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पुलवामा हमले के खिलाफ बदला लेने में बहुत बंधे हैं भारत के हाथ

शशिधर पाठक अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शशिधर पाठक Updated Wed, 03 Jul 2019 11:12 AM IST
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India is bound to take revenge against Pulwama terror attack
पुलवामा में आतंकियों ने आईईडी धमाका किया था - फोटो : Amar Ujala
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20 साल में कभी पाकिस्तान के साथ नहीं थे इतने खराब रिश्ते

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पुलवामा में आतंकी हमले पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आतंकियों को गंभीर चेतावनी दे दी है। करारा बदला लेने और सुरक्षा बलों को खुली छूट देने की घोषणा कर दी है। देश बहुत गुस्से में हैं। सभी राजनीतिक दल राष्ट्रीय एकता, अखंडता के मुद्दे पर सरकार के साथ हैं, लेकिन कूटनीतिक और रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार सख्त कार्रवाई के लिए भारत के हाथ बहुत बंधे हैं। पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह को भी कोई सही विकल्प नहीं सूझ रहा है। पूर्व विदेश सचिव सलमान हैदर को भी लग रहा है कि समय बहुत कठिन है। सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल भी इसे बहुत आसान नहीं मान रहे हैं। इन सबके बावजूद सबका मानना है कि सही अनुपात में, बेहद सख्त तरीके से पुलवामा में आतंकी हमले का बदला लिया जाना चाहिए।

क्या है मुश्किल

1. अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार विस्फोट भरी कार को बस से ओवरटेक करके टकराने वाला आत्मघाती आतंकी आदिल अहमद डार कश्मीर का भारतीय नागरिक है। जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन ने जिम्मेदारी ली है। आतंकी ने भारतीय क्षेत्र में भारतीय सुरक्षा बल के काफिले पर हमारे देश की कार में विस्फोटक ले जाकर हमला किया है। पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह के अनुसार यह हमारे खुफिया और सुरक्षा तंत्र का नतीजा है। पाकिस्तान इसी बिना पर इसे कश्मीर के लोगों की करतूत बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है।
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2. पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह का कहना है कि पिछले 20 साल में भारत पाकिस्तान के रिश्ते इतने खराब कभी नहीं रहे, जितना चार-पांच साल में हैं। ट्रैक-टू-डिप्लोमेसी, बैक चैनल डिप्लोमेसी और दोनों देशों के विदेश मंत्रालय के स्तर की कूटनीति बहुत प्रभावी नहीं है। दोनों देशों के शीर्ष राजनीतिक स्तर पर बहुत ही सीमित संवाद है। इसके चलते पाकिस्तान के ऊपर भारत का आतंकवाद को रोकने तथा कार्रवाई का दबाव बेअसर हो सकता है।

3. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुलवामा हमला, पाकिस्तान का आतंकवाद और इसकी शिकायत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाने में संतुलित तरीके से आगे बढ़ाना होगा। ऐसा न होने पर अमेरिका, रूस, ब्रिटेन समेत दुनिया के देश जम्मू-कश्मीर के मामले में दखल बढ़ा देंगे। इतना ही नहीं भारत और पाकिस्तान के बीच में बहुत तनाव बढऩे पर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दखल का खतरा रहेगा। इसे पाकिस्तान को चीन से मिलने वाला समर्थन और पेंचीदा बना देता है।

4. सेना या सुरक्षा बल के पास सर्जिकल स्ट्राइक, स्थानीय स्तर पर कार्रवाई, आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई का ही विकल्प है। इसके लिए नियंत्रण रेखा, अंतरराष्ट्रीय सीमा को सुरक्षा बलों द्वारा 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पार करना आसान नहीं है। पाकिस्तान के सुरक्षा बलों से हमले का बदला लेने की स्थिति में दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच इस तरह के तनाव बढ़ेंगे और हालात तनाव पूर्ण होते जाएंगे। कूटनीतिक जानकारों के अनुसार इसका समाधान जंग या जंग से हालात नहीं हैं।

नटवर सिंह और सलमान हैदर दोनों इस तरह के जटिल हालात से सहमत हैं। दोनों कूटनीति के जानकारों का मानना है कि चुनौती आसान नहीं है। इसके पीछे की एक वजह दोनों देशों का परिमाणु हथियारों से संपन्न होना है।  

 

अभी क्या कर रहा है भारत

1. भारत ने कूटनीतिक, राजनीतिक नेतृत्व के स्तर और सुरक्षा बलों के स्तर पर जवाब देने की योजना बनाई है। प्रधानमंत्री ने खुद कहा है कि उन्होंने सुरक्षा बलों को खुली छूट दे दी है। सुरक्षा बल समय और स्थान तय करके पुलवामा में आतंकी हमले का करारा जवाब देंगे। इस पर मेजर जनरल (पूर्व)लखविंदर सिंह का कहना है कि ऐसा कुछ भी बिना मजबूत और स्पष्ट राजनीतिक इच्छा शक्ति के संभव नहीं है। हालांकि रक्षा मामलों के विशेषज्ञ जंग जैसे हालात के पक्ष में नहीं हैं।

2. कूटनीति के स्तर पर भारत ने पाकिस्तान के भारत में उच्चायुक्त सोहेल मोहम्मद को तलब करके उन्हें अपनी कड़ी प्रतिक्रिया से अवगत कराया। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम और जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर सख्त कार्रवाई की मांग की। पाकिस्तान में स्थित भारत के उच्चायुक्त के जरिए भी कूटनीतिक दबाव बनाया है।

3. हंगरी, इटली, जर्मनी समेत तमाम देश के राजदूतों को विदेश मंत्रालय ने आमंत्रित करके उन्हें पाकिस्तान से प्रायोजित आतंकवाद, आतंकवाद को सह के बारे में जानकारी दी है। अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन समेत दुनिया के तमाम देशों ने पुलवामा में आतंकी हमले की तीव्र भत्र्सना की है। भारत से जी-फाईव (अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और जापान) से हमले और पाकिस्तान की जमीन से चलने वाले आतंकी संगठनों के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया जताई है।

 

4. शनिवार 16 जनवरी को आसियान देशों के राजनयिकों के सामने भी विदेश मंत्रालय पाकिस्तान की करतूत उजागर करेगा। इसके अलावा भारत कूटनीतिक तरीके से इस मामले को 17-22 फरवरी के बीच में फाइनेंशियल एक्शन ड्राफ्ट की बैठक में उठाने की तैयारी है। ताकि पाकिस्तान को दुनिया से मिल रही आर्थिक मदद को रोका जा सके।
5. पाकिस्तान को कूटनीतिक तरीके से अलग-थलग करने का प्रयास, लेकिन यह लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया है। वैसे भी देश में आम चुनाव भी कुछ महीने ही दूर है।


कब काम करता है पूरा दबाव

कूटनीतिक जानकारों और सैन्य विशेषज्ञों(ले. जन. सतीश दुआ, मेजर जन, लखविंदर सिंह, ले. जन. बलबीर सिंह संधू) के अनुसार देश के राजनीतिक नेतृत्व, पाकिस्तान के साथ संबंध, सैन्य डिप्लोमेसी, कूटनीतिक रिश्ते और अंतराष्ट्रीय दबाव में संतुलन के बाद दबाव और कार्रवाई की अच्छी स्थिति बनती है। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के विरुद्ध कार्रवाई, सीमा, नियंत्रण रेखा पर शांति, पाकिस्तान के साथ शांति बनाए रखने के प्रयास और पाकिस्तान पर आतंकवाद के विरुद्ध प्रभावी अंतरराष्ट्रीय दबाव के जरिए ही इसका कारगर समाधान निकल सकता है।

मेजर जनरल लखविंदर सिंह का मानना है कि पर कारगिल युद्ध, संसद पर हमला होने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने आपरेशन पराक्रम का आदेश दिया, लेकिन पाकिस्तान के साथ कभी संवाद की स्थिति बंद नहीं की। यही वजह थी कि दबाव बनाने में सफल रहे थे। संघर्ष विराम समझौते तक भारत-पाकिस्तान आ सके थे।
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