Karnataka CM: खरगे के घर से तय होगी कर्नाटक सरकार की तस्वीर, कैबिनेट गठन से पहले मंत्री पदों के लिए लॉबिंग तेज
मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर कर्नाटक की नई सरकार को लेकर मंथन तेज है। मुख्यमंत्री-नामित डीके शिवकुमार, सिद्धारमैया और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कैबिनेट गठन, मंत्री पदों और उपमुख्यमंत्री के चयन पर चर्चा कर रहे हैं। इस बीच मंत्री बनने की उम्मीद में कई नेता दिल्ली में सक्रिय लॉबिंग कर रहे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।
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विस्तार
कर्नाटक में नई कांग्रेस सरकार के गठन से पहले दिल्ली सत्ता और संगठन से जुड़े अहम फैसलों का केंद्र बन गई है। मुख्यमंत्री-नामित डीके शिवकुमार के 3 जून को शपथ ग्रहण से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर पार्टी के शीर्ष नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें नई कैबिनेट के गठन, मंत्री पदों के बंटवारे, उपमुख्यमंत्री के चयन और संगठनात्मक बदलावों पर विस्तार से चर्चा की गई। माना जा रहा है कि इसी बैठक से कर्नाटक की नई सरकार की अंतिम रूपरेखा तय होगी।
डीके शिवकुमार पहुंचे खरगे के आवास
डीके शिवकुमार आज सीधे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पहुंचे, जहां पहले से ही कार्यवाहक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल, राहुल गांधी, प्रियंक खरगे और राज्य के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। पार्टी हाईकमान नई सरकार में क्षेत्रीय, जातीय और राजनीतिक संतुलन साधने के साथ-साथ भविष्य की रणनीति को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल की संरचना पर विचार कर रहा है।
क्यों है यह बैठक खास?
बैठक ऐसे समय में हो रही है जब राज्य में मंत्री पदों को लेकर दावेदारों की संख्या काफी अधिक है। कई विधायक और वरिष्ठ नेता दिल्ली पहुंचकर अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश में जुटे हुए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, पहले चरण में करीब 15 मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है, जबकि शेष मंत्रियों को बाद में मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान शामिल किया जाएगा। परिषद और राज्यसभा चुनावों के बाद दूसरे चरण के विस्तार की संभावना जताई जा रही है।
बेक्रफास्ट मीटिंग की तस्वीर चर्चा में
दिल्ली में चल रहे राजनीतिक मंथन के बीच कार्यवाहक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की एक अलग तस्वीर भी चर्चा में रही। शपथ ग्रहण से पहले सिद्धारमैया कई कांग्रेस नेताओं के साथ दिल्ली स्थित प्रसिद्ध रेस्तरां सरवणा भवन पहुंचे, जहां उन्होंने नाश्ता किया। इस दौरान उनके साथ सतीश जारकीहोली, एमसी सुधाकर समेत कई विधायक मौजूद रहे। डीके शिवकुमार की अनुपस्थिति में मौजूद विधायकों ने सिद्धारमैया से मुलाकात की और राजनीतिक हालात पर चर्चा की। इस 'ब्रेकफास्ट मीटिंग' को भी राजनीतिक नजरिए से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसी दौरान नेताओं के बीच अनौपचारिक बातचीत और शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला।
मंत्रिमंडल में जगह पाने की उम्मीद किस-किस को?
उधर, मंत्रिमंडल में जगह पाने की उम्मीद रखने वाले नेताओं ने भी अपनी दावेदारी खुलकर सामने रखनी शुरू कर दी है। कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि इस बार उन्हें कैबिनेट में जगह मिलेगी। उन्होंने कहा कि नई सरकार में अनुभवी नेताओं और नए चेहरों का संतुलित मिश्रण देखने को मिलेगा। उनके मुताबिक पार्टी नेतृत्व इस बात पर विचार कर रहा है कि युवाओं को किस तरह अधिक प्रतिनिधित्व दिया जाए।वहीं कांग्रेस विधायक एआर कृष्णमूर्ति ने कहा कि सरकार गठन की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है और अंतिम निर्णय राहुल गांधी तथा पार्टी हाईकमान के साथ चर्चा के बाद लिया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि पहले चरण में सीमित संख्या में मंत्रियों को शामिल किया जाएगा। दूसरी ओर वरिष्ठ नेता केजे जॉर्ज ने भी भरोसा जताया कि मंगलवार की बैठकों में मंत्री पदों को लेकर अंतिम फैसला हो जाएगा। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद को लेकर चल रही चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व जो भी निर्णय करेगा, वह उसे स्वीकार करेंगे।
इस बीच प्रियंक खरगे की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। उन्होंने भी दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की, जिसके बाद राजनीतिक अटकलों का दौर और तेज हो गया। वहीं सिद्धारमैया के पुत्र यतींद्र सिद्धारमैया ने दावा किया कि राहुल गांधी ने पहले ही उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का आश्वासन दिया था। इससे यह संकेत भी मिल रहा है कि नई सरकार में कुछ नए और कुछ प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों के प्रतिनिधियों को जगह मिल सकती है।
क्या सिद्धारमैया के मंत्रियों को दिखाया जाएगा बाहर का रास्ता?
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि सिद्धारमैया सरकार के कुछ मौजूदा मंत्रियों को इस बार बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है ताकि नए नेतृत्व और नए चेहरों को अवसर मिल सके। कांग्रेस हाईकमान इस बार मंत्रिमंडल गठन के जरिए 2028 के विधानसभा चुनावों की नींव मजबूत करने की रणनीति पर भी काम कर रहा है।फिलहाल सभी की निगाहें दिल्ली में चल रही बैठकों पर टिकी हैं। मुख्यमंत्री-नामित डीके शिवकुमार 3 जून को बेंगलुरु के लोक भवन में शाम 4 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उससे पहले कांग्रेस नेतृत्व यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि नई सरकार के गठन के साथ कोई असंतोष सामने न आए और सत्ता परिवर्तन का संदेश एकजुटता के साथ जनता तक पहुंचे। दिल्ली में जारी बैठकों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कर्नाटक की नई सरकार में किन चेहरों को सत्ता का हिस्सा बनने का मौका मिलता है और कौन इंतजार की सूची में रहता है।