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Tirupparankundram Deepam: हाई कोर्ट का सरकार को सुझाव, 5 लोगों को 15 मिनट की सांकेतिक पूजा करने दें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मदुरै Published by: नवीन पारमुवाल Updated Tue, 03 Mar 2026 12:48 PM IST
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सार

मद्रास हाई कोर्ट ने तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित दीपथून के पास 15 मिनट की सांकेतिक पूजा करने का सुझाव दिया है। अदालत ने कहा कि प्रशासन उन पांच लोगों को अनुमति दे जिनके नाम अदालत तय करेगी। यह मामला कार्तिगई दीपम जलाने के आदेश के उल्लंघन से जुड़ा है।

madras high court suggests allowing five persons for symbolic prayers at tirupparankundram hill
मद्रास हाई कोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार

Tirupparankundram Deepam Row: तमिलनाडु के तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर कार्तिगई दीपम जलाने को लेकर विवाद जारी है। इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने अवमानना याचिका पर सुनवाई की। हाई कोर्ट ने कहा कि पांच लोगों को पहाड़ी पर खंभे के पास 15 मिनट की सांकेतिक पूजा करने की अनुमति दी जा सकती है। इन पांच लोगों के नाम अदालत द्वारा तय किए जाएंगे। 
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हाई कोर्ट में एक अवमानना याचिका पर सुनवाई चल रही थी। यह याचिका दीपथून पर कार्तिगई दीपम जलाने के पुराने निर्देश का पालन नहीं करने पर दायर की गई थी। जस्टिस जी आर स्वामीनाथन की बेंच ने कहा कि अगर सरकार पुराने आदेशों का सम्मान करना चाहती है तो बिना दीप जलाए केवल सांकेतिक पूजा की अनुमति दी जा सकती है। कोर्ट ने साफ किया कि यह सिर्फ एक सुझाव है, कोई निर्देश नहीं। इस दौरान दीपक जलाने की बात नहीं कही गई है, सिर्फ सांकेतिक प्रार्थना की अनुमति देने का सुझाव है।
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मंत्री की टिप्पणी पर कोर्ट नाराज
जस्टिस जीआर स्वामीनाथन की पीठ ने राज्य के खनिज और खदान मंत्री एस रघुपति के बयान पर भी टिप्पणी की। मंत्री ने कहा था कि सरकार दीपथून पर कार्तिगई दीपम जलाने की अनुमति नहीं देगी। अदालत ने कहा कि मंत्री ने इस मुद्दे को शरारती राजनीतिक रंग देने की कोशिश की है। अदालत ने मंत्री को याद दिलाया कि मामला अभी विचाराधीन है।

इससे पहले मदुरै के कलेक्टर केजे प्रवीण कुमार ने एक हलफनामा दायर किया था। इसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने 1 दिसंबर, 2025 को निषेधाज्ञा लागू की थी। उनका कहना था कि यह आदेश कानून-व्यवस्था की स्थिति को रोकने के लिए था, न कि मंदिर अधिकारियों को हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने से रोकने के लिए।

पुलिस ने कलेक्टर के आदेश का दिया हवाला
कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने कलेक्टर के निषेधाज्ञा आदेश की आड़ ली। पुलिस ने साफ कहा कि वे केवल कलेक्टर के आदेश को लागू कर रहे थे। जस्टिस स्वामीनाथन ने कहा कि वे चाहते हैं कि कोर्ट के आदेश का सम्मान हो। इसलिए पांच लोगों के एक समूह को पहाड़ी पर जाने की अनुमति दी जा सकती है।

अदालत ने मंत्री रघुपति के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग वाली एक उप-याचिका को बंद कर दिया। हालांकि, जज ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह इस याचिका को दोबारा खोल सकते हैं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 4 मार्च को तय की है।

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