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Karnataka: 'LGBT+ के साथ आम लोगों की तरह प्रेम और स्नेह के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए', हाईकोर्ट की टिप्पणी

Wed, 16 Aug 2023 06:32 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलुरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलुरू Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 16 Aug 2023 06:32 PM IST
सार

Karnatka: कर्नाटक हाईकोर्ट ने एलजीबीटी समुदाय के एक व्यक्ति को आत्महत्या के लिए कथित तौर पर उकसाने के लिए आपराधिक मामला दर्ज करने को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज किया।

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LGBT community members should be treated with love and affection like everyone else: Karnataka HC
कर्नाटक उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एलजीबीटी समुदाय के एक व्यक्ति को आत्महत्या के लिए कथित तौर पर उकसाने के लिए आपराधिक मामला दर्ज करने को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज किया। अदालत ने कहा कि एलजीबीटी (लेस्बियन, गे, बाईसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर और अन्य) सहित सभी के साथ प्यार और देखभाल के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए ताकि कोई अपनी जिंदगी न खो सके। 

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न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने अपने फैसले में कहा, 'इस मामले में मृतक एलजीबीटी समुदाय से संबंधित है। उनके बहिष्कृत होने की संवेदनशीलता उनके मानस में व्याप्त है। इसलिए, ऐसे लोगों के साथ पूरे प्यार और स्नेह के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए। हर नागरिक ऐसे नागरिकों के साथ सभी प्यार और देखभाल के साथ व्यवहार करेगा, जैसा कि एक सामान्य इंसान के साथ किया जाता है, तो कीमती जीवन नहीं खोएगा।'
 

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व्हाइटफील्ड पुलिस द्वारा आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किए जाने के बाद मृतक के तीन सहकर्मियों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उत्तर प्रदेश के रहने वाले मृतक के पिता ने शिकायत की थी कि तीनों ने उनके बेटे को उसके यौन रूझान के लिए लगातार परेशान किया, जिससे उसने आत्महत्या कर ली। आरोपियों में एक बेंगलुरु का है, जबकि दूसरा और तीसरा आरोपी उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। ये सभी बेंगलुरु की एक कंपनी में सहकर्मी थे।
 

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मृतक 2014 से 2016 तक कंपनी में काम कर चुका था। वह 2022 में विजुअल मर्चेंडाइजिंग के प्रबंधक के रूप में उसी कंपनी में फिर से वापस आया था। आरोप है कि उनके सहयोगी 'बेतुके चुटकुले सुनाकर उन्हें नीचा दिखा रहे थे। बताया जा रहा है कि टीम के सभी सदस्यों ने मृतक को उसके यौन रूझान पर चिढ़ाया था। इसके बाद उन्होंने 28 फरवरी को इस्तीफा दे दिया था लेकिन बाद में उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया था। कथित तौर पर उन्हें एक ऐसा पद दिया गया था जिसके साथ वह सहज नहीं थे।'
 

इसके बाद उन्होंने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न अधिनियम के तहत गठित आंतरिक शिकायत समिति से शिकायत की। उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत भी शिकायत दर्ज की। उन्होंने तीन सहकर्मियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सहायक पुलिस आयुक्त से भी संपर्क किया। पीड़ित ने 3 जून, 2023 को आत्महत्या कर ली थी। उसके पिता ने अगले दिन शिकायत दर्ज कराई जिसके बाद आरोपी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।

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