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Budget 2026: एसटीटी में बढ़ोतरी वृद्धि निवेशकों को अखरी, सट्टेबाजी पर अंकुश से कारोबार पर असर की आशंका
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सार
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता और ट्रंप टैरिफ के दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार पहले से ही कमजोर दौर से गुजर रहा था और रविवार को पेश हुए केंद्रीय बजट ने बाजार को नया झटका दे दिया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बजट में फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग पर टैक्स बढ़ाने की घोषणा ने निवेशकों की सतर्कता और बढ़ा दी है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
- फोटो : ANI
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विस्तार
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता और ट्रंप टैरिफ के दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार पहले से ही कमजोर दौर से गुजर रहा था और रविवार को पेश हुए केंद्रीय बजट ने बाजार को नया झटका दे दिया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बजट में फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग पर टैक्स बढ़ाने की घोषणा ने निवेशकों की सतर्कता और बढ़ा दी है। डेरिवेटिव सेगमेंट में सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स में वृद्धि को बाजार ने कारोबारी लागत बढ़ने और तरलता पर संभावित असर के रूप में देखा है। बाजार की पहले से कमजोर मनोदशा और विदेशी बिकवाली के बीच यह कदम शॉर्ट टर्म में बाजार की अस्थिरता और तेज बिकवाली को जन्म देने वाला साबित हुआ। हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि एसटीटी में यह बदलाव सिर्फ एफएंडओ सेगमेंट तक सीमित है। सट्टेबाजी बाजार को अस्थिर बनाती है और निवेशकों के लिए जोखिम भरी हो सकती है, इसलिए यह मामूली बढ़ोतरी सट्टेबाजी को रोकने के उद्देश्य से की गई है।
घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों की बिकवाली
अभी तक बाजार में एफआईआई लगातार स्टॉक बेच रहे थे। इसका प्रमुख कारण ट्रंप टैरिफ और वैश्विक अनिश्चितता रही है। घरेलू निवेशक अब तक गिरते बाजार में संतुलन बनाए रख रहे थे, लेकिन बजट का यह फैसला उन्हें भी अखरा है। रविवार को घरेलू निवेशकों ने 683 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि एफआईआई ने 588 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने कहा, एफएंडओ में बढ़ती सट्टेबाजी के कारण छोटे और खुदरा निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ रहा था। हमारा मकसद सट्टेबाजी को रोकना है और इसी वजह से टैक्स की दर में यह बढ़ोतरी की गई है। एफएंडओ ट्रेडिंग की मात्रा पर ध्यान दें। इसे जीडीपी या पूरे बाजार के आकार से देखें तो यह बहुत ज्यादा सट्टेबाजी वाली गतिविधि है। इससे छोटे और नए निवेशकों को नुकसान हो सकता है। सरकार का मकसद सिर्फ सट्टेबाजी को रोकना है। हालांकि, एफएंडओ ट्रेडिंग पर एसटीटी बढ़ाने का कदम बाजार विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
बड़े निवेशकों पर बढ़े एसटीटी
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के सह संस्थापक और चेयरमैन रामदेव अग्रवाल ने अमर उजाला से कहा, एसटीटी की बढ़ोतरी बड़े निवेशकों पर होना चाहिए। छोटे कारोबारियों को भी इस दायरे में लेना गलत है।
कारोबारी लागत बढ़ेगी, कामकाज पर असर होगा
सीए-सीएफए पूजन शाह का कहना है कि बजट से एफआईआई को कुछ राहत की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। एसटीटी में बढ़ोतरी से एफआईआई के लिए ट्रांजैक्शन कॉस्ट बढ़ जाएगी, जिससे उनके मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा। एसटीटी बढ़ने से एफआईआई की बाजार में भागीदारी घट सकती है। खासकर बड़े पैमाने पर निवेश करने वाले निवेशक अब भारतीय बाजार की ओर रुख कम कर सकते हैं। इसका सीधा असर ट्रेडिंग वॉल्यूम पर पड़ेगा और बाजार की गतिविधियां सुस्त होने की आशंका है। एसटीटी बढ़ोतरी से सरकार का टैक्स कलेक्शन तो बढ़ सकता है, लेकिन इससे सौदों की मात्रा घटने और रणनीतिक एफ भागीदारी की रफ्तार धीमी होने का जोखिम भी बना रहेगा।
सबसे ज्यादा टैक्स वाला बाजार बना
मेफकॉम कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड के चेयरमैन विजय मेहता ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि भारतीय शेयर बाजार अब दुनिया में सबसे अधिक टैक्स लगाने वाला बाजार बन गया है। पहले से ही शेयर बाजार पर इनकम टैक्स समेत सात अलग अलग प्रकार के टैक्स लागू हैं। एफएंडओ में होने वाले लेन देन को केवल सट्टेबाजी के रूप में देखना गलत है। यह ज्यादातर हेजिंग मैकेनिज्म का हिस्सा है, जो दुनिया के सभी विकसित और उभरते बाजारों में सामान्य रूप से होता है, लेकिन लोगों ने इसे सट्टा बनाने के लिए इस्तेमाल किया। सरकार इसे रोकने के लिए अन्य तरीके इस्तेमाल कर सकती थी, लेकिन उसने टैक्स बढ़ाने का विकल्प चुना। सरकार इस टैक्स से 1020 हजार करोड़ की आय की उम्मीद कर रही है, लेकिन इसी फैसले के चलते बजट वाले दिन करीब 10 लाख करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू गिर गई।
इनका कहना है...
बजट में एसटीटी इतना बढ़ा
सरकार ने बजट में फ्यूचर ट्रेडिंग पर एसटीटी को 0.02 फीसदी से बढ़ाकर 0.05 फीसदी और ऑप्शन प्रीमियम व एक्सरसाइज पर एसटीटी को 0.15 फीसदी कर दिया है। यही वजह रही कि बीते सात साल में बजट वाले दिन रविवार एक फरवरी 2026 को बाजार में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
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घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों की बिकवाली
अभी तक बाजार में एफआईआई लगातार स्टॉक बेच रहे थे। इसका प्रमुख कारण ट्रंप टैरिफ और वैश्विक अनिश्चितता रही है। घरेलू निवेशक अब तक गिरते बाजार में संतुलन बनाए रख रहे थे, लेकिन बजट का यह फैसला उन्हें भी अखरा है। रविवार को घरेलू निवेशकों ने 683 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि एफआईआई ने 588 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने कहा, एफएंडओ में बढ़ती सट्टेबाजी के कारण छोटे और खुदरा निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ रहा था। हमारा मकसद सट्टेबाजी को रोकना है और इसी वजह से टैक्स की दर में यह बढ़ोतरी की गई है। एफएंडओ ट्रेडिंग की मात्रा पर ध्यान दें। इसे जीडीपी या पूरे बाजार के आकार से देखें तो यह बहुत ज्यादा सट्टेबाजी वाली गतिविधि है। इससे छोटे और नए निवेशकों को नुकसान हो सकता है। सरकार का मकसद सिर्फ सट्टेबाजी को रोकना है। हालांकि, एफएंडओ ट्रेडिंग पर एसटीटी बढ़ाने का कदम बाजार विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
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बड़े निवेशकों पर बढ़े एसटीटी
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के सह संस्थापक और चेयरमैन रामदेव अग्रवाल ने अमर उजाला से कहा, एसटीटी की बढ़ोतरी बड़े निवेशकों पर होना चाहिए। छोटे कारोबारियों को भी इस दायरे में लेना गलत है।
कारोबारी लागत बढ़ेगी, कामकाज पर असर होगा
सीए-सीएफए पूजन शाह का कहना है कि बजट से एफआईआई को कुछ राहत की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। एसटीटी में बढ़ोतरी से एफआईआई के लिए ट्रांजैक्शन कॉस्ट बढ़ जाएगी, जिससे उनके मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा। एसटीटी बढ़ने से एफआईआई की बाजार में भागीदारी घट सकती है। खासकर बड़े पैमाने पर निवेश करने वाले निवेशक अब भारतीय बाजार की ओर रुख कम कर सकते हैं। इसका सीधा असर ट्रेडिंग वॉल्यूम पर पड़ेगा और बाजार की गतिविधियां सुस्त होने की आशंका है। एसटीटी बढ़ोतरी से सरकार का टैक्स कलेक्शन तो बढ़ सकता है, लेकिन इससे सौदों की मात्रा घटने और रणनीतिक एफ भागीदारी की रफ्तार धीमी होने का जोखिम भी बना रहेगा।
सबसे ज्यादा टैक्स वाला बाजार बना
मेफकॉम कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड के चेयरमैन विजय मेहता ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि भारतीय शेयर बाजार अब दुनिया में सबसे अधिक टैक्स लगाने वाला बाजार बन गया है। पहले से ही शेयर बाजार पर इनकम टैक्स समेत सात अलग अलग प्रकार के टैक्स लागू हैं। एफएंडओ में होने वाले लेन देन को केवल सट्टेबाजी के रूप में देखना गलत है। यह ज्यादातर हेजिंग मैकेनिज्म का हिस्सा है, जो दुनिया के सभी विकसित और उभरते बाजारों में सामान्य रूप से होता है, लेकिन लोगों ने इसे सट्टा बनाने के लिए इस्तेमाल किया। सरकार इसे रोकने के लिए अन्य तरीके इस्तेमाल कर सकती थी, लेकिन उसने टैक्स बढ़ाने का विकल्प चुना। सरकार इस टैक्स से 1020 हजार करोड़ की आय की उम्मीद कर रही है, लेकिन इसी फैसले के चलते बजट वाले दिन करीब 10 लाख करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू गिर गई।
इनका कहना है...
- गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बजट बनाने वाले तुरंत तेज ग्रोथ के बजाय आर्थिक और बाजार की मजबूती को प्राथमिकता दे रहे हैं। लगातार हो रहा राजकोषीय समेकन और एसटीटी में बढ़ोतरी इसी सोच को दिखाती है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार का मकसद डेरिवेटिव बाजार में जरूरत से ज्यादा सट्टेबाजी को रोकना है, भले ही इसका असर अल्पकाल में शेयर बाजार की तेजी पर पड़े।
- जेफरीज के मुताबिक, एसटीटी में बढ़ोतरी से बाजार की धारणा पर नकारात्मक असर पड़ा है। ऑप्शन और फ्यूचर के कारोबार पर इसका प्रभाव सीमित रह सकता है। ट्रेडिंग वॉल्यूम में करीब 5 फीसदी तक की कमी आ सकती है।
- फ्रैंकलिन टेम्पलटन का कहना है कि फ्यूचर और ऑप्शन पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स बढ़ने से बाजार के वॉल्यूम पर दबाव पड़ेगा। इसका सीधा असर स्टॉक एक्सचेंजों और ब्रोकरेज कंपनियों की आय पर भी देखने को मिल सकता है।
बजट में एसटीटी इतना बढ़ा
सरकार ने बजट में फ्यूचर ट्रेडिंग पर एसटीटी को 0.02 फीसदी से बढ़ाकर 0.05 फीसदी और ऑप्शन प्रीमियम व एक्सरसाइज पर एसटीटी को 0.15 फीसदी कर दिया है। यही वजह रही कि बीते सात साल में बजट वाले दिन रविवार एक फरवरी 2026 को बाजार में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
