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US-Iran: क्या परमाणु पर बढ़ेगा टकराव? वार्ता से पहले ईरानी मंत्री की दो टूक, कहा- धमकियों के आगे नहीं झुकेंगे

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्न Published by: हिमांशु चंदेल Updated Mon, 16 Feb 2026 04:47 PM IST
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Iran nuclear talks Geneva diplomacy negotiations nuclear agreement watchdog IAEA meeting Abbas Araghchi
अब्बास अराघची, ईरान के विदेश मंत्री - फोटो : ANI
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जिनेवा में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमेरिका के साथ दूसरे दौर की वार्ता से ठीक पहले ईरान के शीर्ष राजनयिक ने संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी के प्रमुख से मुलाकात की। इस मुलाकात को संभावित परमाणु समझौते की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। दूसरी ओर अमेरिकी दबाव, सैन्य तैनाती और प्रतिबंधों का मुद्दा भी बराबर गरम है।
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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जिनेवा में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि वह एक “न्यायसंगत और संतुलित समझौते” के लिए ठोस प्रस्ताव लेकर आए हैं। साथ ही साफ किया कि धमकी के आगे झुकना किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं होगा। अराघची ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी से भी मिलने वाले हैं। ओमान ही अमेरिका-ईरान वार्ता की मेजबानी कर रहा है और मंगलवार को जिनेवा में अगला दौर प्रस्तावित है।
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क्या ईरान समझौते के लिए नरम रुख दिखा रहा है?
ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त-रवांची ने संकेत दिया है कि तेहरान परमाणु मुद्दे पर समझौते के लिए तैयार हो सकता है, लेकिन बदले में अमेरिका से प्रतिबंधों में राहत चाहता है। उन्होंने कहा कि अब गेंद अमेरिका के पाले में है और उसे ईमानदारी दिखानी होगी। ईरान का कहना है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर चर्चा को तैयार है, बशर्ते प्रतिबंधों पर भी समानांतर बातचीत हो। छह फरवरी को ओमान ने दोनों देशों के बीच पहली अप्रत्यक्ष वार्ता की मेजबानी की थी।

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अब तक वार्ता और टकराव की टाइमलाइन क्या रही?
  • पिछले साल अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत हुई थी।
  • इस्राइल-ईरान के 12 दिन के युद्ध के बाद प्रक्रिया टूट गई।
  • इस युद्ध के दौरान अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी भी की थी।
  • युद्ध के बाद ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ सहयोग निलंबित कर दिया था।
  • एजेंसी ने कहा कि वह ईरान के उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम भंडार की पूरी पुष्टि नहीं कर पा रही है।
  • ईरान ने कुछ सुरक्षित स्थलों तक सीमित पहुंच दी, लेकिन सभी ठिकानों का निरीक्षण अब भी नहीं हो सका है।

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अमेरिका का दबाव और ट्रंप का सख्त रुख क्या है?
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल के हफ्तों में ईरान पर सैन्य और कूटनीतिक दबाव दोनों बढ़ाया है। पहले उन्होंने ईरान में विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई को लेकर सैन्य कदम की चेतावनी दी थी, बाद में परमाणु समझौते के लिए दबाव अभियान शुरू किया। ट्रंप ने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड मध्य पूर्व भेजा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन सबसे अच्छा विकल्प होगा। अमेरिका का स्पष्ट रुख है कि किसी भी समझौते में ईरान को यूरेनियम संवर्धन की अनुमति नहीं होगी, जबकि ईरान इसे मानने को तैयार नहीं है।

परमाणु कार्यक्रम पर असली विवाद कहां है?
ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। हालांकि उसके कुछ अधिकारी परमाणु हथियार की दिशा में बढ़ने की चेतावनी भी दे चुके हैं। युद्ध से पहले ईरान 60 प्रतिशत तक यूरेनियम समृद्ध कर रहा था, जो हथियार स्तर से थोड़ा ही नीचे है। एजेंसी प्रमुख ग्रॉसी ने कहा था कि इतना भंडार सैद्धांतिक रूप से कई परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ईरान के पास हथियार मौजूद हैं।

इस्राइल की चिंता और नई शर्तें क्या हैं?
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हाल ही में वॉशिंगटन पहुंचे और ट्रंप से मुलाकात की। उन्होंने आग्रह किया कि किसी भी संभावित समझौते में ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को निष्क्रिय करने और हमास व हिज्बुल्लाह जैसे समूहों को मिलने वाली फंडिंग रोकने की शर्त शामिल हो। जिनेवा में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले रूस-यूक्रेन प्रतिनिधियों के साथ भी अलग वार्ता सत्र तय है। इससे साफ है कि जिनेवा इस समय बड़े भू-राजनीतिक फैसलों का केंद्र बना हुआ है।


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