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Hindi News ›   India News ›   Goa Assembly Election 2022: Challenging for BJP in Goa to Fight Without Manohar Parrikar Know What are Options News in Hindi

Goa Election 2022: पहली बार मनोहर पर्रिकर के चेहरे के बिना मैदान में भाजपा, जानें किन चेहरों पर इस बार भरोसा, क्या हैं तैयारियां?

Sun, 09 Jan 2022 05:48 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sun, 09 Jan 2022 05:48 PM IST
सार

एक दशक पहले मनोहर पर्रिकर की बदौलत भाजपा ने पहली बार विधानसभा चुनाव में बहुमत हासिल किया था। इस बार पार्टी के पास सीएम प्रमोद सावंत का चेहरा जरूर है, लेकिन उनकी लोकप्रियता पर्रिकर की तुलना में आंकी नहीं जा सकती। 

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Goa Assembly Election 2022: Challenging for BJP in Goa to Fight Without Manohar Parrikar Know What are Options News in Hindi
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत पत्नी सुलक्षणा पूर्व सीएम मनोहर परिकर के साथ। - फोटो : social media

विस्तार

गोवा में विधानसभा चुनाव का एलान हो चुका है। राज्य में 14 फरवरी को मतदान की तारीख तय  की गई है। इससे पहले इस 40 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा की नजर एक बार फिर बहुमत हासिल करने पर होगी। हालांकि, इस बार भाजपा के लिए अपना पुराना प्रदर्शन दोहराना काफी मुश्किल साबित हो सकता है। खासकर तब जब राज्य में पार्टी पहली बार मनोहर पर्रिकर के चेहरे के बिना चुनाव में उतरेगी। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि पार्टी दोबारा सरकार बनाने के लिए क्या तैयारियां की हैं और उसके पास इस बार वोट जुटाने के लिए कौन से चेहरे हैं।
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पर्रिकर के नेतृत्व में पहली बार भाजपा को मिला था बहुमत
अगर ये कहा जाए कि मनोहर पर्रिकर गोवा में भाजपा का सबसे लोकप्रिय चेहरा रहे हैं, तो गलत नहीं होगा। अपने जनसंपर्क अभियानों और जनता के बीच पहुंचने की अपनी क्षमता की बदौलत पर्रिकर ने गोवा में भाजपा को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई। इसी का नतीजा था कि 2012 के चुनाव में भाजपा को पहली बार बहुमत मिला था और पार्टी ने 2007 के 14 सीटों पर जीत के प्रदर्शन को सुधारा और 21 सीटें हासिल कीं। 
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क्या है इस बार भाजपा की योजना?
लेकिन एक दशक बाद भाजपा फिर उसी दोराहे पर खड़ी है। इस बार पार्टी के पास सीएम प्रमोद सावंत का चेहरा जरूर है, लेकिन उनकी लोकप्रियता पर्रिकर की तुलना में आंकी नहीं जा सकती। ऐसे में भाजपा ने इस बार गोवा चुनाव में सुशासन, तेज गति से होते विकास को मुद्दा बनाया है। हालांकि, कांग्रेस का कमजोर होना इस बार पार्टी का सबसे बड़ा फायदा है। खासकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और आम आदमी पार्टी (आप) के राज्य में आने से। यानी भाजपा के खिलाफ जाने वाले वोट, जहां पहले सिर्फ कांग्रेस को ही मिलते थे, वे अब तीन पार्टियों के बीच बंटने के आसार ज्यादा हैं। 
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झटके के बावजूद कांग्रेस से ज्यादा मजबूत बनी हुई है भाजपा
ऐसा नहीं है कि पार्टी को बीते 10 सालों में कोई खास नुकसान नहीं हुआ। 2017 में तो खासतौर पर चुनाव में लोगों की नाराजगी सामने आई। माना जाता है कि यह मनोहर पर्रिकर (तब भारत के रक्षा मंत्री) के राज्य से दूर रहने की वजह से हुआ था। चुनाव में भाजपा को 13 सीटें मिली थीं, जबकि कांग्रेस ने 17 सीटों पर कब्जा जमाया था। लेकिन एक बार फिर छोटी पार्टियों और निर्दलियों के बीच पर्रिकर को लेकर जागे भरोसे की वजह से भाजपा गठबंधन की सरकार बनाने में कामयाब हो गई थी। 


अब गोवा में कौन से चेहरों पर भाजपा को भरोसा?
गोवा में पर्रिकर के बिना चुनाव जीतना भाजपा के लिए मुश्किल हो सकता है। पर पार्टी ने इस बार प्रबंधन के लिए अपने दो सबसे अहम राजनीतिक चेहरों को उतारा है। इनमें एक नाम महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस का है, जबकि दूसरा नाम भाजपा महासचिव बीएल संतोष का है। फडणवीस पहले ही पार्टी को बिहार विधानसभा चुनाव में जीत दिलाने में अहम भूमिका निभा चुके हैं, जबकि बीएल संतोष भाजपा शासित राज्यों में लंबे समय से प्रबंधन से जुड़े काम देख रहे हैं। राज्य में सीएम सावंत के अलावा गोवा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सदानंद शेत तनावड़े, कला-संस्कृति मंत्री गोविंद गौडे और विश्वजीत राणे भी काफी अहम चेहरे साबित होने वाले हैं। 
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