महाराष्ट्र: 35 साल के हवसी ने 5वीं कक्षा की छात्रा का उत्पीड़न किया; POCSO कोर्ट से 10 साल जेल, मिलेगा मुआवजा
महाराष्ट्र के ठाणे जिले एक व्यक्ति को नाबालिग छात्रा के साथ बार-बार यौन उत्पीड़न के मामले में पॉक्सो कानून के तहत 10 वर्ष का सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने 12,000 रुपये जुर्माने की भी लगाई।
विस्तार
महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने एक नाबालिग लड़की के साथ बार-बार यौन उत्पीड़न करने के आरोप में 35 वर्षीय व्यक्ति को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कल्याण अदालत के विशेष न्यायाधीश वीए पत्रावले ने धोंडीराम तुकाराम बंसोडे (पॉक्सो) के तहत सजा सुनाते हुए कहा कि यौन अपराध के मामलों में पीड़ित की गवाही का काफी महत्व होता है। सहायक साक्ष्यों के अभाव में भी यह विश्वास जगाती है।
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पड़ोस में रहता था आरोपी
31 जनवरी के आदेश की एक प्रति बुधवार को उपलब्ध कराई गई। विशेष लोक अभियोजक भामरे पाटिल और आरआर भोइर ने आरोपी के खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए 12 गवाहों से पूछताछ की। अभियोजन पक्ष के अनुसार, बंसोडे ने अपने पड़ोस में रहने वाली पांचवीं कक्षा की एक छात्रा का बार-बार यौन उत्पीड़न किया, जब तक कि 2016 में उसके परिवार वालों को इस अपराध के बारे में पता नहीं चला।
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लड़की के परिजनों को शुरू में सामाजिक भेदभाव का डर था
हालांकि बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि यह मामला परिवारों के बीच विवाद का परिणाम था। पुलिस शिकायत दर्ज करने में तीन दिन की देरी की ओर इशारा किया, अदालत ने अभियोजन पक्ष के इस स्पष्टीकरण को स्वीकार कर लिया कि लड़की के परिजनों को शुरू में सामाजिक भेदभाव का डर था। अदालत ने अपने आदेश में कहा, "ऐसे मामलों में पीड़िता की गवाही बेहद महत्वपूर्ण होती है। जब तक ऐसे कोई ठोस कारण न हों जिनसे उसके बयान की पुष्टि करना आवश्यक हो। अदालतों को यौन उत्पीड़न की पीड़िता की गवाही के आधार पर ही आरोपी को दोषी ठहराने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। बशर्ते उसकी गवाही भरोसेमंद हो और विश्वास जगाती हो।
अदालत ने कहा कि पीड़िता ने कुछ समय लेने के बाद हमले की घटना को स्पष्ट रूप से बयान किया। दोषी को 10 साल की कैद की सजा सुनाने के अलावा, अदालत ने उस पर 12,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। न्यायाधीश ने कहा कि पीड़ित ऐसे मामलों में सरकार की मुआवजा योजना के तहत मुआवजे का हकदार है।
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