इस बार जनगणना में क्या खास: आपसे कौन से सवाल पूछे जाएंगे, अगर जनगणना कर्मी घर नहीं आए तो क्या करना होगा?
भारत में करीब 15 वर्षों बाद हो रही जनगणना अप्रैल से शुरू हुई है और यह दो चरण में कराई जाएगी। पहले चरण में मकानों की सूची बनाई जाएगी और आवासीय आधार पर जनगणना होगी। दूसरे चरण में वृहद तरह से व्यक्तिगत जनगणना की जाएगी। इन दोनों चरणों में अलग-अलग तरह की जानकारी जुटाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। आइये इसे विस्तार से जानते हैं...
विस्तार
यह जनगणना 15 से भी ज्यादा वर्षों के बाद कराई जा रही है। बड़ी संख्या में लोग पहली बार इससे सीधी तरह से जुड़ेंगे। ऐसे में लोगों के मन में जनगणना को लेकर दर्जनों सवाल हैं। आइये सवाल-जवाब में जानते हैं कि इस बार जनगणना में क्या-क्या नया होने वाला है और इसमें शामिल होने वाले लोगों के लिए क्या-क्या जानना अहम है?
सवाल 1: जनगणना की पूरी प्रक्रिया क्या होगी?
जवाब: जनगणना मुख्य रूप से दो चरण में पूरी होगी...
पहला चरण: मकानों की सूची बनाना और आवासीय जनगणना
यह चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुका है। यह सितंबर 2026 तक चलेगा। इस चरण में स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) का विकल्प जनगणना कर्मी के डोर-टू-डोर सर्वे के लिए आने से 15 दिन पहले खुला है।
इसमें 33 सवाल पूछे जाएंगे, जो मुख्य रूप से घर की स्थिति, पीने का पानी, शौचालय, रसोई का ईंधन, इस्तेमाल होने वाले अनाज और टीवी, वाहन व स्मार्टफोन जैसी संपत्तियों से जुड़े होंगे।
दूसरा चरण: जनसंख्या गणना
यह चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा। इसमें लोगों के नाम, उम्र, शिक्षा, लिंग, वैवाहिक स्थिति, व्यवसाय और प्रवास जैसी विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी। स्वतंत्र भारत में पहली बार इसी चरण में डिजिटल तरीके से जातिगत डाटा भी एकत्र किया जाएगा। यानी जातीय जनगणना और प्रत्येक व्यक्ति की गिनती का चरणबद्ध काम इसी फेज में पूरा होगा। यह फेज एक तरह से पहले फेज की अनुमानित गिनती पुष्टि करने वाला भी बनेगा।
जनगणना की संदर्भ तिथि
पूरी जनगणना के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संदर्भ तिथि 1 मार्च, 2027 की मध्य रात्रि तय की गई है। हालांकि, लद्दाख जैसे भारी बर्फबारी वाले क्षेत्रों के लिए यह संदर्भ तिथि अक्तूबर 2026 रखी गई है।
सवाल 2: 2027 की जनगणना में इस बार क्या-क्या नया है?
जवाब: इस बार की जनगणना में कई बड़े बदलाव किए गए हैं।डिजिटल जनगणना: जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी। कागज के बड़े रजिस्टरों की जगह, जनगणना करने वाले अधिकारी 16 भाषाओं वाले एक सुरक्षित मोबाइल ऐप के जरिए जानकारी दर्ज करेंगे। यानी वे मोबाइल फोन या टैबलेट या फिर किसी अन्य डिजिटल डिवाइस पर आपकी जानकारी इकट्ठा कर सकते हैं।
सेल्फ-एन्यूमरेशन (स्व-गणना): पहली बार नागरिकों को यह सुविधा दी गई है कि वे अधिकारियों के घर आने से पहले ही अपनी सुविधानुसार वेब पोर्टल पर जाकर खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं।
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लिव-इन कपल्स: अगर लिव-इन कपल्स अपने रिश्ते को स्थायी मानते हैं, तो उन्हें जनगणना में शादीशुदा जोड़े के रूप में गिना जाएगा।
शुभंकर: इस बार समावेशी प्रकृति को दर्शाने के लिए प्रगति (महिला) और विकास (पुरुष) नाम के दो शुभंकर बनाए गए हैं।
तेज नतीजे: डिजिटल होने की वजह से डाटा को मैन्युअल रूप से टाइप नहीं करना पड़ेगा, जिससे दूसरे फेज के अंत तक ही कई आंकड़े जारी होने की उम्मीद है।
सवाल 3: आम आदमी कैसे जनगणना में शामिल हो सकता है?
जवाब: आपके पास अपनी जानकारी दर्ज कराने के दो तरीके हैं...1. सेल्फ-एन्यूमरेशन (स्व-गणना) का तरीका: आप अपने मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करके ऑनलाइन पोर्टल पर लॉग-इन कर सकते हैं और खुद फॉर्म भर सकते हैं। इसमें कुछ सवाल पूछे जाएंगे जो आपके घर, परिवार, सामाजिक ताने-बाने और आपसे जुड़े होंगे। इनके जवाब देकर आप खुद इस जनगणना में अधिकारियों के आए बिना ही शामिल हो सकते हैं।
2. कैनवेसर तरीका: अगर आप ऑनलाइन फॉर्म नहीं भरना चाहते, तो एक अधिकारी आपके घर आएगा और मोबाइल एप पर आपसे जरूरी सवाल पूछकर आपकी जानकारी दर्ज करेगा। इनमें भी अधिकतम सवाल वही होंगे, जिनकी जानकारी आप सेल्फ एन्यूमरेशन में देंगे।
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सवाल 4: अगर खुद जनगणना का फॉर्म भरना चाहें तो क्या प्रक्रिया है?
जवाब: इसके लिए नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल पर मोबाइल नंबर से लॉग-इन करना होगा। फिर मैप टूल से अपनी लोकेशन चुनकर घर और परिवार की सारी जानकारी भरनी होगी। फॉर्म सबमिट करने के बाद आपको एक खास सेल्फ-एन्यूमरेशन आईडी (SE ID) मिलेगी। जब वेरिफिकेशन के लिए जनगणना अधिकारी आपके घर आएगा, तो आपको बस उसे यह आईडी बतानी होगी और वह आपकी जानकारी कन्फर्म कर देगा।सवाल 5: क्या मुझे अपनी जानकारी साबित करने के लिए कोई दस्तावेज दिखाने होंगे?
जवाब: बिल्कुल नहीं। आपको कोई भी प्रूफ या दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं है। जनगणना कर्मी वही लिखेगा जो आप बताएंगे, लेकिन आपसे यह उम्मीद की जाती है कि आप अपनी जानकारी पूरी ईमानदारी और सच्चाई के साथ दें।सवाल 6: क्या जनगणना में सवालों के जवाब देना जरूरी है?
जवाब: हां, यह पूरी तरह से अनिवार्य है। जनगणना अधिनियम, 1948 (धारा 8) के तहत हर व्यक्ति को सही जानकारी देना कानूनी रूप से जरूरी है। सही जानकारी न देने या अधिकारियों के साथ सहयोग न करने पर अधिनियम की धारा 11(1)(डी) के तहत 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।सवाल 7: क्या मेरे द्वारा दी गई व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रहेगी?
जवाब: आपकी जानकारी 100% सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड रहेगी। जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत, किसी भी व्यक्ति का डाटा पूरी तरह से गोपनीय रखा जाता है। आपकी व्यक्तिगत जानकारी न तो किसी और सरकारी विभाग (एजेंसी) को दी जा सकती है, न ही इसे सूचना के अधिकार (आरटीआई) के जरिए मांगा जा सकता है और न ही अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया जा सकता है। केवल कुल आंकड़ों (जैसे किसी गांव, शहर की कुल आबादी) को ही सार्वजनिक किया जाता है।सवाल 8: अगर मैं स्व-गणना फॉर्म न भरूं और अधिकारी भी मेरे घर न आएं?
जवाब: अगर जनगणना अधिकारी किसी कारणवश आपके घर नहीं आते हैं और आपका परिवार जनगणना में शामिल होने से छूट जाता है, तो आप इसकी शिकायत या जानकारी अपने क्षेत्र के चार्ज ऑफिसर को दे सकते हैं। आमतौर पर आपके इलाके के ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ), तहसीलदार, नगर निगम सचिव या वॉर्ड अधिकारी ही चार्ज ऑफिसर होते हैं।इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर आप अपने जिले के कलेक्टर, डिप्टी कमिश्नर (डीसी), जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) या अपने शहर के कमिश्नर से भी सीधे संपर्क कर सकते हैं, ताकि आपका विवरण जनगणना में शामिल किया जा सके।
सवाल-9: आपसे क्या-क्या सवाल पूछे जाएंगे?
जवाब: स्व-गणना या जनगणना कर्मी की तरफ से मकान सूचीकरण के दौरान लोगों से 33 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें रहने की स्थिति, बुनियादी सुविधाओं और घर की संपत्तियों से जुड़े सवाल शामिल होंगे।
परिवार का विवरण: परिवार के मुखिया का लिंग, घर में रहने वाले निवासियों की कुल संख्या और घर में रहने वाले शादीशुदा जोड़ों की संख्या। अगर लिव-इन कपल्स अपने रिश्ते को स्थायी मानते हैं, तो उन्हें भी शादीशुदा जोड़े के तौर पर गिना जाएगा।
बुनियादी सुविधाएं: पीने के पानी की उपलब्धता, स्नानघर-शौचालय की सुविधा, किस तरह का शौचालय इस्तेमाल हो रहा, बिजली और रसोई में इस्तेमाल होने वाला ईंधन ।
खान-पान: परिवार में मुख्य रूप से किस प्रकार के अनाज का सेवन किया जाता है।
संपत्तियां और डिजिटल गैजेट्स: परिवार के पास रेडियो, टीवी, कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्मार्टफोन जैसी चीजें हैं या नहीं। यह कितनी हैं और किस-किस के पास हैं।
परिवहन: परिवार के पास किस प्रकार के वाहन मौजूद हैं, जैसे कि दोपहिया या चार पहिया वाहन, घरेलू या वाणिज्यिक। तीन-पहिया और ट्रैक्टर के लिए जनगणना में सवाल नहीं है।
सवाल-10: दूसरे चरण के लिए कौन-कौन से सवाल किए जाएंगे?
जवाब: दूसरे चरण (जनसंख्या गणना) के लिए सवालों की आधिकारिक सूची अभी जारी नहीं की गई है। हालांकि, यह चरण मुख्य रूप से व्यक्तियों की विस्तृत जनसांख्यिकी, सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक डाटा को दर्ज करने पर केंद्रित होगा। इस चरण में जो जानकारियां इकट्ठा की जाएंगी उनमें...- घर में रहने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या और उनके नाम।
- लोगों की उम्र, लिंग और वैवाहिक स्थिति।
- व्यक्तियों का धर्म, भाषा और शिक्षा का स्तर।
- विकलांगता और व्यवसाय से जुड़ी जानकारी।
- प्रवास और प्रजनन क्षमता, जिसमें प्रजनन संबंधी जानकारी विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए होगी।
- सबसे बड़े बदलाव के तौर पर पहली बार स्वतंत्र भारत की दशकीय जनगणना में जातिगत डेटा भी डिजिटल रूप से एकत्र किया जाएगा।
सवाल-11: लोग कब तक देख सकेंगे जनगणना से जुड़े आंकड़े?
जवाब: चूंकि इस बार की जनगणना पूरी तरह से डिजिटल है, इसलिए डाटा को संकलित करने में पहले की तरह दो-तीन साल का लंबा समय नहीं लगेगा और आंकड़े बहुत जल्दी जारी किए जाएंगे। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (आरजीआई) के मुताबिक, जनगणना से जुड़े आंकड़े जारी होने की समय-सीमा कुछ इस तरह होगी...
शुरुआती और अस्थायी नतीजे: 2027 के अंत तक
2027 की शुरुआत में फील्ड वर्क (दोनों चरणों) के खत्म होने के कुछ ही समय बाद शुरुआती डाटासेट और अस्थायी नतीजे (प्रोविजनल) जारी होने की उम्मीद है। इसमें मुख्य रूप से जनसंख्या की शुरुआती गिनती और बड़े जनसांख्यिकी के आंकड़े शामिल होंगे।
अंतिम विस्तृत रिपोर्ट: 2028 के अंत तक
सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक मापदंडों के साथ एक व्यापक और अंतिम विस्तृत रिपोर्ट अस्थायी डेटा जारी होने के लगभग एक साल बाद यानी 2028 के अंत तक आने की उम्मीद है।
विशेष और परिसीमन से जुड़े आंकड़े: 2030 तक
कुछ विशेष डेटासेट, जैसे कि चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन के लिए जरूरी आंकड़े, पूरी तरह से तैयार होने में 2030 तक का समय लग सकता है।
नतीजे जल्दी क्यों आएंगे?
इस बार प्रगणक मोबाइल एप के जरिए सीधे इलेक्ट्रॉनिक रूप से डेटा सर्वर पर सबमिट करेंगे, जिससे पुरानी कागजी प्रक्रिया की तरह पेजों को मैन्युअल रूप से स्कैन करने और टाइप करने की जरूरत खत्म हो गई है। मोबाइल ऐप में मौजूद ऑटोमैटिक चेक-सिस्टम सर्वे के दौरान ही गलतियों को सुधार लेगा, जिससे डेटा की छंटाई में लगने वाला समय काफी बच जाएगा।
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