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टाटा संस के चेयरमैन बनने में स्पेथ के आगे भारतीय संस्कार व संस्कृति की समस्या 

अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली Updated Sun, 30 Oct 2016 03:58 AM IST
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Indian culture and values are the biggest problem of Speth in becoming Tata Sons chairman
जगुआर लैंड रोवर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, आर.डी. स्पेथ
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हाल ही में टाटा संस के बोर्ड में शामिल होने वाले जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) आर.डी. स्पेथ को टाटा संस के चेयरमैन पद की दौड़ में बताया जा रहा है, लेकिन उनका भारतीय संस्कृति व भारतीय मूल से अलग होना उन्हें इस दौड़ से बाहर कर सकता है। टाटा प्रकरण पर नजदीक  से निगाह रखने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाए जाने वाले साइरस मिस्त्री की परवरिश आयरलैंड में हुई हैं और टाटा संस के चेयरमैन पद पर लंबे समय तक नहीं बने रहने के पीछे कहीं न कहीं यह भी एक कारण हैं। 
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औद्योगिक जगत के मुताबिक टाटा संस का परिचालन भी भारतीय संस्कृति व भारतीय मूल्यों की धारा से मेल खाता है। पश्चिमी विचारधारा जहां किसी यूनिट के या किसी उत्पाद के घाटे में जाने पर उसे तुरंत बंद करने की पक्षधर होती है, वहीं टाटा समूह किसी उत्पाद को किसी यूनिट को सिर्फबिजनेस का जरिया नहीं मानता है, बल्कि उसे टाटा परिवार का हिस्सा माना जाता है। किसी यूनिट के घाटे में रहने पर टाटा परिवार उसकी समीक्षा करता है। अन्य यूनिट की मदद से उसे घाटे से उबारने की कोशिश की जाती है। पश्चिमी विचारधारा इसके विपरीत होती है। 
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सूत्रों के मुताबिक ऐसे में स्पेथ को टाटा संस का चेयरमैन पद मिलने की गुंजाइश कम रह जाती है। हालांकि जगुआर लैंड के सीईओ का पद संभालने के बाद उनके प्रदर्शन को देखते हुए चेयरमैन पद की दौड़ में उनकी दावेदारी अब भी बनी हुई है। फरवरी, 2010 में स्पेथ को जगुआर लैंड रोवर का सीईओ बनाया गया था। नवंबर, 2010 से वह टाटा मोटर्स के गैर कार्यकारी निदेशक पद पर है। जगुआर लैंड का सीईओ पद संभालने के बाद जगुआर की रिकार्ड बिक्री से कंपनी का आय में मजबूती आई है। स्पेथ ने बीएमडब्ल्यू के साथ 20 वर्षों तक काम किया है।
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