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7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का एलान: क्या होगा बुलेट ट्रेनों का रूट, किन शहरों से गुजरेगी? जानें किसे-क्या मिला

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 02 Feb 2026 05:59 PM IST
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सार

जिन हाई-स्पीड कॉरिडोर का एलान सीतारमण ने अपने बजट भाषण में किया, वह किन-किन शहरों को जोड़ेंगे? इनकी लंबाई कितनी हो सकती है? इनका रूट क्या होगा? इन्हें लेकर क्या तैयारी है? आइये जानते हैं...

India High Speed Rail Corridors Union Budget 2026 Bullet Trains Hyderabad Chennai Bengaluru Delhi Varanasi
भारत में बढ़ेगा हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का दायरा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रेलवे सेक्टर के लिए बड़ी घोषणाएं की हैं। केंद्रीय बजट 2026 में सबसे अहम घोषणा सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण से जुड़ी है। दिल्ली-वाराणसी, वाराणसी-सिलीगुड़ी सहित सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने का एलान किया गया है। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि पर्यावरण के लिहाज से टिकाऊ पैसेंजर सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए हम शहरों के बीच ग्रोथ कनेक्टर के तौर पर 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाएंगे।  
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर जिन हाई-स्पीड कॉरिडोर का एलान सीतारमण ने अपने बजट भाषण में किया, वह किन-किन शहरों को जोड़ेंगे? इनकी लंबाई कितनी हो सकती है? इनका रूट क्या होगा? इन्हें लेकर क्या तैयारी है? आइये जानते हैं...
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हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से कौन-कौन से शहर जुड़ेंगे?
1. दिल्ली-वाराणसी
2. वाराणसी-सिलीगुड़ी
3. मुंबई-पुणे
4. पुणे-हैदराबाद
5. हैदराबाद-चेन्नई
6. हैदराबाद-बंगलूरू
7. बंगलूरू-चेन्नई

हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से किन-किन शहरों को फायदा?


1. दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर


दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए रूट पर कुल 13 स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं, इनमें दिल्ली का स्टेशन भूमिगत (अंडरग्राउंड) होगा और उत्तर प्रदेश के बाकी 12 स्टेशन पुल पर (एलिवेटेड) होंगे। 

प्रोजेक्ट में अब तक की प्रगति 
  • रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रोजेक्ट मौजूदा समय में योजना और रिपोर्टिंग के उन्नत चरण में है।
  • जनवरी 2021 में इस प्रोजेक्ट के लिए LiDAR (लेजर तकनीक) सर्वे शुरू किया गया, ताकि सटीक रूट मैप तैयार किया जा सके।
  • नवंबर 2021 में नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने अपनी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) भारतीय रेलवे को सौंपी
  • इस रिपोर्ट में पर्यावरणीय प्रभाव, भूमि की आवश्यकता और यात्रियों की संख्या का अध्ययन शामिल है।
  • जुलाई 2022 तक एनएचएसआरसीएल ने कॉरिडोर के अंतिम रूट और स्टेशनों के स्थानों को अंतिम रूप दे दिया था।
  • रेल मंत्रालय ने कुछ समय पहले ही पुष्टि की थी कि प्रोजेक्ट ऑन ट्रैक है और इसे रद्द नहीं किया गया है।
  • अधिकारियों के अनुसार, इस रूट पर बुलेट ट्रेन का संचालन 2029 के आसपास शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

2. वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड कॉरिडोर


 

केंद्र सरकार की ओर से बजट 2026-27 में घोषित किए गए सात हाई-स्पीड कॉरिडोर में से एक वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर होगा। यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के वाराणसी को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से जोड़कर पूर्वोत्तर को मजबूत कनेक्टिविटी देगा। 

ये भी पढ़ें:  Railway Budget 2026: सात रेल स्पीड कॉरिडोर का एलान, दिल्ली-वाराणसी समेत इन शहरों को बड़ी सौगात

प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति?
  • यह बजट में घोषित सात कॉरिडोर में से एकमात्र ऐसा कॉरिडोर है, जिसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) अभी तैयार नहीं हुई है। अन्य छह कॉरिडोर की डीपीआर पहले ही रेल मंत्रालय को सौंपी जा चुकी है।
  • चूंकि यह एक नई घोषणा है, इसलिए इसके लिए सर्वेक्षण और प्रारंभिक तैयारी अभी अपने शुरुआती चरणों में होने की संभावना है। वित्त मंत्री ने इसे एक ग्रोथ कनेक्टर के तौर पर चिह्नित किया है, जो पर्यावरण के अनुकूल टिकाऊ यात्री प्रणाली को बढ़ावा देगा।
  • इस कॉरिडोर से उत्तर भारत और पूर्वी-पूर्वोत्तर भारत को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिलेगी।

3. मुंबई-पुणे और पुणे-हैदराबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर

मुंबई-पुणे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर मुंबई-हैदराबाद हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का एक प्रारंभिक और महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके जरिए हैदराबाद तक मेट्रो शहरों की पहुंच बुलेट ट्रेन के जरिए बढ़ाई जानी है। 

प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति?
  • नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने इस कॉरिडोर की डीपीआर तैयार कर रेल मंत्रालय को अनुमोदन के लिए सौंप दी है। इस रूट के लिए हवाई सर्वेक्षण (LiDAR सर्वे) शुरू किया जा चुका है ताकि सटीक मार्ग तय किया जा सके।
  • वर्तमान में, यह परियोजना रेलवे बोर्ड की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रही है। इसके अलावा, पुणे नगर निगम के कुछ नए शामिल क्षेत्रों (जैसे फुरसुंगी और लोहेगांव) में नियोजन और भूमि संबंधी समन्वय पर काम चल रहा है।

4. हैदराबाद-चेन्नई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर


हैदराबाद-चेन्नई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के जरिए केंद्र सरकार दक्षिण भारत के दो प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़ेगी। 

ये भी पढ़ें: Railway Budget 2026: पूर्वोत्तर रेलवे को मिला 20012 करोड़ का बजट, दो बुलेट ट्रेन की मिली सौगात

प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति?
  • नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड  इस प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी संभाल रहा है। नवंबर 2025 में, दक्षिण मध्य रेलवे ने अंतिम रिपोर्ट तमिलनाडु सरकार को सौंपी। इस रिपोर्ट में कुछ बदलाव की मांग की गई।
  • इस रूट के लिए भारत सरकार की कंपनी राइट्स लिमिटेड (RITES) ने सर्वेक्षण किया है। तमिलनाडु सरकार से मंजूरी मिलने के एक महीने के अंदर इस विस्तृत परियोजना रिपोर्ट डीपीआर को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
  • तमिलनाडु में इस कॉरिडोर के 61 किमी लंबे हिस्से में एक 11.6 किमी लंबी सुरंग का निर्माण होना है, जो तकनीकी रूप से काफी जटिल होगा। रेलवे इंजीनियर्स इसके सर्वे में जुटे हैं।
  • तमिलनाडु में लगभग 223.44 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। अधिकारियों के अनुसार, इस मार्ग में कोई वन भूमि शामिल नहीं है, जिससे पर्यावरण मंजूरी मिलने में आसानी होगी।

5. हैदराबाद-बंगलूरू हाई-स्पीड कॉरिडोर

प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति?
  • सितंबर 2025 में इस कॉरिडोर के लिए सर्वेक्षण कार्य के आदेश दिए गए थे। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के मुताबिक, यह कॉरिडोर हैदराबाद, चेन्नई, अमरावती और बंगलूरू को जोड़ने वाले एक एकीकृत नेटवर्क का हिस्सा बनेगा।
  • नेशनल रेल प्लान (NRP) के अनुसार, हैदराबाद को 2041 तक बंगलूरू से हाई-स्पीड रेल द्वारा जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, अन्य कॉरिडोर की सफलता को देखते हुए इस समय-सीमा को बदला भी जा सकता है।
  • यह कॉरिडोर न केवल यात्रा के समय को कम करेगा, बल्कि मुंबई से हैदराबाद होते हुए बंगलूरू और अंततः चेन्नई तक एक विशाल हाई-स्पीड नेटवर्क तैयार करने में मदद करेगा। इसे दक्षिण भारत के आर्थिक विकास के लिए ग्रोथ कनेक्टर के रूप में देखा जा रहा है।

6. बंगलूरू-चेन्नई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर

ट्रैक का लगभग 84% हिस्सा ऊंचा एलिवेटेड, 11% भूमिगत और पांच फीसदी जमीन पर होगा। इसमें लगभग 30 किमी का सुरंग नेटवर्क भी शामिल होगा।

प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति?
  • नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने इस कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट रेल मंत्रालय को सौंप दी है।
  • हवाई LiDAR सर्वे और संरेखण डिजाइन के अनुबंध पहले ही दिए जा चुके हैं। चेन्नई से कोलार तक का भूमि सर्वेक्षण पूरा हो चुका है।
  • मार्च 2024 तक पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (ईआईए) सहित प्रारंभिक कार्य पूरे कर लिए गए थे। कोलार जिला प्रशासन ने इस संबंध में जन परामर्श भी आयोजित किया।

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