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IPS: केंद्र में IGP की नियुक्ति लेनी है तो SP-DIG के लिए दो साल की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति अनिवार्य, IPS के 700

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 31 Jan 2026 03:12 PM IST
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सार

Union Home Ministry: केंद्र में आईपीएस प्रतिनियुक्ति के लिए 700 से ज्यादा पद स्वीकृत किए हैं। जबकि 200 से अधिक पद खाली भी पड़े हैं। इस खाली पदों में ज्यादातर डीआईजी और एसपी के पद शामिल हैं। तमाम प्रयासों के बावजूद डीआईजी और एसपी के लिए स्वीकृत पद भर नहीं सके हैं।

IPS: Two years of central deputation is mandatory for SP-DIGs if they wish to be appointed as IGPs at Centre
केंद्रीय गृह मंत्रालय - फोटो : ANI
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विस्तार
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) और उप महानिरीक्षक (डीआईजी) रैंक के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों के लिए केंद्र सरकार में पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) के पद पर नियुक्ति के लिए दो साल की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति अनिवार्य कर दी है। यह आदेश 2011 बैच से आगे के आईपीएस अधिकारियों पर लागू होगा। फिलहाल केंद्र में आईपीएस प्रतिनियुक्ति के लिए 700 से ज्यादा पद स्वीकृत किए हैं। मौजूदा समय में 200 से अधिक पद खाली पड़े हैं। खाली पदों में ज्यादातर डीआईजी और एसपी के पद शामिल हैं। तमाम प्रयासों के बावजूद डीआईजी और एसपी के लिए स्वीकृत पद भर नहीं सके हैं।
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पिछले दिनों केंद्र में विभिन्न राज्यों से प्रतिनियुक्ति पर आने वाले 'आईपीएस' अधिकारियों के लिए स्वीकृत पदों की संख्या में इजाफा किया गया है। जून 2025 में 678 आईपीएस अधिकारी, केंद्र में तैनात थे। अब यह संख्या, 700 के पार पहुंच गई है। पिछले साल जून की रिपोर्ट के अंतर्गत 15 डीजी, 12 एसडीजी, 26 एडीजी, 150 आईजी, 254 डीआईजी और 221 एसपी के पद स्वीकृत थे। वहीं 23 दिसंबर 2025 में आईपीएस 'प्रतिनियुक्ति' स्वीकृत पदों की संख्या बढ़ा दी गई। फिलहाल, केंद्र में डीजी के 15 पद, एसडीजी के 17 पद, एडीजी के 30 पद, आईजी के 158 पद, डीआईजी के 256 पद और एसपी के 225 पद स्वीकृत किए गए हैं। खास बात है कि केंद्र सरकार में बतौर प्रतिनियुक्ति, आईपीएस के लिए स्वीकृत पदों की संख्या बढ़ाए जाने के बाद भी 212 पद खाली पड़े हैं।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की 23 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, आईपीएस आईजी प्रतिनियुक्ति के लिए स्वीकृत 158 पदों में से 26 पद खाली पड़े हैं। डीआईजी के लिए स्वीकृत 256 पदों में से 69 पद रिक्त थे। एसपी के पद की बात करें तो 225 में से 104 पद खाली पड़े हैं। युवा आईपीएस अफसर, देश की शीर्ष खुफिया एजेंसी 'आईबी' में काम करने के इच्छुक नहीं हैं। वजह, 'आईबी' में एसपी (आईपीएस) के लिए 83 पद स्वीकृत हैं, लेकिन 47 पद खाली पड़े हैं। सीबीआई में एसपी (आईपीएस) के लिए 78 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें भी 42 पद रिक्त हैं। 

इन दोनों शीर्ष केंद्रीय एजेंसियों में 'डीआईजी' (आईपीएस) के पद भी पूरी तरह से नहीं भर पा रहे हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी 'एनआईए' में आईपीएस एसपी के 39 पदों में से 8 खाली हैं। राष्ट्रीय पुलिस अकादमी 'एनपीए' में आईपीएस एसपी के लिए 14 पद स्वीकृत हैं, मगर इनमें से 6 पद रिक्त हैं। अगर डीआईजी (आईपीएस) की बात करें तो यहां भी अमूमन वैसी ही स्थिति है। बीएसएफ में डीआईजी के लिए स्वीकृत 26 पदों में से 8 खाली पड़े हैं। सीबीआई में 34 डीआईजी के पदों में से 5 रिक्त हैं। सीआईएसएफ में 31 में से 9 पद खाली हैं। आईबी में डीआईजी के 63 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 38 पद खाली हैं। यहां भी पचास फीसदी से अधिक पद रिक्त हैं। एनआईए में डीआईजी के 15 में से 4 पद खाली हैं।  

2025 में फरवरी के पहले सप्ताह की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र में बतौर प्रतिनियुक्ति आईपीएस आईजी के 149 पद थे, जिनमें से 27 रिक्त थे। आईजी के लिए स्वीकृत 256 पदों में से 68 पद रिक्त दिखाए गए। एसपी आईपीएस के 221 पद स्वीकृत थे, जिनमें से 126 पद खाली रहे। सीबीआई जैसी प्रतिष्ठित जांच एजेंसी में आईपीएस एसपी के 73 पद स्वीकृत किए गए, लेकिन 54 पद खाली पड़े रहे। इंटेलिजेंस ब्यूरो 'आईबी' में एसपी आईपीएस के 83 पद मंजूर किए गए, यहां भी 55 पद रिक्त पड़े थे। आईबी में डीआईजी आईपीएस के 63 पद रिजर्व किए गए थे, लेकिन 30 पद खाली पड़े रहे। एक मार्च 2024 की स्थिति देखें तो आईजी के 149 पदों में से 30 पद रिक्त थे। डीआईजी के 256 पदों में से 70 पद रिक्त रहे। एसपी आईपीएस के 228 पदों में से 132 पद खाली थे। 

मार्च 2023 की स्थिति के अनुसार, विभिन्न केंद्रीय सुरक्षा बलों, आयोगों और जांच एवं खुफिया एजेंसियों में डीआईजी 'आईपीएस' के लिए 255 पद स्वीकृत थे, जिनमें से 77 पद खाली पड़े थे। इससे पहले खाली पदों की यह संख्या 120 से 186 के बीच रही है। दिसंबर 2021 की स्थिति के अनुसार, आईपीएस डीआईजी के लिए 252 पद स्वीकृत थे, 118 पद रिक्त थे। इसी तरह एसपी 'आईपीएस' के लिए 203 पद मंजूर किए गए, लेकिन 104 पद खाली पड़े रहे।

जुलाई 2020 की स्थिति के मुताबिक, केंद्र में डीआईजी 'आईपीएस' के लिए 254 पद स्वीकृत थे। इनमें से 164 पद खाली थे। एसपी 'आईपीएस' के लिए स्वीकृत पदों की संख्या 199 थी, मगर इनमें से 97 पद रिक्त रहे। सीबीआई में तब आईपीएस डीआईजी के स्वीकृत 35 में से 20 पद खाली थे। सीआईएसएफ में 20 में से 16 पद रिक्त थे। आईबी में आईपीएस डीआईजी के 63 में से 28 पद और आईपीएस एसपी के 83 में से 49 पद खाली रह गए थे।

बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद बताते हैं कि आईपीएस अधिकारी किसी भी तरह की सख्त जॉब से बचना चाहते हैं। उन्हें अपने राज्य में एसपी के पद पर जिला पुलिस की कमान संभालने का मौका मिलता है, इसलिए वे वहां से कहीं नहीं जाना चाहते। जब वे डीआईजी बनते हैं तो खुद के लिए सुविधा वाली पोस्टिंग तलाशते हैं। अगर उन्हें वह पद केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर नहीं मिलता तो वे ऐसे पद पर ज्वाइन नहीं करते। केंद्रीय पुलिस संगठन या अर्धसैनिक बलों में डीआईजी बनकर आईपीएस नहीं आना चाहते। इन बलों में डीआईजी का पद 'फील्ड पोस्टिंग' के अंतर्गत आता है। पूर्व एडीजी के मुताबिक, ऐसे में आईपीएस की बॉर्डर एरिया में तैनाती होती है। कई अफसर हेडक्वार्टर में रहने का जुगाड़ कर लेते हैं, लेकिन ज्यादातर डीआईजी को दूरदराज की यूनिटों में पोस्टिंग मिलती है। 

आईजी/एडीजी/एसडीजी जैसे पद ज्यादातर मुख्यालयों में होते हैं, इसलिए आईपीएस यहां तुरंत ज्वाइन कर लेते हैं। खाली पड़े पदों पर सीएपीएफ के कैडर अधिकारियों को स्थायी पदोन्नति नहीं दी जाती। कुछ वर्षों से यह प्रचलन देखने को मिला है कि जब आईपीएस अफसर 'डीआईजी' के पद पर ज्वाइन नहीं करते हैं तो कुछ पदों को कैडर अधिकारियों की तरफ डायवर्ट कर दिया जाता है। ये पद अस्थायी तौर पर कैडर अधिकारियों को दिए जाते हैं। बतौर एसके सूद, मन मुताबिक पोस्टिंग नहीं मिलती तो फिर आईपीएस अधिकारी केंद्र में क्यों आएंगे। आईबी और सीबीआई में भी इसी वजह से आईपीएस एसपी के ज्यादातर पद खाली पड़े रहते हैं। 

मौजूदा समय में स्टेट पुलिस में डीआईजी का ज्यादा रोल नहीं बचा है। अब तो कई राज्यों में आईएएस के पदों पर भी आईपीएस लगाए जाने लगे हैं। चार पांच साल पहले भारतीय पुलिस सेवा (आईपीस) के 17 सेवानिवृत्त अधिकारियों ने सेवारत आईपीएस से केंद्र सरकार के तहत सेवा देने के लिए आगे आने की अपील की थी। पूर्व अफसरों ने कहा, आईपीएस को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आना चाहिए। उन्हें यहां पर विभिन्न जांच एजेंसियों और सुरक्षा बलों में काम करने का मौका मिलता है। वे समय रहते इन अवसरों का लाभ उठाएं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति, केंद्र और राज्य सरकार के बीच संबंधों को मजबूत करती है। अखिल भारतीय सेवाएं ही सबसे महत्वपूर्ण सूत्र हैं जो भारतीय संघ और राज्यों को एक साथ जोड़ते हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारियों के रूप में हम आईपीएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आने के लिए प्रोत्साहित करने तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के वृहद एवं सूक्ष्म स्तर पर योगदान के लिए भारत सरकार की पहल का समर्थन करते हैं। 

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आईपीएस, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को हल्के में न लें, इसके लिए केंद्र सरकार ने 2022 में प्रतिनियुक्ति के नियम कुछ आसान बनाए थे तो वहीं अफसरों को चेताया भी था। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया था कि किसी आईपीएस को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए अनुमोदित किया जाता है और वह अपनी नियुक्ति लेने में विफल रहता है तो उसे पांच वर्ष की अवधि के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति और विदेश में नियुक्ति/परामर्श से वंचित कर दिया जाएगा। आईपीएस अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति 'आईपीएस कार्यकाल नीति' के अंतर्गत शासित होती है। उक्त नीति के पैरा 17 के अनुसार, कोई अधिकारी, जिसे केंद्र सरकार के तहत किसी पद पर नियुक्ति के लिए अनुमोदित किया जाता है, अगर वह अपनी नियुक्ति लेने में विफल रहता है तो उसे पांच वर्ष की अवधि के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति और विदेश में नियुक्ति से वंचित कर दिया जाएगा। 

केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक कमेटी ने यह सुझाव दिया था कि आईपीएस डीआईजी की प्रतिनियुक्ति के लिए पैनल प्रक्रिया को समाप्त कर दिया जाए। इसके पूरा होने में काफी समय लगता है। सरकार के इस कदम का मकसद, केंद्र में डीआईजी-रैंक के अधिकारियों की भारी कमी को दूर करना था। वह सुझाव मान लिया गया था। इसके बाद सरकार को यह उम्मीद जगी थी कि डीआईजी-रैंक के अधिकारियों के लिए पैनल सिस्टम को खत्म करने से अब प्रतिनियुक्ति पर अधिक आईपीएस केंद्र में आ सकेंगे। मनोनयन प्रक्रिया पूरी होने में करीब एक साल लग जाता था। केंद्र ने 'अखिल भारतीय सेवा' नियमों में संशोधन भी किया था। उसमें कहा गया था कि केंद्र सरकार, आईएएस व आईपीएस अधिकारी को राज्य की अनुमति या बिना अनुमति के भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बुला सकती है।
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