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'संविधान की रक्षा करें': बागी सांसदों पर उद्धव गुट ने ओम बिरला से की बड़ी मांग, कांग्रेस ने भी साधा निशाना

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 24 Jun 2026 07:00 PM IST
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सार

Maharashtra Politics: शिवसेना (उद्धव गुट) के छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में टकराव बढ़ गया है। अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर मामले में उनकी बात सुने बिना कोई फैसला नहीं लेने की मांग की। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है। वहीं, सुषमा अंधारे ने बागी सांसद संजय दीना पाटिल पर वाई प्लस सुरक्षा मिलने के बाद अहंकारी होने का आरोप लगाया। आइए, विस्तार से मामले को जानते हैं...

Lok Sabha Speaker Om Birla Shiv Sena (UBT)  MP Arvind Sawant meet says Protect Constitution over rebel MPs
ओम बिरला से मिल शिवसेना यूबीटी के सांसद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में घमासान और तेज हो गया है। एक ओर उद्धव गुट ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर बागी सांसदों के मामले में अपनी बात सुने बिना कोई फैसला नहीं लेने की मांग की है, तो दूसरी ओर कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है। इस बीच बागी सांसद संजय दीना पाटिल और उद्धव गुट के नेताओं के बीच बयानबाजी भी लगातार तीखी होती जा रही है।


उद्धव गुट के लोकसभा सांसद अरविंद सावंत ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात के बाद कहा कि उनकी पार्टी के छह सांसद पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि वह और अनिल देसाई पहले भी इस मामले को लेकर लोकसभा अध्यक्ष से मिल चुके हैं। सावंत ने कहा कि उन्होंने अध्यक्ष से आग्रह किया है कि यदि इस मामले में कोई पत्र या दावा आता है तो फैसला लेने से पहले उनकी बात जरूर सुनी जाए।
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क्या लोकसभा अध्यक्ष से क्या मांग की गई?

अरविंद सावंत ने कहा कि हमने लोकसभा अध्यक्ष से कहा है कि संविधान की रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है। यदि कोई सांसद व्यक्तिगत या समूह के रूप में पार्टी छोड़ने की बात करता है तो कोई भी निर्णय लेने से पहले हमें सुनना चाहिए। सावंत ने बताया कि ओम बिरला ने उन्हें बताया कि अभी तक इस संबंध में उन्हें कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।
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क्या कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया?

कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति है और सांसदों की खरीद-फरोख्त की जा रही है। शमा मोहम्मद ने कहा कि यदि शिवसेना (उद्धव गुट) के छह सांसद दूसरी पार्टी में जाना चाहते हैं तो उन्हें पहले इस्तीफा देना चाहिए और फिर नए चुनाव लड़ने चाहिए। उन्होंने कहा कि एक चुनाव चिन्ह पर जीतकर दूसरे दल में शामिल होना जनता के जनादेश का अपमान है।

संजय दीना पाटिल और उद्धव गुट के बीच क्यों बढ़ा विवाद?

शिवसेना (उद्धव गुट) की नेता सुषमा अंधारे ने बागी सांसद संजय दीना पाटिल पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वाई प्लस सुरक्षा मिलने के बाद उनमें अहंकार आ गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी को पाटिल की क्षमताओं के बारे में पूरी जानकारी है। यह बयान उस समय आया है जब संजय राउत और संजय दीना पाटिल के बीच तीखी बयानबाजी जारी है। शिंदे गुट में शामिल होने के बाद पाटिल ने दावा किया था कि उनके पिता पर हमले के बाद उन्होंने पांच लोगों को मार गिराया था, हालांकि उन्होंने इस घटना का कोई विवरण नहीं दिया।

क्या छह सांसदों को सुरक्षा मिलने से विवाद और बढ़ा?

उद्धव गुट का आरोप है कि शिंदे गुट में शामिल होने से पहले ही छह बागी सांसदों को वाई प्लस सुरक्षा मुहैया कराई गई थी। पार्टी नेताओं का कहना है कि इससे राजनीतिक संरक्षण मिलने के आरोपों को बल मिला है। वहीं, शिंदे गुट लगातार दावा कर रहा है कि सांसद विकास कार्यों और नेतृत्व शैली से असंतुष्ट होकर उनके साथ आए हैं। इन घटनाओं के बाद दोनों गुटों के बीच बालासाहेब ठाकरे की विरासत को लेकर संघर्ष और तेज हो गया है।
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