ओडिसा में बुधवार को भगवान श्री जगन्नाथ की बाहुड़ा (वापसी) यात्रा संपन्न हुई। रथ यात्रा के नौंवें दिन भगवान जगन्नाथ बड़े भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा के साथ पुरी के मंदिर लौट आए। इस दौरान पूरे शहर में कोरोना महामारी की वजह से कर्फ्यू लगा रहा और प्रशासन की मौजूदगी में श्रद्धालुओं की गैरमौजूदगी में यात्रा संपन्न हुई।
कोरोना और कर्फ्यू के बीच संपन्न हुई भगवान जगन्नाथ की बाहुड़ा यात्रा, देखें तस्वीरें
विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा सुप्रीम कोर्ट के आखिरी वक्त में दिए गए फैसले के बाद 23 जून को कई सारी पाबंदियों के साथ आयोजित की गई, पुरी में होने वाली इस यात्रा के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सीमित संख्या में सेवकों के भाग लेने और सामाजिक दूरी का पालन करने जैसे शर्तों के रखी।
तीनों देवता नौ दिन के बाद अपने जन्म स्थान श्री गुंडिचा मंदिर से बहूड़ा जात्रा करते हुए तीन राजसी लकड़ी के रथों पर सवार होकर श्री जगन्नाथ मंदिर वापस लौटे। हर साल इस ऐतिहासिक उत्सव के दौरान श्री गुंडिचा मंदिर और मुख्य मंदिर के बीच की देश-विदेश के लाखों भक्तों से भरी रहने वाली भव्य सड़क, इस साल कोरोना के खतरे और सरकारी पाबंदियों की वजह से लगभग खाली ही रही।
पुरी के जिला कलेक्टर बलवंत सिंह ने कहा कि रथ यात्रा के संचालन के दौरान सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। सिंह ने कहा, 'ग्रैंड रोड पर भक्तों को प्रवेश की अनुमति नहीं थी। पुरी शहर के सभी प्रवेश बिंदुओं को सील कर दिया गया और भक्तों से अनुरोध किया गया कि वे घर पर रहें और टेलीविजन पर ही बहुड़ा जात्रा देखें।'
उन्होंने कहा कि सेवकों, पुलिस कर्मियों और मंदिर के अधिकारियों सहित 5,500 से अधिक लोगों का कोविड-19 का परीक्षण किया गया और केवल उन्हें ही अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने और बाहुड़ा यात्रा के दौरान रथ खींचने में भाग लेने की अनुमति दी गई जिनका कोरोना टेस्ट नेगेटिव आया।
लोगों की भीड़ को रोकने और सुरक्षा इंतजामों के लिए 70 से अधिक प्लाटून (प्रत्येक में लगभग 33 कर्मी शामिल हैं) तैनात किए गए और कई स्थानों पर बैरिकेड भी लगाए गए। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि पुलिस कर्मियों ने कड़ी चौकसी बनाए रखी, उनकी सहायता के लिए 'बड़ा डंडा' पर बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए।