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Railway: 17 जुलाई को लॉन्च होगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जानें क्या है किराया और कितने घंटे का होगा सफर
Mon, 06 Jul 2026 03:27 PM IST
Pavan
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Mon, 06 Jul 2026 03:27 PM IST
सार
यह ट्रेन हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर चलाई जाएगी। इसकी शुरुआती रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। इस परियोजना को भारतीय रेलवे के हरित और स्वच्छ परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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17 जुलाई को लॉन्च होगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारतीय रेलवे जल्द ही यात्रियों को देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की सौगात देने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। यह ट्रेन हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर चलेगी। यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से संचालित होगी। खास बात यह है कि ट्रेन को 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत विकसित किया गया है और इसका डिजाइन लखनऊ स्थित आरडीएसओ ने तैयार किया है।
यह ट्रेन हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर चलाई जाएगी और इसकी शुरुआती रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। उद्घाटन से पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सोमवार जींद पहुंचकर तैयारियों का जायजा लेंगे। इस परियोजना को भारतीय रेलवे के हरित और स्वच्छ परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
यह ट्रेन 1200 किलोवाट हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम पर आधारित होगी। ट्रायल रन के दौरान इसकी गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। एक बार रिफ्यूल करने पर यह ट्रेन करीब 250 किलोमीटर तक चल सकेगी। इस ट्रेन में 1200 kW की दो ड्राइविंग पावर यूनिट्स लगी होंगी और इसके साथ 8 पैसेंजर कोच भी शामिल किए गए हैं। ट्रेन में फ्यूल सेल सिस्टम, हाइड्रोजन स्टोरेज सिलेंडर, बैटरियों और कंट्रोल सिस्टम के लिए अलग-अलग स्पेस निर्धारित किया गया है।
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हाइड्रोजन फ्यूल तकनीक के तहत इस ट्रेन में रासायनिक प्रतिक्रिया (केमिकल रिएक्शन) के जरिए बिजली उत्पन्न की जाती है। इस प्रक्रिया में केवल जलवाष्प (वाटर वेपर) और गर्मी उप-उत्पाद के रूप में निकलते हैं, जबकि किसी प्रकार का प्रदूषण या उत्सर्जन (एमिशन) नहीं होता है। इस ट्रेन में करीब 27 हाइड्रोजन सिलेंडर लगाए गए हैं, जिनमें से पीछे के हिस्से में भी 27 सिलेंडर मौजूद हैं।
ट्रेन का डिजाइन विशेष रूप से तैयार किया गया है ताकि संचालन सुरक्षित और प्रभावी रहे। उत्पादन, रिजर्वेशन और फ्यूल भरने की व्यवस्था के दौरान हाइड्रोजन लीकेज डिटेक्टर लगाए गए हैं। इसके अलावा, ट्रेन में फायर डिटेक्टर भी अलग-अलग स्थानों पर स्थापित किए गए हैं। इन सभी सुरक्षा उपकरणों की नियमित रूप से जांच और सफाई की जाती है। इस ट्रेन के डिजाइन और विकास के लिए सरकार ने पूरी तरह आत्मनिर्भर योजना अपनाई है। इसका डिजाइन लखनऊ स्थित आरडीएसओ ने तैयार किया है, जबकि इसके निर्माण का कार्य चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री द्वारा किया गया है।
क्या है किराया और कितने घंटे का होगा सफर?
इस ट्रेन के सोनीपत से लेकर जींद तक छह स्टेशन रहेंगे। इसका न्यूनतम किराया पांच रुपये और अधिकतम 25 रुपये रहेगा। यह 90 किमी सफर एक घंटे में पूरा होगा। वर्तमान में जींद से सोनीपत के बीच डीएमयू ट्रेन चलती है, जो कि दो घंटे का समय लेती है। जबकि रोड के जरिये भी सोनीपत से जींद पहुंचने में डेढ़ घंटे तक लगते हैं। इस ट्रेन में 2500 लोगों के बैठने की क्षमता है। इस ट्रेन को बनाने में 89 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। जींद से सोनीपत की दूरी लगभग 90 किलोमीटर है। यह ट्रेन 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी। ट्रेन को हर घंटे 40 हजार लीटर पानी की जरूरत होगी। स्टेशन की छतों का पानी भी प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन आठ-दस डिब्बों की होगी। यह हाइब्रिड ट्रेनें होंगी, जिनमें अक्षय ऊर्जा भंडारण जैसे बैटरी या सुपर कैपेसिटर लगे होंगे। इंजन में डीजल की जगह फ्यूल सेल, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन डाली जाएगी।
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यह ट्रेन हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर चलाई जाएगी और इसकी शुरुआती रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। उद्घाटन से पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सोमवार जींद पहुंचकर तैयारियों का जायजा लेंगे। इस परियोजना को भारतीय रेलवे के हरित और स्वच्छ परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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यह ट्रेन 1200 किलोवाट हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम पर आधारित होगी। ट्रायल रन के दौरान इसकी गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। एक बार रिफ्यूल करने पर यह ट्रेन करीब 250 किलोमीटर तक चल सकेगी। इस ट्रेन में 1200 kW की दो ड्राइविंग पावर यूनिट्स लगी होंगी और इसके साथ 8 पैसेंजर कोच भी शामिल किए गए हैं। ट्रेन में फ्यूल सेल सिस्टम, हाइड्रोजन स्टोरेज सिलेंडर, बैटरियों और कंट्रोल सिस्टम के लिए अलग-अलग स्पेस निर्धारित किया गया है।
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हाइड्रोजन फ्यूल तकनीक के तहत इस ट्रेन में रासायनिक प्रतिक्रिया (केमिकल रिएक्शन) के जरिए बिजली उत्पन्न की जाती है। इस प्रक्रिया में केवल जलवाष्प (वाटर वेपर) और गर्मी उप-उत्पाद के रूप में निकलते हैं, जबकि किसी प्रकार का प्रदूषण या उत्सर्जन (एमिशन) नहीं होता है। इस ट्रेन में करीब 27 हाइड्रोजन सिलेंडर लगाए गए हैं, जिनमें से पीछे के हिस्से में भी 27 सिलेंडर मौजूद हैं।
ट्रेन का डिजाइन विशेष रूप से तैयार किया गया है ताकि संचालन सुरक्षित और प्रभावी रहे। उत्पादन, रिजर्वेशन और फ्यूल भरने की व्यवस्था के दौरान हाइड्रोजन लीकेज डिटेक्टर लगाए गए हैं। इसके अलावा, ट्रेन में फायर डिटेक्टर भी अलग-अलग स्थानों पर स्थापित किए गए हैं। इन सभी सुरक्षा उपकरणों की नियमित रूप से जांच और सफाई की जाती है। इस ट्रेन के डिजाइन और विकास के लिए सरकार ने पूरी तरह आत्मनिर्भर योजना अपनाई है। इसका डिजाइन लखनऊ स्थित आरडीएसओ ने तैयार किया है, जबकि इसके निर्माण का कार्य चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री द्वारा किया गया है।
क्या है किराया और कितने घंटे का होगा सफर?
इस ट्रेन के सोनीपत से लेकर जींद तक छह स्टेशन रहेंगे। इसका न्यूनतम किराया पांच रुपये और अधिकतम 25 रुपये रहेगा। यह 90 किमी सफर एक घंटे में पूरा होगा। वर्तमान में जींद से सोनीपत के बीच डीएमयू ट्रेन चलती है, जो कि दो घंटे का समय लेती है। जबकि रोड के जरिये भी सोनीपत से जींद पहुंचने में डेढ़ घंटे तक लगते हैं। इस ट्रेन में 2500 लोगों के बैठने की क्षमता है। इस ट्रेन को बनाने में 89 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। जींद से सोनीपत की दूरी लगभग 90 किलोमीटर है। यह ट्रेन 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी। ट्रेन को हर घंटे 40 हजार लीटर पानी की जरूरत होगी। स्टेशन की छतों का पानी भी प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन आठ-दस डिब्बों की होगी। यह हाइब्रिड ट्रेनें होंगी, जिनमें अक्षय ऊर्जा भंडारण जैसे बैटरी या सुपर कैपेसिटर लगे होंगे। इंजन में डीजल की जगह फ्यूल सेल, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन डाली जाएगी।