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'संघ की देन नहीं हिंदू-मुस्लिम तनाव': सुनील आंबेकर बोले- राजनीति नहीं; पूरे समाज को खुद ढूंढना होगा समाधान
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Tue, 16 Jun 2026 09:33 PM IST
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सार
देश की सामाजिक समस्याओं के लिए पूरा समाज जिम्मेदार है। इसका हल केवल राजनीति से नहीं निकल सकता। सभी धर्मों को नियमों का पालन करते हुए एक साथ मिल-जुलकर रहना होगा। यह बातें आरएसएस नेता सुनील आंबेकर ने कही है। उन्होंने और क्या-क्या कहा? जानिए...
सुनील आंबेकर, आरएसएस नेता
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
देश में जाति और धर्म के नाम पर तनाव है। इस तनाव के लिए किसी एक संगठन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। यह पूरे समाज की समस्या है। इसे मिलकर ही सुलझाया जा सकता है। यह बात आरएसएस के नेता सुनील आंबेकर ने कही। वे मंगलवार को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम 'इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र' (आईवीएसके) ने आयोजित किया था। इसमें उत्कृष्ट काम करने वाले पत्रकारों को देवर्षि नारद पत्रकार सम्मान 2026 दिया गया।
सुनील आंबेकर ने वहां सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि अच्छी बातों का श्रेय सब लेते हैं। लेकिन सामाजिक बुराइयों का ठीकरा किसी एक पर फोड़ दिया जाता है। यह तरीका पूरी तरह गलत है।
ट्रैफिक नियमों से समझाया सह-अस्तित्व
सुनील आंबेकर ने हिंदू-मुस्लिम मुद्दे पर बात की। उन्होंने कहा कि यह समस्या संघ के बनने से पहले की है। इसलिए इसे संघ और मुस्लिम का विवाद कहना गलत है। यह असल में हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच का विषय है। इस पर पूरे समाज को मिलकर सोचना होगा। यही बात जातिवाद पर भी लागू होती है।
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उन्होंने इसे समझाने के लिए सड़क और गाड़ियों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सड़क पर जैसे कई गाड़ियां एक साथ चल सकती हैं, वैसे ही देश में अलग-अलग धर्म एक साथ रह सकते हैं। जैसे नई गाड़ियां आ सकती हैं, वैसे ही नए विचार आ सकते हैं। इसमें कोई बुराई नहीं है। बस सबको सड़क के नियमों का पालन करना होगा। यही नियम 'धर्म' है। उन्होंने आगे कहा कि धर्म का मतलब आपसी तालमेल है। इसका मकसद आपस में लड़ना बिल्कुल नहीं है।
यह भी पढ़ें: G7 शिखर सम्मेलन: 16 महीने बाद पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात, वैश्विक मंच पर दिखी गर्मजोशी
राजनीति से ऊपर उठना होगा
संघ नेता ने कहा कि सामाजिक बुराइयों का हल केवल राजनीति से नहीं होगा। इसके लिए समाज को बदलना होगा। राजनीति जरूरी है, लेकिन वह सब कुछ नहीं है। हमें हर मुद्दे को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहिए। उन्होंने श्रम के सम्मान पर भी जोर दिया। आंबेकर ने कहा कि जब तक हर काम को बराबर सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक एक बेहतर अर्थव्यवस्था नहीं बन सकती। यह भावना किसी डर से नहीं, बल्कि दिल से आनी चाहिए।
एआई नहीं ले सकता इंसानों की जगह
कार्यक्रम में आंबेकर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भी बात की। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि एआई केवल मदद के लिए है। यह कभी भी पत्रकारों की जगह नहीं ले सकता। मनुष्य के पास सोचने और फैसला लेने की क्षमता है। तकनीक इसकी बराबरी नहीं कर सकती। उन्होंने एआई में भारतीय भाषाओं और पारंपरिक ज्ञान को जोड़ने का स्वागत किया। हालांकि, उन्होंने सचेत किया कि तकनीक के चक्कर में इंसान को अपनी सोचने की क्षमता नहीं खोनी चाहिए।
सुनील आंबेकर ने वहां सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि अच्छी बातों का श्रेय सब लेते हैं। लेकिन सामाजिक बुराइयों का ठीकरा किसी एक पर फोड़ दिया जाता है। यह तरीका पूरी तरह गलत है।
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ट्रैफिक नियमों से समझाया सह-अस्तित्व
सुनील आंबेकर ने हिंदू-मुस्लिम मुद्दे पर बात की। उन्होंने कहा कि यह समस्या संघ के बनने से पहले की है। इसलिए इसे संघ और मुस्लिम का विवाद कहना गलत है। यह असल में हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच का विषय है। इस पर पूरे समाज को मिलकर सोचना होगा। यही बात जातिवाद पर भी लागू होती है।
उन्होंने इसे समझाने के लिए सड़क और गाड़ियों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सड़क पर जैसे कई गाड़ियां एक साथ चल सकती हैं, वैसे ही देश में अलग-अलग धर्म एक साथ रह सकते हैं। जैसे नई गाड़ियां आ सकती हैं, वैसे ही नए विचार आ सकते हैं। इसमें कोई बुराई नहीं है। बस सबको सड़क के नियमों का पालन करना होगा। यही नियम 'धर्म' है। उन्होंने आगे कहा कि धर्म का मतलब आपसी तालमेल है। इसका मकसद आपस में लड़ना बिल्कुल नहीं है।
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राजनीति से ऊपर उठना होगा
संघ नेता ने कहा कि सामाजिक बुराइयों का हल केवल राजनीति से नहीं होगा। इसके लिए समाज को बदलना होगा। राजनीति जरूरी है, लेकिन वह सब कुछ नहीं है। हमें हर मुद्दे को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहिए। उन्होंने श्रम के सम्मान पर भी जोर दिया। आंबेकर ने कहा कि जब तक हर काम को बराबर सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक एक बेहतर अर्थव्यवस्था नहीं बन सकती। यह भावना किसी डर से नहीं, बल्कि दिल से आनी चाहिए।
एआई नहीं ले सकता इंसानों की जगह
कार्यक्रम में आंबेकर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भी बात की। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि एआई केवल मदद के लिए है। यह कभी भी पत्रकारों की जगह नहीं ले सकता। मनुष्य के पास सोचने और फैसला लेने की क्षमता है। तकनीक इसकी बराबरी नहीं कर सकती। उन्होंने एआई में भारतीय भाषाओं और पारंपरिक ज्ञान को जोड़ने का स्वागत किया। हालांकि, उन्होंने सचेत किया कि तकनीक के चक्कर में इंसान को अपनी सोचने की क्षमता नहीं खोनी चाहिए।