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Explainer: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं पर इतना बवाल क्यों, क्या है जेपीएससी विवाद की पूरी कहानी?

Mon, 03 Aug 2026 03:43 PM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Mon, 03 Aug 2026 03:43 PM IST
सार

14वीं जेपीएससी संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम के बाद कथित अनियमितताओं के आरोपों ने झारखंड में बड़े विवाद का रूप ले लिया। पारदर्शिता और निष्पक्ष भर्ती की मांग को लेकर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि मामले की जांच जारी है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जेपीएससी विवाद की शुरुआत कैसे हुई और यह राज्यव्यापी छात्र आंदोलन में कैसे बदल गया? आइए जानते हैं।

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Why Is There So Much Uproar Over Recruitment Exams in Jharkhand? Complete Story Behind the JPSC Controversy
झारखंड में विरोध प्रदर्शन - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं का गुस्सा इन दिनों सड़कों पर दिखाई दे रहा है। राजधानी रांची में कई दिनों से छात्र धरना दे रहे हैं, भूख हड़ताल चल रही है और लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। उनकी मांग सिर्फ एक परीक्षा रद्द कराने की नहीं है, बल्कि पूरी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की है। छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में लगातार अनियमितताएं हो रही हैं और इससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। 

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ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जेपीएससी क्या है? आखिर पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ? इसने कैसे विरोध प्रदर्शन का रूप ले लिया? छात्रों की प्रमुख मांगे क्या-क्या है? सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए? अब तक क्या-क्या कार्रवाई हो चुकी है? जेपीएससी ने क्या फैसला लिया? हाईकोर्ट ने क्या निर्देश दिए? 

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जेपीएससी क्या है?

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) झारखंड सरकार का एक सांविधानिक आयोग है, जिसका गठन भारत के संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत राज्य गठन के बाद 15 नवंबर 2000 को किया गया था। आयोग का मुख्य कार्य राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में ग्रुप 'ए' और ग्रुप 'बी' के पदों पर भर्ती के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं और साक्षात्कार का आयोजन कर योग्य अभ्यर्थियों का चयन करना है। इसके अलावा यह भर्ती, पदोन्नति और सेवा संबंधी मामलों में राज्य सरकार को सलाह भी देता है।

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हाल ही में 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025 में कथित अनियमितताओं और सीआईडी जांच के बीच 22 जुलाई 2026 को जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद आयोग के अध्यक्ष का पद रिक्त हो गया और नए पूर्णकालिक अध्यक्ष की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है।

Why Is There So Much Uproar Over Recruitment Exams in Jharkhand? Complete Story Behind the JPSC Controversy
झारखंड में विरोध प्रदर्शन - फोटो : Amar Ujala

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025 की प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित किया। आयोग ने 103 रिक्त पदों के लिए 2,204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया। इसमें उप कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला कमांडर, सहायक रजिस्ट्रार, सहायक नगर आयुक्त/कार्यकारी अधिकारी/विशेष अधिकारी, जेल अधीक्षक और अन्य पद शामिल हैं। परिणाम घोषित होते ही अभ्यर्थियों के बीच कई सवाल उठने लगे।

सबसे पहले अभ्यर्थियों ने आयोग से श्रेणीवार कट-ऑफ जारी करने की मांग की। उनका कहना था कि परिणाम घोषित कर दिया गया, लेकिन कट-ऑफ सार्वजनिक नहीं की गई। इसके बाद मेरिट सूची पर भी सवाल उठे। कई अभ्यर्थियों ने दावा किया कि प्रकाशित मेरिट सूची पर आयोग के संवैधानिक सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए।

इसी दौरान सोशल मीडिया पर कुछ कथित ओएमआर शीट वायरल हुईं। इनमें दावा किया गया कि एक अभ्यर्थी ने पेपर-1 में केवल लगभग 48 प्रश्न हल किए थे, फिर भी उसे मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित कर दिया गया। इसी तरह बैकलॉग भर्ती परीक्षा को लेकर भी ऐसे आरोप लगाए गए। हालांकि वायरल ओएमआर शीटों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन्हीं दावों ने छात्रों के बीच असंतोष को ओर बढ़ा दिया।

विरोध प्रदर्शन कैसे बढ़ा?

ओएमआर शीटों से जुड़े दावों के बाद छात्र जेपीएससी कार्यालय के बाहर जुटने लगे। धीरे-धीरे प्रदर्शन बड़ा होता गया और आंदोलन रांची के मोराबादी स्थित बापू वाटिका, अल्बर्ट चौक से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंच गया। इसके बाद यह विरोध राज्यव्यापी छात्र आंदोलन का रूप लेने लगा।

छात्रों का कहना है कि यह केवल एक परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि कई वर्षों से भर्ती परीक्षाओं में सामने आ रही गड़बड़ियों के खिलाफ उनका आक्रोश है। आंदोलन के दौरान छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को सौंपे गए मांगपत्र पर कार्रवाई होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने, टीडीपीएल एजेंसी के माध्यम से हुई परीक्षाओं की समीक्षा कराने और जेपीएससी व जेएसएससी की भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग की।

छात्र क्या मांग कर रहे हैं?

  • 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा रद्द की जाए।
  • निष्पक्ष तरीके से दोबारा परीक्षा कराई जाए।
  • जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएं।
  • टीडीपीएल के माध्यम से हुई सभी परीक्षाओं की समीक्षा हो।
  • पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जाए।
  • दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
  • शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय की जाए।

सरकार ने क्या कदम उठाया?

राज्य सरकार ने मामले की जांच अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को सौंप दी। सीआईडी ने कांड संख्या 16/2026 दर्ज कर विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया और जांच शुरू कर दी। साथ ही लोगों से भी अपील की गई कि अगर उनके पास परीक्षा से जुड़ी कोई जानकारी, दस्तावेज या सबूत हैं तो वे जांच एजेंसी को उपलब्ध कराएं।

जांच के दौरान सीआईडी ने दो चरणों में गिरफ्तारियां कीं। पहले चरण में पूर्व जेपीएससी उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मोहम्मद उस्मान, मोहम्मद एबाद और अभय कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद दूसरे चरण में टीडीपएल के कर्मचारी हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार को भी गिरफ्तार किया गया। पहले गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों को पांच दिन की पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई।

हालांकि अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार ने मामले की जांच के लिए सीआईडी और एसआईटी को जिम्मेदारी दी है, लेकिन उन्हें इस जांच पर भरोसा नहीं है। छात्रों के मुताबिक, पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच केवल सीबीआई ही कर सकती है। इसलिए सरकार को बिना देरी किए जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपनी चाहिए।

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सीआईडी ने क्या कार्रवाई की? - फोटो : Amar Ujala

सीआईडी ने क्या नोटिस जारी किया?

29 जुलाई 2026 को सीआईडी ने एक सार्वजनिक सूचना जारी की। इसमें कहा गया कि जेपीएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025 (विज्ञापन संख्या-01/2026) की प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित सभी अभ्यर्थियों को जांच में सहयोग करना होगा।

सीआईडी ने सफल अभ्यर्थियों से 30 जुलाई से 5 अगस्त 2026 के बीच पेपर-1 और पेपर-2 की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी पीडीएफ या फोटो के रूप में उपलब्ध कराने को कहा। इसके लिए व्हाट्सएप नंबर 9934309058 और ईमेल complainjpsc-cid@jhpolice.gov.in जारी किए गए। जिन अभ्यर्थियों के पास कार्बन कॉपी उपलब्ध नहीं थी, उन्हें रोल नंबर के साथ अनुपलब्धता का कारण बताने के लिए कहा गया।

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जेपीएससी - फोटो : Amar Ujala

जेपीएससी ने क्या फैसला लिया?

इस बीच 22 जुलाई 2026 को जेपीएससी ने एक बड़ा फैसला लेते हुए संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा-2025 समेत कुल नौ भर्ती परीक्षाओं को अगली सूचना तक स्थगित कर दिया। आयोग ने अपने प्रेस नोट में कहा कि सरकार से प्राप्त निर्देश और परीक्षा संचालन में हुई गड़बड़ी के कारण यह निर्णय लिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि नई परीक्षा तिथियों की घोषणा बाद में की जाएगी।

हाईकोर्ट ने क्या निर्देश दिए हैं?

14वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर दो अलग-अलग याचिकाएं झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल की गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मॉडल उत्तर कुंजी में कई उत्तर गलत थे, कट-ऑफ सार्वजनिक नहीं किया गया और अधिक अंक पाने वाले कई अभ्यर्थियों को असफल घोषित कर दिया गया। उन्होंने अदालत से प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने या वैकल्पिक रूप से मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने की मांग की।

वहीं, जेपीएससी ने अदालत में कहा कि पूरे मामले की जांच जारी है और मुख्य परीक्षा पहले ही स्थगित की जा चुकी है। इसलिए इस स्तर पर कोई अंतरिम आदेश देना उचित नहीं होगा। अदालत ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं दी, आयोग को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 तय की। साथ ही कहा कि अगर कोई अत्यावश्यक परिस्थिति बनती है तो याचिकाकर्ता पहले भी अदालत का रुख कर सकते हैं।

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छात्रों की मांगें - फोटो : Amar Ujala

क्या यह पहली बार हुआ है?

यह विवाद केवल 14वीं सिविल सेवा परीक्षा तक सीमित नहीं है। झारखंड बनने के बाद लगभग हर बड़ी जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा किसी न किसी विवाद में रही है। कभी संशोधित परिणाम जारी हुए, कभी अतिरिक्त परिणाम सूची निकाली गई, कभी इंटरव्यू अंकों पर सवाल उठे, तो कभी आरक्षण, उत्तर कुंजी और मूल्यांकन को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया गया। पहली और दूसरी जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में सीबीआई जांच अभी भी जारी है।

राजनीति भी हुई तेज

जैसे-जैसे आंदोलन बढ़ा, वैसे-वैसे राजनीतिक दल भी सक्रिय हो गए। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और ओडिशा के पूर्व राज्यपाल रघुबर दास ने JSSC-CGL परीक्षा मामले को जेपीएससी विवाद से भी बड़ा घोटाला बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर सवाल उठाए। रघुबर दास ने दावा किया कि JSSC-CGL परीक्षा विवाद के दौरान मुख्यमंत्री के एक करीबी के यहां से कई अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड बरामद हुए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी टीडीपीएल का मार्केटिंग मैनेजर स्वयं परीक्षा पास कर अधिकारी बन गया, जबकि उसके भाई और भाभी भी चयनित हुए। इन आरोपों का उल्लेख करते हुए उन्होंने सरकार से सवाल किया कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक चुप्पी क्यों बनी हुई है।

भाजपा ने इस मुद्दे को संसद तक भी उठाया। पार्टी ने जेपीएससी, जेएसएससी और एक्साइज कांस्टेबल भर्ती मामलों की सीबीआई जांच की मांग की तथा मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से जवाबदेही तय करने की मांग की। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर परीक्षा संबंधी मामलों में दोहरा रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया।

इसी बीच सीजेपी के नेता अभिजीत दीपके ने आंदोलनरत छात्रों से फोन पर बात कर उनके समर्थन का एलान किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि उनकी पार्टी छात्रों की मांगों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।

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