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कोलकाता अग्निकांड: मोबाइल की फ्लैश लाइट की रोशनी ने बचा ली जिंदगी, आधे घंटे तक मौत के साये में खड़ा रहा दंपति
Wed, 19 Aug 2026 08:29 PM IST
एन अर्जुन
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
Published by: एन अर्जुन
Updated Wed, 19 Aug 2026 08:29 PM IST
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कोलकाता हादसा।
- फोटो : अमर उजाला/ एजेंसी
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कोलकाता के मिर्जा गालिब स्ट्रीट स्थित में मंगलवार देर रात लगी आग के बीच जब हर तरफ धुआं और अंधेरा था, तब मोबाइल फोन की एक छोटी-सी रोशनी दो जिंदगियों के लिए उम्मीद बन गई। बांग्लादेश से आए सोमाइया आख्तर और उनके पति रेजाउल इस्लाम आग से बचने के लिए कमरे की खिड़की से निकलकर कार्निस पर पहुंच गए थे। नीचे से उन्हें देख पाना मुश्किल था। करीब आधे घंटे तक वे वहीं फंसे रहे। आखिरकार मोबाइल की फ्लैशलाइट देखकर दमकलकर्मियों का ध्यान उनकी ओर गया और दोनों को सीढ़ी की मदद से सुरक्षित नीचे उतार लिया गया।
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बुधवार को घटनास्थल के आसपास पूरे दिन इस घटना की चर्चा रही। जानकारी के मुताबिक सोमाइया और रेजाउल करीब एक सप्ताह पहले बांग्लादेश से कोलकाता आए थे। हादसे से दो दिन पहले उन्होंने न्यू मार्केट इलाके की मिर्जा गालिब स्ट्रीट स्थित गेस्ट हाउस में कमरा लिया था। मंगलवार रात करीब 1:50 बजे अचानक कमरे के दरवाजे पर जोर-जोर से दस्तक हुई। दरवाजा खोलते ही सामने घना धुआं था। बाहर निकलने का रास्ता लगभग बंद हो चुका था।
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दरवाजे के बजाय खिड़की से निकलने का फैसला
रेजाउल ने सीढ़ियों से नीचे जाने का जोखिम नहीं लिया। वह पत्नी को लेकर खिड़की तक पहुंचे और दोनों वहां से निकलकर कार्निस पर उतर गए। वहां से सोमाइया लगातार मदद के लिए पुकारती रहीं। लेकिन नीचे से कार्निस आसानी से दिखाई नहीं दे रही थी। तब दोनों ने मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाई और नीचे मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश की।
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करीब आधे घंटे तक कार्निस पर खड़े रहने के बाद दमकलकर्मियों की नजर मोबाइल की रोशनी पर पड़ी। इसके बाद दमकल की सीढ़ी वहां पहुंचाई गई और दोनों को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया। बचने के बाद भी उनके चेहरे पर उस रात का डर साफ दिखाई दे रहा था। इस हादसे में नौ लोगों की मौत हुई है। इनमें एक बच्चा और दो महिलाएं भी शामिल हैं। घटना के समय होटल में बांग्लादेश से इलाज और अन्य कामों के लिए आए कई लोग ठहरे हुए थे। सोमाइया और रेजाउल का बच जाना उस भयावह रात की उन कुछ कहानियों में से एक है, जिसमें अंधेरे में मोबाइल की छोटी-सी रोशनी ने जिंदगी की राह दिखा दी।
इलाज के लिए आए थे, परिवार समेत आग में बुझ गई जिंदगी
आग ने एक परिवार की पूरी दुनिया उजाड़ दी। बांग्लादेश के कुश्तिया जिले के पत्रकार देवाशीष दत्त, उनकी पत्नी अफसाना शारमीन, तीन वर्षीय बेटे स्वर्णशीष दत्त और ससुर मोहम्मद अकरम की आग में दम घुटने से मौत हो गई। मृतकों में पांचवें बांग्लादेशी नागरिक की पहचान ढाका के सावर निवासी अकरम बाबू के रूप में हुई है।
देवाशीष बांग्लादेशी समाचार पत्र ‘आजकेर पत्रिका’ के कुश्तिया जिला संवाददाता थे। वह अपने तीन वर्षीय बेटे और ससुर के इलाज के लिए पत्नी व बेटे के साथ तीन अगस्त को भारत आए थे। परिवार ने पहले बेंगलुरु में बेटे और ससुर का इलाज कराया। इसके बाद 18 अगस्त को विमान से कोलकाता पहुंचे थे।
उन्हें कोलकाता से ही बांग्लादेश लौटना था, लेकिन वापसी से पहले ही हादसा हो गया। परिवार के एक रिश्तेदार और मालदा निवासी कृष्ण नंदी को बांग्लादेश उप उच्चायोग की ओर से सूचना दी गई। वह बुधवार को थाने पहुंचे और बाद में कोलकाता पुलिस के शवगृह जाकर परिवार के सदस्यों की पहचान की।
आठ साल की बेटी और बुजुर्ग माता-पिता पीछे छूटे
देवाशीष के सहकर्मी शमीम अदनान के अनुसार, उनकी आठ साल की एक बेटी भी है। देवाशीष के माता-पिता भी जीवित हैं। आग की खबर मिलने के बाद परिवार लगातार उनकी जानकारी लेने की कोशिश कर रहा था। बुधवार दोपहर करीब ढाई बजे कोलकाता से मिली सूचना के बाद परिवार को उनके मारे जाने की पुष्टि हुई।
हादसे में अब तक छह मृतकों की पहचान हो चुकी है। इनमें पांच बांग्लादेशी नागरिक हैं। तीन अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। बांग्लादेश उप उच्चायोग के प्रतिनिधि भी पहचान और अन्य औपचारिकताओं के लिए न्यू मार्केट थाने तथा कोलकाता मेडिकल कॉलेज के शवगृह में मौजूद हैं।