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दुनिया में आपदा के वक्त मददगार बना भारत: वेनेजुएला से नेपाल तक चलाए बड़े राहत अभियान, कैसे बना भरोसेमंद देश?
Sun, 16 Aug 2026 08:31 PM IST
Devesh Tripathi
आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sun, 16 Aug 2026 08:31 PM IST
सार
प्राकृतिक आपदाओं के दौरान दूसरे देशों तक तेजी से मदद पहुंचाने में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। एक मीडिया रिपोर्ट में भारत के कई मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों का जिक्र करते हुए उसे भरोसेमंद प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले देशों में शामिल किया गया है। मालदीव में पेयजल संकट से लेकर नेपाल के भूकंप और म्यांमार की आपदा तक भारत ने राहत सामग्री, बचाव दल और चिकित्सा सुविधाएं भेजीं।
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आपदा राहत में भारत की बढ़ती भूमिका
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भूकंप प्रभावित वेनेजुएला में भारत द्वारा अपनी सबसे लंबी मानवीय सहायता उड़ानों में से एक भेजे जाने के कुछ महीने बाद अब भारत दुनियाभर में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मदद पहुंचाने वाले प्रमुख देशों में उभर रहा है। एक मीडिया रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
थाईलैंड और केन्या में भारत की पूर्व राजदूत सुचित्रा दुरी ने 'द यरुशलम पोस्ट' में लिखा, "आपात स्थिति के दौरान जरूरत के आधार पर तेजी से सहायता देने, पारस्परिक लाभ के लिए क्षमता विकसित करने के प्रयासों के जरिए भारत को एक भरोसेमंद प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले देश और वैश्विक हित के लिए काम करने वाली ताकत के रूप में देखा जाता है।"
मालदीव के लिए ऑपरेशन नीर
सुचित्रा दुरी ने कहा कि 2004 में हिंद महासागर में आई सुनामी ने भारत की मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) की संस्थागत क्षमता के विकास को दिखाया। रिपोर्ट में भारत के सबसे जटिल मानवीय अभियानों में से एक 'ऑपरेशन नीर' का उदाहरण दिया गया। दिसंबर 2014 में मालदीव का एकमात्र डिस्टलाइजेशन संयंत्र खराब होने के बाद वहां पीने का पानी पहुंचाने के लिए यह अभियान शुरू किया गया था।
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भारतीय विमानों और नौसेना के जहाजों ने चौबीसों घंटे काम करके मालदीव को 1,500 टन से अधिक पीने का पानी पहुंचाया था। भारत मालदीव के अनुरोध पर मदद पहुंचाने वाला पहला देश बना था।
नेपाल में भूकंप के बाद ऑपरेशन मैत्री
इसी तरह, अप्रैल 2015 में नेपाल में आए भीषण भूकंप के बाद भारत ने शुरुआती झटकों के छह घंटे के भीतर 'ऑपरेशन मैत्री' शुरू किया था। इसके तहत फंसे भारतीयों और विदेशी नागरिकों को हवाई और सड़क मार्ग से बाहर निकाला गया। सैकड़ों टन जरूरी सामग्री पहुंचाई गई और फील्ड अस्पताल स्थापित किए गए। राहत अभियान पूरा होने के बाद भारत ने नेपाल के लिए करीब दो अरब डॉलर के पुनर्वास और पुनर्निर्माण पैकेज की शुरुआत की।
म्यांमार और श्रीलंका में चलाए कौन से राहत अभियान?
भारत ने 2025 में आपदा प्रभावित म्यांमार और श्रीलंका में भी बचाव और राहत अभियान चलाए। म्यांमार में 'ऑपरेशन ब्रह्मा' और श्रीलंका में 'ऑपरेशन सागर बंधु' के तहत मदद पहुंचाई गई। रिपोर्ट के अनुसार, फील्ड अस्पताल स्थापित करने के अलावा भारत की तीनों सेनाओं और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के संयुक्त अभियान के तहत भूकंप प्रभावित म्यांमार में 750 टन से अधिक सामग्री और उपकरण भेजे गए। इसमें जरूरी दवाएं और खाद्य सामग्री शामिल थी।
वहीं, श्रीलंका में चक्रवात दित्वाह के बाद खाद्य सामग्री, उपकरण, दवाएं और अन्य जरूरी सामान पहुंचाया गया। इसके अलावा 1,000 टन से अधिक सूखा राशन भी भेजा गया। दुरी ने लिखा, "अपने तत्काल पड़ोस से आगे बढ़कर भारत ने 2023 में भूकंप की चपेट में आए तुर्किये और सीरिया के अनुरोध पर भी तेजी से प्रतिक्रिया दी।"
बचाव टीमों के साथ राहत सामग्री भी भेजने में आगे
उन्होंने कहा कि प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले देश के रूप में भारत ने तत्काल मानवीय बचाव अभियान 'ऑपरेशन दोस्त' शुरू किया। इसके तहत दोनों देशों में 250 से अधिक कर्मियों वाली बड़ी खोज और बचाव टीमें भेजी गईं। इनके साथ चिकित्सा दल, डॉग स्क्वॉड और आपात राहत सामग्री भी भेजी गई।
भारत ने 2019 और 2023 में भी इसी तरह के अभियान चलाए थे। इन अभियानों के तहत क्रमश: चक्रवात प्रभावित मोजाम्बिक और मलावी को सहायता दी गई। दुरी ने 'द यरुशलम पोस्ट' में लिखा, "26 जून, 2026 को भारत ने अपना सबसे महत्वाकांक्षी एचएडीआर अभियान चलाया। भूकंप प्रभावित वेनेजुएला में दो सी-17 विमानों से 30 टन मानवीय राहत सामग्री पहुंचाई गई। इसके साथ 41 सदस्यीय टीम भी गई, जिसमें अनुभवी बचावकर्मी और चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल थे।"
कोविड के दौरान 99 देशों के लिए वैक्सीन मैत्री पहल
रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने जनवरी 2021 से 'वैक्सीन मैत्री' पहल के तहत 99 देशों और संयुक्त राष्ट्र की दो संस्थाओं को 30 करोड़ वैक्सीन खुराक उपलब्ध कराईं। इसके साथ जरूरी दवाएं और चिकित्सा सहायता भी दी गई।
दुरी ने यह भी कहा कि भारत ने केवल आपदाओं के बाद प्रतिक्रिया देने तक खुद को सीमित नहीं रखा है। देश ने "अंतरराष्ट्रीय सुनामी चेतावनी प्रणाली" स्थापित करने और "आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन" शुरू करने में भी योगदान दिया है।
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थाईलैंड और केन्या में भारत की पूर्व राजदूत सुचित्रा दुरी ने 'द यरुशलम पोस्ट' में लिखा, "आपात स्थिति के दौरान जरूरत के आधार पर तेजी से सहायता देने, पारस्परिक लाभ के लिए क्षमता विकसित करने के प्रयासों के जरिए भारत को एक भरोसेमंद प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले देश और वैश्विक हित के लिए काम करने वाली ताकत के रूप में देखा जाता है।"
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मालदीव के लिए ऑपरेशन नीर
सुचित्रा दुरी ने कहा कि 2004 में हिंद महासागर में आई सुनामी ने भारत की मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) की संस्थागत क्षमता के विकास को दिखाया। रिपोर्ट में भारत के सबसे जटिल मानवीय अभियानों में से एक 'ऑपरेशन नीर' का उदाहरण दिया गया। दिसंबर 2014 में मालदीव का एकमात्र डिस्टलाइजेशन संयंत्र खराब होने के बाद वहां पीने का पानी पहुंचाने के लिए यह अभियान शुरू किया गया था।
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भारतीय विमानों और नौसेना के जहाजों ने चौबीसों घंटे काम करके मालदीव को 1,500 टन से अधिक पीने का पानी पहुंचाया था। भारत मालदीव के अनुरोध पर मदद पहुंचाने वाला पहला देश बना था।
नेपाल में भूकंप के बाद ऑपरेशन मैत्री
इसी तरह, अप्रैल 2015 में नेपाल में आए भीषण भूकंप के बाद भारत ने शुरुआती झटकों के छह घंटे के भीतर 'ऑपरेशन मैत्री' शुरू किया था। इसके तहत फंसे भारतीयों और विदेशी नागरिकों को हवाई और सड़क मार्ग से बाहर निकाला गया। सैकड़ों टन जरूरी सामग्री पहुंचाई गई और फील्ड अस्पताल स्थापित किए गए। राहत अभियान पूरा होने के बाद भारत ने नेपाल के लिए करीब दो अरब डॉलर के पुनर्वास और पुनर्निर्माण पैकेज की शुरुआत की।
म्यांमार और श्रीलंका में चलाए कौन से राहत अभियान?
भारत ने 2025 में आपदा प्रभावित म्यांमार और श्रीलंका में भी बचाव और राहत अभियान चलाए। म्यांमार में 'ऑपरेशन ब्रह्मा' और श्रीलंका में 'ऑपरेशन सागर बंधु' के तहत मदद पहुंचाई गई। रिपोर्ट के अनुसार, फील्ड अस्पताल स्थापित करने के अलावा भारत की तीनों सेनाओं और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के संयुक्त अभियान के तहत भूकंप प्रभावित म्यांमार में 750 टन से अधिक सामग्री और उपकरण भेजे गए। इसमें जरूरी दवाएं और खाद्य सामग्री शामिल थी।
वहीं, श्रीलंका में चक्रवात दित्वाह के बाद खाद्य सामग्री, उपकरण, दवाएं और अन्य जरूरी सामान पहुंचाया गया। इसके अलावा 1,000 टन से अधिक सूखा राशन भी भेजा गया। दुरी ने लिखा, "अपने तत्काल पड़ोस से आगे बढ़कर भारत ने 2023 में भूकंप की चपेट में आए तुर्किये और सीरिया के अनुरोध पर भी तेजी से प्रतिक्रिया दी।"
बचाव टीमों के साथ राहत सामग्री भी भेजने में आगे
उन्होंने कहा कि प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले देश के रूप में भारत ने तत्काल मानवीय बचाव अभियान 'ऑपरेशन दोस्त' शुरू किया। इसके तहत दोनों देशों में 250 से अधिक कर्मियों वाली बड़ी खोज और बचाव टीमें भेजी गईं। इनके साथ चिकित्सा दल, डॉग स्क्वॉड और आपात राहत सामग्री भी भेजी गई।
भारत ने 2019 और 2023 में भी इसी तरह के अभियान चलाए थे। इन अभियानों के तहत क्रमश: चक्रवात प्रभावित मोजाम्बिक और मलावी को सहायता दी गई। दुरी ने 'द यरुशलम पोस्ट' में लिखा, "26 जून, 2026 को भारत ने अपना सबसे महत्वाकांक्षी एचएडीआर अभियान चलाया। भूकंप प्रभावित वेनेजुएला में दो सी-17 विमानों से 30 टन मानवीय राहत सामग्री पहुंचाई गई। इसके साथ 41 सदस्यीय टीम भी गई, जिसमें अनुभवी बचावकर्मी और चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल थे।"
कोविड के दौरान 99 देशों के लिए वैक्सीन मैत्री पहल
रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने जनवरी 2021 से 'वैक्सीन मैत्री' पहल के तहत 99 देशों और संयुक्त राष्ट्र की दो संस्थाओं को 30 करोड़ वैक्सीन खुराक उपलब्ध कराईं। इसके साथ जरूरी दवाएं और चिकित्सा सहायता भी दी गई।
दुरी ने यह भी कहा कि भारत ने केवल आपदाओं के बाद प्रतिक्रिया देने तक खुद को सीमित नहीं रखा है। देश ने "अंतरराष्ट्रीय सुनामी चेतावनी प्रणाली" स्थापित करने और "आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन" शुरू करने में भी योगदान दिया है।