंदन तक के स्थान शामिल हैं। दावा किया गया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इन सभी स्थलों का विकास और आधुनिकीकरण किया गया, ताकि नई पीढ़ी आंबडेकर के जीवन और विचारों को करीब से समझ सके।

पीएम मोदी ने 26 नवंबर को संविधान दिवस घोषित किया था 

पोस्ट में वर्ष 2015 का उल्लेख करते हुए बताया गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने 26 नवंबर को संविधान दिवस घोषित किया था। इसका उद्देश्य संविधान के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना और आंबेडकर को संविधान के प्रमुख शिल्पकार के रूप में सम्मान देना था।

सरकारी योजनाओं में आंबेडकर के सामाजित और आर्थिक विचारों को किया गया जिक्र

इसके अलावा, पोस्ट में कहा गया कि मोदी सरकार की नीतियों में अंत्योदय की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जिसका लक्ष्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना है। इसे आंबेडकर के समानता और मानव गरिमा के सिद्धांतों से जोड़ा गया है।

सरकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए पोस्ट में कहा गया कि स्टैंड-अप इंडिया और मुद्रा योजना जैसी पहलों के जरिए वंचित वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया गया। वहीं, भीम एप के माध्यम से डिजिटल भुगतान को गांव-गांव तक पहुंचाया गया, जिससे वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला।

पोस्ट के अंत में कहा गया कि समय के साथ आंबेडकर का विजन, मोदी का प्रावधान स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया है, जिसके तहत आंबेडकर के सामाजिक और आर्थिक विचारों को आधुनिक नीतियों के जरिए लागू किया जा रहा है।


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