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करनाल: जिला जेल के 20 बंदी बनेंगे रेडियो जॉकी, बैच में तीन महिला बंदी भी शामिल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: Rahul Kumar
Updated Tue, 16 Jun 2026 04:28 PM IST
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सार
तिनका तिनका फाउंडेशन ने 2020 में हरियाणा कारागार के साथ मिलकर इस पहल को शुरू किया था। कोविड-19 के दौरान कैदियों को आशा, जानकारी और जुड़ाव प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई है। नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित पुस्तक “रेडियो इन प्रिजन” में इस पहल का उल्लेख किया गया है।
तिनका जेल रेडियो (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
करनाल जिला जेल में 20 बंदियों ने तिनका जेल रेडियो के लिए रेडियो जॉकी बनने का प्रशिक्षण शुरू कर दिया है। इस बैच में तीन महिला बंदी भी शामिल हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत बंदियों को प्रसारण, संचार और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।
तिनका तिनका फाउंडेशन और हरियाणा कारागार विभाग की ओर से शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य बंदियों में आत्मविश्वास बढ़ाना, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना तथा उन्हें नए कौशल से जोड़ना है। प्रशिक्षण का संचालन लेडी श्रीराम कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग की प्रमुख और तिनका तिनका फाउंडेशन की संस्थापक प्रोफेसर (डॉ.) वर्तिका नंदा करेंगी। उन्होंने वर्ष 2020 में हरियाणा में जेल रेडियो की परिकल्पना की थी।
2020 में हुई थी शुरुआत
तिनका तिनका फाउंडेशन ने वर्ष 2020 में हरियाणा कारागार विभाग के साथ मिलकर जेल रेडियो पहल की शुरुआत की थी। हरियाणा देश का पहला राज्य बना था, जहां एक संरचित जेल रेडियो प्रणाली स्थापित की गई। इसकी शुरुआत जिला जेल, पानीपत से हुई थी। इस पहल को हरियाणा कारागार विभाग के सहयोग से आगे बढ़ाया गया। कोविड-19 महामारी के दौरान जेल रेडियो ने बंदियों तक जानकारी पहुंचाने, उनमें आशा बनाए रखने और जुड़ाव की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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कई जेलों तक पहुंचा तिनका जेल रेडियो
वर्तमान में तिनका जेल रेडियो हरियाणा की कई जेलों में संचालित हो रहा है। बंदियों द्वारा संचालित यह रेडियो स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति और पुनर्वास से जुड़े कार्यक्रम प्रसारित करता है। इसे जेल सुधार के एक मॉडल के रूप में देखा जाता है।जेल अधीक्षक लखबीर सिंह बरार ने कहा कि जेल रेडियो ने मानसिक स्वास्थ्य और जेलों के वातावरण को बेहतर बनाने में अपनी उपयोगिता साबित की है। उन्होंने कहा कि बंदी प्रतिदिन प्रसारण का इंतजार करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
तिनका जेल रेडियो पहल को जेल सुधार और सुधारात्मक नवाचार से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भी प्रस्तुत किया जा चुका है। इस मॉडल की विभिन्न विशेषज्ञों ने सराहना की है।
पुस्तक में भी दर्ज है पहल
जेल रेडियो की इस पहल का उल्लेख नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) द्वारा प्रकाशित पुस्तक “रेडियो इन प्रिजन” में भी किया गया है। पुस्तक में उन बंदियों के अनुभवों और कहानियों को शामिल किया गया है, जिन्होंने रेडियो जॉकी के रूप में कार्य किया। करनाल जिला जेल में शुरू हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बंदियों के पुनर्वास और पुनः एकीकरण की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है। इसके माध्यम से बंदियों को अपनी अभिव्यक्ति के लिए मंच मिल रहा है और उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
तिनका तिनका फाउंडेशन और हरियाणा कारागार विभाग की ओर से शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य बंदियों में आत्मविश्वास बढ़ाना, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना तथा उन्हें नए कौशल से जोड़ना है। प्रशिक्षण का संचालन लेडी श्रीराम कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग की प्रमुख और तिनका तिनका फाउंडेशन की संस्थापक प्रोफेसर (डॉ.) वर्तिका नंदा करेंगी। उन्होंने वर्ष 2020 में हरियाणा में जेल रेडियो की परिकल्पना की थी।
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2020 में हुई थी शुरुआत
तिनका तिनका फाउंडेशन ने वर्ष 2020 में हरियाणा कारागार विभाग के साथ मिलकर जेल रेडियो पहल की शुरुआत की थी। हरियाणा देश का पहला राज्य बना था, जहां एक संरचित जेल रेडियो प्रणाली स्थापित की गई। इसकी शुरुआत जिला जेल, पानीपत से हुई थी। इस पहल को हरियाणा कारागार विभाग के सहयोग से आगे बढ़ाया गया। कोविड-19 महामारी के दौरान जेल रेडियो ने बंदियों तक जानकारी पहुंचाने, उनमें आशा बनाए रखने और जुड़ाव की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
कई जेलों तक पहुंचा तिनका जेल रेडियो
वर्तमान में तिनका जेल रेडियो हरियाणा की कई जेलों में संचालित हो रहा है। बंदियों द्वारा संचालित यह रेडियो स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति और पुनर्वास से जुड़े कार्यक्रम प्रसारित करता है। इसे जेल सुधार के एक मॉडल के रूप में देखा जाता है।जेल अधीक्षक लखबीर सिंह बरार ने कहा कि जेल रेडियो ने मानसिक स्वास्थ्य और जेलों के वातावरण को बेहतर बनाने में अपनी उपयोगिता साबित की है। उन्होंने कहा कि बंदी प्रतिदिन प्रसारण का इंतजार करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
तिनका जेल रेडियो पहल को जेल सुधार और सुधारात्मक नवाचार से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भी प्रस्तुत किया जा चुका है। इस मॉडल की विभिन्न विशेषज्ञों ने सराहना की है।
पुस्तक में भी दर्ज है पहल
जेल रेडियो की इस पहल का उल्लेख नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) द्वारा प्रकाशित पुस्तक “रेडियो इन प्रिजन” में भी किया गया है। पुस्तक में उन बंदियों के अनुभवों और कहानियों को शामिल किया गया है, जिन्होंने रेडियो जॉकी के रूप में कार्य किया। करनाल जिला जेल में शुरू हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बंदियों के पुनर्वास और पुनः एकीकरण की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है। इसके माध्यम से बंदियों को अपनी अभिव्यक्ति के लिए मंच मिल रहा है और उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।