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दीदी से कुणाल घोष का मोह भंग: स्वतंत्रता दिवस पर ऋतब्रत के साथ आए नजर, TMC के भीतर फिर क्यों तेज हुई अटकलें?
Sat, 15 Aug 2026 04:25 PM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, कोलकाता।
आईएएनएस, कोलकाता।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 15 Aug 2026 04:25 PM IST
सार
कुणाल घोष पहले तृणमूल के आधिकारिक कार्यक्रम में पहुंचे और फिर बागी गुट के समारोह में दिखाई दिए। उन्होंने इसे महज संयोग बताया। लेकिन पार्टी में जारी अंदरूनी बगावत के बीच उनकी मौजूदगी ने नए राजनीतिक सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
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ममता बनर्जी और कुणाल घोष
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कोलकाता में स्वतंत्रता दिवस के एक कार्यक्रम ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान को फिर चर्चा में ला दिया। तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष शनिवार को पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहुंच गए। इसके बाद पार्टी के भीतर नई राजनीतिक अटकलें शुरू हो गईं। हालांकि घोष ने साफ किया कि उनका वहां पहुंचना महज संयोग था। उन्होंने कहा कि उनके दौरे का कोई राजनीतिक मकसद नहीं था। इसके बावजूद उनके एक ही दिन पार्टी के दोनों गुटों के कार्यक्रमों में शामिल होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पहले पार्टी मुख्यालय में झंडा फहराया, फिर बागी खेमे में क्यों पहुंचे?
कुणाल घोष पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट से जुड़े हैं। उन्होंने सबसे पहले पार्टी सुप्रीमो के निर्देश पर कोलकाता के टॉपसिया स्थित पार्टी मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इसके बाद वह मेट्रोपॉलिटन बाइपास के पास ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बहुमत गुट के कार्यालय पहुंच गए। वहां पहले ही राष्ट्रीय ध्वज फहराया जा चुका था। घोष ने ध्वज को सलामी दी और स्वतंत्रता सेनानियों को पुष्पांजलि अर्पित की। उनका बिना किसी पूर्व सूचना के वहां पहुंचना कार्यक्रम में मौजूद बागी गुट के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए भी हैरान करने वाला था।
अपनी सफाई में घोष ने क्या कहा?
कुणाल घोष ने अपने बागी खेमे के कार्यक्रम में पहुंचने को लेकर उठ रही अटकलों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि वह मेट्रोपॉलिटन बिल्डिंग से लगी सड़क से गुजर रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि उनकी पार्टी के नाम पर झंडे फहराए जा रहे हैं और वहां कई परिचित लोग मौजूद हैं। घोष के मुताबिक, उन्होंने कार रोकी और कार्यक्रम में शामिल हो गए। उन्होंने कहा कि यह कार्यालय उनके बेलेघाटा विधानसभा क्षेत्र में आने वाला तृणमूल कांग्रेस का कार्यालय है। इसलिए उनके वहां पहुंचने को लेकर किसी तरह की अटकल लगाने की जरूरत नहीं है।
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यह भी पढ़ें: 'सरकारी विद्यालयों की अनदेखी क्यों?': दीपके ने शुरू किया नया अभियान; निजी स्कूलों में फीस तय करने की मांग की
क्या बागी गुट ने भी कुणाल घोष के पहुंचने का स्वागत किया?
बागी गुट की प्रमुख नेता और पश्चिम बंगाल की पूर्व वित्त राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने घोष के कार्यक्रम में शामिल होने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उनका गुट लोकतंत्र में विश्वास करता है। उनके मुताबिक, अगर कोई राहगीर भी कार्यक्रम में शामिल होना चाहे तो उसका स्वागत किया जाएगा। भट्टाचार्य ने कहा कि कुणाल घोष वहां से गुजर रहे थे। वह आए और उन्होंने पुष्पांजलि अर्पित की। इसमें कुछ असामान्य नहीं है।
क्या विधानसभा चुनाव के बाद की बगावत से जुड़ा है पूरा मामला?
तृणमूल कांग्रेस में इस समय अंदरूनी खींचतान जारी है। इस साल अप्रैल-मई में हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद यह बगावत और तेज हुई है। पार्टी के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुट संगठन पर अपना-अपना दावा कर रहे हैं। ऐसे में कुणाल घोष का दोनों खेमों के कार्यक्रमों में दिखाई देना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। घोष इसे भले ही महज संयोग बता रहे हों, लेकिन उनके बागी गुट के कार्यालय पहुंचने से तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही उठापटक पर फिर चर्चा शुरू हो गई है।
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पहले पार्टी मुख्यालय में झंडा फहराया, फिर बागी खेमे में क्यों पहुंचे?
कुणाल घोष पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट से जुड़े हैं। उन्होंने सबसे पहले पार्टी सुप्रीमो के निर्देश पर कोलकाता के टॉपसिया स्थित पार्टी मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इसके बाद वह मेट्रोपॉलिटन बाइपास के पास ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बहुमत गुट के कार्यालय पहुंच गए। वहां पहले ही राष्ट्रीय ध्वज फहराया जा चुका था। घोष ने ध्वज को सलामी दी और स्वतंत्रता सेनानियों को पुष्पांजलि अर्पित की। उनका बिना किसी पूर्व सूचना के वहां पहुंचना कार्यक्रम में मौजूद बागी गुट के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए भी हैरान करने वाला था।
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अपनी सफाई में घोष ने क्या कहा?
कुणाल घोष ने अपने बागी खेमे के कार्यक्रम में पहुंचने को लेकर उठ रही अटकलों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि वह मेट्रोपॉलिटन बिल्डिंग से लगी सड़क से गुजर रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि उनकी पार्टी के नाम पर झंडे फहराए जा रहे हैं और वहां कई परिचित लोग मौजूद हैं। घोष के मुताबिक, उन्होंने कार रोकी और कार्यक्रम में शामिल हो गए। उन्होंने कहा कि यह कार्यालय उनके बेलेघाटा विधानसभा क्षेत्र में आने वाला तृणमूल कांग्रेस का कार्यालय है। इसलिए उनके वहां पहुंचने को लेकर किसी तरह की अटकल लगाने की जरूरत नहीं है।
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क्या बागी गुट ने भी कुणाल घोष के पहुंचने का स्वागत किया?
बागी गुट की प्रमुख नेता और पश्चिम बंगाल की पूर्व वित्त राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने घोष के कार्यक्रम में शामिल होने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उनका गुट लोकतंत्र में विश्वास करता है। उनके मुताबिक, अगर कोई राहगीर भी कार्यक्रम में शामिल होना चाहे तो उसका स्वागत किया जाएगा। भट्टाचार्य ने कहा कि कुणाल घोष वहां से गुजर रहे थे। वह आए और उन्होंने पुष्पांजलि अर्पित की। इसमें कुछ असामान्य नहीं है।
क्या विधानसभा चुनाव के बाद की बगावत से जुड़ा है पूरा मामला?
तृणमूल कांग्रेस में इस समय अंदरूनी खींचतान जारी है। इस साल अप्रैल-मई में हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद यह बगावत और तेज हुई है। पार्टी के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुट संगठन पर अपना-अपना दावा कर रहे हैं। ऐसे में कुणाल घोष का दोनों खेमों के कार्यक्रमों में दिखाई देना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। घोष इसे भले ही महज संयोग बता रहे हों, लेकिन उनके बागी गुट के कार्यालय पहुंचने से तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही उठापटक पर फिर चर्चा शुरू हो गई है।