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Malayalam Language Bill: केरल गवर्नर ने दिया मलयालम भाषा विधेयक की समीक्षा का भरोसा, जानिए क्या है पूरा विवाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: शिवम गर्ग
Updated Thu, 08 Jan 2026 10:45 AM IST
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सार
कासरगोड में कन्नड़ भाषी अल्पसंख्यकों की चिंता के बाद केरल गवर्नर ने मलयालम भाषा विधेयक 2025 की समीक्षा का आश्वासन दिया।
केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर
- फोटो : X-@KeralaGovernor
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विस्तार
कर्नाटक बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी ने बुधवार को कहा कि केरल गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने मलयालम भाषा विधेयक, 2025 की समीक्षा करने का आश्वासन दिया है। यह कदम उस समय उठाया गया जब कासरगोड जिले में कन्नड़ भाषी अल्पसंख्यकों की चिंताओं को ध्यान में रखा गया। अथॉरिटी के एक प्रतिनिधि मंडल ने गवर्नर से मुलाकात की और एक याचिका प्रस्तुत की, जिसमें विधेयक को रोकने और पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया। इस विधेयक के तहत जिले के सभी सरकारी और निजी कन्नड़ माध्यम स्कूलों में कक्षा 1 से 10 तक मलयालम को पहली भाषा के रूप में अनिवार्य किया गया है।
अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने की सलाह
केबीएडीए ने कहा केरल सरकार द्वारा प्रस्तावित यह विधेयक संविधान के खिलाफ है और कासरगोड जिले में रहने वाले कन्नड़ भाषी अल्पसंख्यकों के हितों के विपरीत है। संगठन ने यह भी उल्लेख किया कि 2017 में राष्ट्रपति द्वारा इसी तरह का विधेयक खारिज किया गया था, और केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने कई बार केरल को अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने की सलाह दी है।
केबीएडीए ने संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि कासरगोड में कन्नड़ माध्यम स्कूलों में कन्नड़ शिक्षक नियुक्त किए जाने चाहिए, पुलिस और रेलवे स्टेशनों पर कन्नड़ साइनबोर्ड लगे होने चाहिए, सरकारी दफ्तरों में कन्नड़ भाषा का उपयोग हो, और भर्ती स्थानीय भाषाई अल्पसंख्यक जनसंख्या के अनुसार हो।
प्रतिनिधि मंडल में KBADA के सचिव प्रकाश वी. मटिहल्ली, सदस्य सुब्बैयाकट्टे, टेक्केकेरे शंकरनारायण भट, जयप्रकाश नारायण टोट्टेड़ो, केरल कासपा के अध्यक्ष, अधिवक्ता मुरलीधर बल्लुकऱ्य, और केरल स्टेट टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुकेश ए. शामिल थे। बयान में कहा गया सम्मानित गवर्नर ने आश्वासन दिया कि विधेयक को रोका जाएगा, पूरी तरह से समीक्षा की जाएगी और कासरगोड में रहने वाले कन्नड़ भाषियों के हितों की सुरक्षा की जाएगी।
मलयालम को पहली भाषा के रूप में अनिवार्य
गौरतलब है कि कासरगोड जिले में मलयालम भाषा विधेयक, 2025 को लेकर विवाद उस समय बढ़ गया जब केरल सरकार ने सभी सरकारी और निजी कन्नड़-माध्यम स्कूलों में कक्षा 1 से 10 तक मलयालम को पहली भाषा के रूप में अनिवार्य कर दिया। कन्नड़ भाषी अल्पसंख्यक समुदाय ने इसे उनके अधिकारों के खिलाफ बताया।
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अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने की सलाह
केबीएडीए ने कहा केरल सरकार द्वारा प्रस्तावित यह विधेयक संविधान के खिलाफ है और कासरगोड जिले में रहने वाले कन्नड़ भाषी अल्पसंख्यकों के हितों के विपरीत है। संगठन ने यह भी उल्लेख किया कि 2017 में राष्ट्रपति द्वारा इसी तरह का विधेयक खारिज किया गया था, और केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने कई बार केरल को अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने की सलाह दी है।
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केबीएडीए ने संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि कासरगोड में कन्नड़ माध्यम स्कूलों में कन्नड़ शिक्षक नियुक्त किए जाने चाहिए, पुलिस और रेलवे स्टेशनों पर कन्नड़ साइनबोर्ड लगे होने चाहिए, सरकारी दफ्तरों में कन्नड़ भाषा का उपयोग हो, और भर्ती स्थानीय भाषाई अल्पसंख्यक जनसंख्या के अनुसार हो।
प्रतिनिधि मंडल में KBADA के सचिव प्रकाश वी. मटिहल्ली, सदस्य सुब्बैयाकट्टे, टेक्केकेरे शंकरनारायण भट, जयप्रकाश नारायण टोट्टेड़ो, केरल कासपा के अध्यक्ष, अधिवक्ता मुरलीधर बल्लुकऱ्य, और केरल स्टेट टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुकेश ए. शामिल थे। बयान में कहा गया सम्मानित गवर्नर ने आश्वासन दिया कि विधेयक को रोका जाएगा, पूरी तरह से समीक्षा की जाएगी और कासरगोड में रहने वाले कन्नड़ भाषियों के हितों की सुरक्षा की जाएगी।
मलयालम को पहली भाषा के रूप में अनिवार्य
गौरतलब है कि कासरगोड जिले में मलयालम भाषा विधेयक, 2025 को लेकर विवाद उस समय बढ़ गया जब केरल सरकार ने सभी सरकारी और निजी कन्नड़-माध्यम स्कूलों में कक्षा 1 से 10 तक मलयालम को पहली भाषा के रूप में अनिवार्य कर दिया। कन्नड़ भाषी अल्पसंख्यक समुदाय ने इसे उनके अधिकारों के खिलाफ बताया।
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