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अजहर का नया टेरर मॉड्यूल: जमीन पर कुचला गया फन, तो इंटरनेट पर रेंगने लगा जैश; क्या है भारत के खिलाफ नई साजिश?
Wed, 08 Jul 2026 05:18 PM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, नई दिल्ली।
आईएएनएस, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 08 Jul 2026 05:18 PM IST
सार
ऑपरेशन सिंदूर की भीषण मार से थर्राया जैश-ए-मोहम्मद अब अपनी साख बचाने के लिए छटपटा रहा है। मसूद अजहर की गुमशुदगी और जमीनी नेटवर्क के खात्मे के बाद, यह आतंकी संगठन पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर इंटरनेट को नया हथियार बना रहा है। फर्जी वीडियो और जहरीले प्रोपेगैंडा के दम पर युवाओं को भड़काने की यह नई साजिश सीधे तौर पर सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है।
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आतंकी मसूद अजहर, जैश-ए-मोहम्मद का मुखिया
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
क्या कोई आतंकी संगठन सिर्फ इंटरनेट के दम पर जिंदा रह सकता है? क्या हथियारों के बिना भी खौफ पैदा किया जा सकता है? भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' से पूरी तरह तबाह हो चुका आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद आज इन्हीं सवालों के बीच छटपटा रहा है। खुफिया अधिकारियों के मुताबिक, भारी नुकसान और जमीनी ताकत खोने के बाद अब जैश ने खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए एक बड़ा डिजिटल प्रोपेगैंडा अभियान शुरू किया है।
कैसे फेल हुआ जैश का पुराना नेटवर्क?
खुफिया एजेंसियों की मानें तो ऑपरेशन सिंदूर ने जैश की कमर तोड़ कर रख दी है। बहावलपुर में मौजूद इसका मुख्य मुख्यालय जमींदोज हो चुका है। इसके कई बड़े कमांडर और कैडर मारे जा चुके हैं। जहां एक तरफ लश्कर-ए-तैयबा घुसपैठ और नए कमांड नेटवर्क के जरिए धीरे-धीरे खुद को दोबारा खड़ा कर रहा है, वहीं जैश इस रेस में बहुत पीछे छूट गया है।
इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के एक अधिकारी के मुताबिक, जैश के डिजिटल अभियान के पीछे दो बड़े मकसद हैं। पहला- भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के युवाओं को गुमराह करना। दूसरा- अपने बचे-खुचे कैडरों को बिखरने से रोकना। पिछले कुछ महीनों में सुरक्षा बलों की मुस्तैदी और सीमा पर कड़े पहरे के कारण जम्मू-कश्मीर में उसकी गतिविधियां अब ना के बराबर बची हैं।
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यह भी पढ़ें: आसिम मुनीर की 'गीदड़ भभकी' में साजिश की आहट: पाकिस्तान की नई चाल का संकेत, एलओसी पर सुरक्षा व्यवस्था सख्त
क्या है जैश की नई साजिश?
कहां गायब है मसूद अजहर?
क्या जैश का सरगना मसूद अजहर जिंदा है? वह इस समय कहां छिपा है? ये वो सवाल हैं जो खुद जैश के समर्थक पूछ रहे हैं। पहलगाम हमले का बदला लेने के लिए भारत ने जो ऑपरेशन चलाया था, उसमें अजहर के कई करीबी मारे गए थे। तब से मसूद अजहर गायब है। रिपोर्ट है कि वह बेहद बीमार है और सेना के ठिकानों के पास छिपा हुआ है। हालांकि जैश ने बहावलपुर में 'मरकज सुभान अल्लाह' मुख्यालय को फिर से खड़ा कर लिया है, लेकिन वहां कोई बड़ी हलचल नहीं है। पहले जहां 600 सक्रिय कैडर रहते थे, अब वह संख्या बेहद कम हो चुकी है।
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कैसे फेल हुआ जैश का पुराना नेटवर्क?
खुफिया एजेंसियों की मानें तो ऑपरेशन सिंदूर ने जैश की कमर तोड़ कर रख दी है। बहावलपुर में मौजूद इसका मुख्य मुख्यालय जमींदोज हो चुका है। इसके कई बड़े कमांडर और कैडर मारे जा चुके हैं। जहां एक तरफ लश्कर-ए-तैयबा घुसपैठ और नए कमांड नेटवर्क के जरिए धीरे-धीरे खुद को दोबारा खड़ा कर रहा है, वहीं जैश इस रेस में बहुत पीछे छूट गया है।
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इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के एक अधिकारी के मुताबिक, जैश के डिजिटल अभियान के पीछे दो बड़े मकसद हैं। पहला- भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के युवाओं को गुमराह करना। दूसरा- अपने बचे-खुचे कैडरों को बिखरने से रोकना। पिछले कुछ महीनों में सुरक्षा बलों की मुस्तैदी और सीमा पर कड़े पहरे के कारण जम्मू-कश्मीर में उसकी गतिविधियां अब ना के बराबर बची हैं।
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क्या है जैश की नई साजिश?
- डॉक्टर्ड वीडियो का इस्तेमाल: भारतीय सेना और सरकार को बदनाम करने के लिए जैश फर्जी और एडिटेड वीडियो का सहारा ले रहा है।
- फर्जी मानवाधिकार नैरेटिव: इन वीडियो में दिखाया जा रहा है कि भारतीय सुरक्षा बल जम्मू-कश्मीर के लोगों पर जुल्म कर रहे हैं, जो कि सरासर झूठ है।
- लोकल रिक्रूटमेंट की कोशिश: भारत के भीतर युवाओं को भड़काकर 'होमग्रोन' (स्थानीय) आतंकी मॉड्यूल तैयार करने की साजिश है।
- पाकिस्तानी युवाओं को बरगलाना: पाकिस्तान के स्थानीय युवाओं को भारत के खिलाफ भड़काने के लिए इस प्रोपेगैंडा का इस्तेमाल हो रहा है।
- आईएसआई का सीधा हाथ: यह पूरा डिजिटल अभियान पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के सीधे मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है।
कहां गायब है मसूद अजहर?
क्या जैश का सरगना मसूद अजहर जिंदा है? वह इस समय कहां छिपा है? ये वो सवाल हैं जो खुद जैश के समर्थक पूछ रहे हैं। पहलगाम हमले का बदला लेने के लिए भारत ने जो ऑपरेशन चलाया था, उसमें अजहर के कई करीबी मारे गए थे। तब से मसूद अजहर गायब है। रिपोर्ट है कि वह बेहद बीमार है और सेना के ठिकानों के पास छिपा हुआ है। हालांकि जैश ने बहावलपुर में 'मरकज सुभान अल्लाह' मुख्यालय को फिर से खड़ा कर लिया है, लेकिन वहां कोई बड़ी हलचल नहीं है। पहले जहां 600 सक्रिय कैडर रहते थे, अब वह संख्या बेहद कम हो चुकी है।