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Politics: मानसून सत्र से पहले जयराम रमेश ने सरकार को घेरा, लगाए गंभीर आरोप; द्रमुक को लेकर किया बड़ा दावा
Fri, 17 Jul 2026 07:16 PM IST
अमन तिवारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 17 Jul 2026 07:16 PM IST
सार
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि कांग्रेस से नाराजगी के बावजूद द्रमुक (DMK) परिसीमन विधेयक पर तमिलनाडु के हितों को ध्यान में रखकर फैसला करेगी। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष एकजुट होकर सरकार के विधेयकों का विरोध करेगा।
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जयराम रमेश, महासचिव, कांग्रेस
- फोटो : ANI
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विस्तार
संसद के मानसून सत्र से पहले कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने विपक्षी एकजुटता और आने वाले विधेयकों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में कांग्रेस के टीवीके (TVK) के साथ जाने और द्रमुक (DMK) से गठबंधन तोड़ने के कारण द्रमुक कांग्रेस से थोड़ी नाराज है। द्रमुक ने संसद में अलग बैठने की व्यवस्था भी मांगी है। इसके बावजूद, द्रमुक और भाजपा की विचारधारा में कोई समानता नहीं है। जयराम रमेश को भरोसा है कि द्रमुक परिसीमन (डीलिमिटेशन) विधेयक पर तमिलनाडु और दक्षिण भारत के हितों को ध्यान में रखकर ही कोई कदम उठाएगी। द्रमुक नेता एम के स्टालिन ने भी कहा है कि वे पहले इस विधेयक के प्रावधानों को देखना चाहते हैं।
जयराम रमेश ने सरकार पर साधा निशाना
जयराम रमेश ने कहा कि सरकार मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक ला सकती है। इनमें 131वां संविधान संशोधन विधेयक (परिसीमन) शामिल है, जो लोकसभा सीटों को बढ़ाने से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक केवल 2029 के चुनावों को ध्यान में रखकर लाया जा रहा है। यह उन दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों के हितों के खिलाफ है जिन्होंने परिवार नियोजन में सफलता हासिल की है। उन्होंने आगे कहा, कुछ विपक्षी पार्टियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए अमित शाह जो समझौते की बातें कर रहे हैं, वे भी बेमतलब हैं क्योंकि संविधान में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जो बने रहेंगे और गृह मंत्री जिन समझौतों की बात कर रहे हैं, उन पर भारी पड़ेंगे।
इसके अलावा, सरकार 130वां संविधान संशोधन विधेयक भी ला सकती है, जो गंभीर आरोपों में जेल जाने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने या निलंबित करने से जुड़ा है। सुप्रिया सुले और असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं ने इस पर अपनी असहमति जताई है और पूरा विपक्ष इसके खिलाफ है। 'एक देश, एक चुनाव' से जुड़ा 129वां विधेयक शायद शीतकालीन सत्र में आए।
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ये भी पढ़ें: Supreme Court: टिकट न मिलने पर भी देना होगा रेल हादसे का मुआवजा, अदालत ने बदला HC का फैसला; दिए ये आदेश
शिक्षा विधेयक पर एनडीए सहयोगियों का विरोध
कांग्रेस नेता ने 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक' का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के जरिए केंद्र सरकार राज्य के विश्वविद्यालयों पर नियंत्रण करना चाहती है। इसका विरोध खुद एनडीए के सहयोगी दल टीडीपी (TDP) और कई अन्य पार्टियों ने किया है। इसके अलावा, आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों ने भी इसके प्रावधानों पर आपत्ति जताई है।
विपक्ष के सामने चुनौतियां और एकजुटता
जयराम रमेश ने स्वीकार किया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (यूबीटी) में फूट के साथ-साथ तमिलनाडु में गठबंधन टूटने से विपक्ष को झटका लगा है। लेकिन चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र पर द्रमुक और आप (AAP) सहित 24 दलों ने हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार लोकसभा में इन विधेयकों को पास कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाएगी।
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जयराम रमेश ने सरकार पर साधा निशाना
जयराम रमेश ने कहा कि सरकार मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक ला सकती है। इनमें 131वां संविधान संशोधन विधेयक (परिसीमन) शामिल है, जो लोकसभा सीटों को बढ़ाने से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक केवल 2029 के चुनावों को ध्यान में रखकर लाया जा रहा है। यह उन दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों के हितों के खिलाफ है जिन्होंने परिवार नियोजन में सफलता हासिल की है। उन्होंने आगे कहा, कुछ विपक्षी पार्टियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए अमित शाह जो समझौते की बातें कर रहे हैं, वे भी बेमतलब हैं क्योंकि संविधान में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जो बने रहेंगे और गृह मंत्री जिन समझौतों की बात कर रहे हैं, उन पर भारी पड़ेंगे।
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इसके अलावा, सरकार 130वां संविधान संशोधन विधेयक भी ला सकती है, जो गंभीर आरोपों में जेल जाने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने या निलंबित करने से जुड़ा है। सुप्रिया सुले और असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं ने इस पर अपनी असहमति जताई है और पूरा विपक्ष इसके खिलाफ है। 'एक देश, एक चुनाव' से जुड़ा 129वां विधेयक शायद शीतकालीन सत्र में आए।
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शिक्षा विधेयक पर एनडीए सहयोगियों का विरोध
कांग्रेस नेता ने 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक' का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के जरिए केंद्र सरकार राज्य के विश्वविद्यालयों पर नियंत्रण करना चाहती है। इसका विरोध खुद एनडीए के सहयोगी दल टीडीपी (TDP) और कई अन्य पार्टियों ने किया है। इसके अलावा, आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों ने भी इसके प्रावधानों पर आपत्ति जताई है।
विपक्ष के सामने चुनौतियां और एकजुटता
जयराम रमेश ने स्वीकार किया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (यूबीटी) में फूट के साथ-साथ तमिलनाडु में गठबंधन टूटने से विपक्ष को झटका लगा है। लेकिन चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र पर द्रमुक और आप (AAP) सहित 24 दलों ने हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार लोकसभा में इन विधेयकों को पास कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाएगी।