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IPAC Raid Row: ईडी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, क्या CM ममता के खिलाफ दर्ज होगी FIR?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Wed, 18 Feb 2026 01:53 AM IST
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सार

इस मामले में 15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने तलाशी से जुड़े मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर रोक लगा दी थी और तलाशी स्थल व आसपास के सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था।

ipac raid row supreme court to hear ed plea against mamata banerjee on february 18
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कोलकाता में इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी के दफ्तर और इसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी के दौरान हस्तक्षेप का आरोप लगाया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर जारी कॉज लिस्ट के मुताबिक, मामला 18 फरवरी को जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है।
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पिछले सप्ताह क्यों टली थी सुनवाई?
पिछले सप्ताह वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की अस्वस्थता के कारण सुनवाई स्थगित कर दी गई थी। ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि सिब्बल पेश नहीं हो पाएंगे। उन्होंने कहा, “मैं इस आधार पर विरोध नहीं कर सकता। यदि इसे 18 फरवरी तक रखा जाए।” इसके बाद पीठ ने मामले को 18 फरवरी के लिए टाल दिया।

ईडी ने शीर्ष अदालत से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और कोलकाता पुलिस आयुक्त के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश देने की मांग की है। एजेंसी का आरोप है कि तलाशी अभियान के दौरान उसके वैधानिक कर्तव्यों में बाधा डाली गई।

ममता बनर्जी ने किया सभी आरोपों से इनकार
अपने जवाबी हलफनामे में ममता बनर्जी ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि वह 8 जनवरी 2026 को प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास और बिधाननगर स्थित आईपरैक कार्यालय इसलिए गई थीं क्योंकि उन्हें सूचना मिली थी कि तलाशी के दौरान तृणमूल कांग्रेस का संवेदनशील राजनीतिक डेटा एक्सेस किया जा रहा है।

हलफनामे में कहा गया है कि यह डेटा आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति से “गहराई से जुड़ा” था। बनर्जी के अनुसार, उन्होंने ईडी अधिकारियों से विनम्रतापूर्वक पार्टी के डेटा और संबंधित उपकरण/फाइलें लेने की अनुमति मांगी थी, जिस पर अधिकारियों ने आपत्ति नहीं की। डेटा लेने के बाद वह वहां से चली गईं ताकि तलाशी प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।

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ममता बनर्जी ने लगाया डेटा चोरी का आरोप
हलफनामे में यह भी दावा किया गया है कि ईडी की पंचनामा रिपोर्ट में दर्ज है कि तलाशी “शांतिपूर्वक और व्यवस्थित तरीके से” जारी रही। मुख्यमंत्री ने यह भी तर्क दिया है कि कथित कोयला घोटाले में न तो तृणमूल कांग्रेस और न ही उसके पदाधिकारी आरोपी हैं, इसलिए ईडी को पार्टी के गोपनीय डेटा पर दावा करने का अधिकार नहीं है।

जवाबी हलफनामे में ईडी पर दुर्भावनापूर्ण मंशा से कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि छापेमारी 2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले की गई और यह उस समय हुई जब आईपैक के पास संभावित उम्मीदवारों की सूची सहित “महत्वपूर्ण दस्तावेज” मौजूद थे। हलफनामे में मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत वैधानिक सुरक्षा उपायों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है और कहा गया है कि ईडी तलाशी की कोई ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग पेश नहीं कर सकी, जिससे कार्रवाई की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।

(आईएएनएस से)
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