लेंसकार्ट बिंदी-तिलक विवाद: कंपनी बोली- कर्मियों के धर्म अभिव्यक्त करने पर रोक नहीं, नई स्टाइल गाइड में क्या?
लेंसकार्ट ने बिंदी-तिलक विवाद के बाद नई स्टाइल गाइड जारी कर साफ किया है कि कर्मचारियों को बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब और पगड़ी समेत सभी धार्मिक-सांस्कृतिक प्रतीक पहनने की अनुमति है। कंपनी ने कहा कि यदि पुराने आंतरिक दस्तावेज से किसी की भावनाएं आहत हुईं तो उसे खेद है।
विस्तार
आईवियर रिटेल कंपनी लेंसकार्ट ने बिंदी और तिलक को लेकर उठे विवाद के बाद अपने स्टोर कर्मचारियों के लिए नई और मानकीकृत इन-स्टोर स्टाइल गाइड जारी की है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह कर्मचारियों को धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ काम करने की पूरी अनुमति देती है। नई गाइडलाइन में बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब, पगड़ी समेत कई प्रतीकों को खुलकर स्वीकार किया गया है।
कंपनी ने 18 अप्रैल को जारी बयान में कहा कि हमने आपकी बात सुनी है, साफ तौर पर और खुले दिल से। पिछले कुछ दिनों में हमारे ग्राहकों और समुदाय ने अपनी राय रखी और हमने उसे गंभीरता से सुना है। आज हम अपनी इन-स्टोर स्टाइल गाइड को सार्वजनिक और पारदर्शी तरीके से साझा कर रहे हैं।
ये प्रतीक कंपनी का हिस्सा है
लेंसकार्ट ने कहा कि ये प्रतीक किसी अपवाद के तौर पर नहीं, बल्कि कंपनी की पहचान का हिस्सा हैं। कंपनी के अनुसार, लेंसकार्ट भारत में बना, भारतीयों द्वारा बनाया गया और भारतीयों के लिए है। हमारे 2400 से अधिक स्टोर ऐसे लोगों द्वारा संचालित किए जाते हैं जो हर दिन अपनी आस्था, परंपरा और पहचान के साथ काम पर आते हैं। यह ऐसी चीज नहीं है जिसे हम कभी किसी से दरवाजे पर छोड़ने को कहें।
कंपनी ने गहरा खेद जताया
कंपनी ने यह भी कहा कि अगर किसी पुराने कार्यस्थल संचार या आंतरिक दस्तावेज के कारण कर्मचारियों को यह महसूस हुआ कि उनकी आस्था का यहां स्वागत नहीं है, तो इसके लिए वह गहरा खेद व्यक्त करती है। बयान में कहा गया, अगर हमारे किसी संचार से किसी कर्मचारी की भावनाएं आहत हुईं या उन्हें लगा कि उनकी धार्मिक पहचान यहां स्वीकार नहीं है, तो हमें इसका बेहद अफसोस है। यह लेंसकार्ट की पहचान नहीं है और न ही कभी होगी।
कंपनी ने भरोसा दिलाया कि अब हर नीति, प्रशिक्षण सामग्री और आधिकारिक संचार में इन्हीं मूल्यों को शामिल किया जाएगा। साथ ही इन गाइडलाइंस को निष्पक्ष और लगातार लागू करने तथा समय-समय पर समीक्षा कर सुधार करने की बात भी कही गई है।
पीयूष बंसल ने दी सफाई
इससे पहले 16 अप्रैल को पीयूष बंसल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सफाई देते हुए कहा था कि इंटरनेट पर वायरल हो रहा दस्तावेज एक पुराना आंतरिक ट्रेनिंग डॉक्यूमेंट था, न कि कंपनी की एचआर नीति।
उन्होंने कहा कि उस दस्तावेज में बिंदी और तिलक को लेकर एक गलत लाइन थी, जिसे कभी लिखा ही नहीं जाना चाहिए था। यह हमारी सोच, मूल्यों या वास्तविक कार्यप्रणाली को नहीं दर्शाता।
पीयूष बंसल ने बताया कि 17 फरवरी 2026 को जैसे ही कंपनी को इसकी जानकारी मिली, उसे तुरंत हटा दिया गया था, यानी यह मामला सार्वजनिक विवाद बनने से पहले ही कार्रवाई कर दी गई थी।
उन्होंने कहा कि लेकिन मुझे यह पहले पकड़ लेना चाहिए था। संस्थापक और सीईओ होने के नाते ऐसी चूक की जिम्मेदारी मेरी है। मैंने अपनी टीम को निर्देश दिया है कि भविष्य में इस तरह की सभी सामग्रियों की सख्त समीक्षा की जाए और मैं स्वयं इसकी निगरानी करूंगा।
धार्मिक अभिव्यक्ति पर रोक नहीं
पीयूष बंसल ने साफ शब्दों में कहा कि लेंसकार्ट कभी भी सम्मानजनक धार्मिक अभिव्यक्ति पर रोक नहीं लगाएगा। उन्होंने कहा कि बिंदी, तिलक या आस्था के किसी भी प्रतीक पर कोई प्रतिबंध नहीं है और न कभी होगा। हमारे कर्मचारी हमेशा गर्व के साथ अपने विश्वास को व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र रहे हैं और रहेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को उठाने वाले सभी लोगों का धन्यवाद, क्योंकि लोगों की आवाज कंपनी को बेहतर बनने और अपने मूल्यों पर कायम रहने में मदद करती है।
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