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President Election: एमवीए गठबंधन में दरार! राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करेगी शिवसेना, एकनाथ शिंदे के बाद उद्धव ठाकरे का एलान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 12 Jul 2022 10:27 PM IST
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सार

खबरों के अनुसार सोमवार को उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई बैठक में शिवसेना के 19 में से 11 सांसद ही पहुंचे। इनमें से अधिकतर ने अपील की थी कि पार्टी राष्ट्रपति के लिए द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करे। माना जा रहा है कि सांसदों को अपने पाले में रखने के लिए ही उद्धव को यह फैसला करना पड़ा है।

Maharashtra CM Eknath Shinde announces Shivsena support to NDA Presidential Candidate Droupadi Murmu against Oppositions Yashwant Sinha
उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे - फोटो : Twitter@ CMO Maharashtra
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विस्तार

महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री और अपने समर्थन वाले विधायकों-सांसदों के गुट को असली शिवसेना बताने वाले नेता एकनाथ शिंदे ने राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अहम बयान दिया है। शिंदे ने कहा है कि वे राष्ट्रपति चुनाव के लिए द्रौपदी मुर्मू का पूरा समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा, "हमारे सभी विधायक पीएम नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मुर्मू को वोट देंगे।" एकनाथ के एलान के ठीक बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी मुर्मू को समर्थन देने का एलान किया। 
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ठाकरे ने कहा कि शिवसेना यह स्वीकार करते हुए बिना किसी दबाव के मुर्मू को समर्थन देने की घोषणा कर रही है कि यह पहला मौका है जब किसी आदिवासी महिला को राष्ट्रपति बनने का मौका मिल रहा है। उन्होंने मुंबई में एक दिन पहले अपने आवास पर आयोजित शिवसेना सांसदों की बैठक का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘शिवसेना सांसदों की बैठक में किसी ने मुझ पर दबाव नहीं डाला।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपना रुख स्पष्ट कर रहा हूं। मेरी पार्टी के आदिवासी नेताओं ने मुझसे कहा कि यह पहली बार है कि किसी आदिवासी महिला को राष्ट्रपति बनने का मौका मिल रहा है। उनके विचारों का सम्मान करते हुए हमने द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करने का निर्णय किया है।’’ ठाकरे ने कहा, ‘‘दरअसल, वर्तमान राजनीतिक माहौल को देखते हुए, मुझे उनका समर्थन नहीं करना चाहिए था। लेकिन हम संकीर्ण मानसिकता वाले नहीं हैं।’’
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उद्धव के इस एलान के बाद यह अटकलें लगना शुरू हो गई हैं कि महाविकास अघाड़ी गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और सत्ता जाने के बाद शिवसेना अपने सांसदों और विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में है। दरअसल, एकनाथ शिंदे की ओर से विधायकों को तोड़े जाने के बाद यह साफ है कि शिवसेना में ही नेतृत्व को लेकर फूट पड़ गई है। ऐसे में उद्धव का द्रौपदी मुर्मू को समर्थन के एलान का फैसला शिवसेना को बचाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि 18 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में राजग ने मुर्मू को तो साझा विपक्ष ने पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा को मैदान में उतारा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उद्धव गुट पहले ही अपने विधायकों व सांसदों की बगावत का सामना कर रहा था, इसलिए वह तय नहीं कर पाया था कि उसे मुर्मू या सिन्हा में से किसका समर्थन करना है? पार्टी के कुछ सांसद भी बगावती तेवर दिखा रहे हैं। वे द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में हैं। 

क्या सोमवार की बैठक से मजबूर हुई शिवसेना?
खबरों के अनुसार सोमवार को उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई बैठक में शिवसेना के 19 में से 11 सांसद ही पहुंचे। बैठक में मौजूद शिवसेना सांसद संजय राउत ने साफ तौर पर यशवंत सिन्हा को समर्थन देने की बात कही। वे चाहते हैं कि शिवसेना विपक्ष के साझा उम्मीदवार का समर्थन करे। इस पर कुछ सांसदों ने असहमति जताई। उनका कहना था कि हमें मुर्मू का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे से भी अपील की कि वे द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करें। माना जा रहा है कि इसी के बाद उद्धव ने द्रौपदी मुर्मू के समर्थन का एलान किया।

शिवसेना प्रवक्ता शीतल म्हात्रे शिंदे गुट का हिस्सा बनीं
उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना को एक और झटका देते हुए, पार्टी प्रवक्ता और मुंबई की पूर्व पार्षद शीतल म्हात्रे मंगलवार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल हो गईं। शीतल म्हात्रे मुंबई से शिवसेना की पहली पूर्व पार्षद हैं जिन्होंने खुलेआम शिंदे को समर्थन देने की घोषणा की है। उन्होंने 2012 और 2017 में उत्तरी मुंबई के उपनगरीय दहिसर में वार्ड नंबर 7 का प्रतिनिधित्व किया था। शिवसेना के कुछ कार्यकर्ताओं के साथ म्हात्रे मंगलवार रात, शिंदे के आवास पर गईं और उन्हें अपना समर्थन देने की घोषणा की। ठाकरे नीत शिवसेना ने म्हात्रे को अलीबाग-पेन इलाके के लिए संपर्क संघटक (समन्वयक) नियुक्त किया था। शिवसेना के नियंत्रण वाले बृहन्मुंबई नगर निगम का चुनाव अगले कुछ महीनों में होने वाला है। गौरतलब है कि पिछले महीने शिंदे के विद्रोह के कारण उद्धव ठाकरे नीत महा विकास आघाडी सरकार गिर गई थी।
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