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Maharashtra: मंत्रिमंडल विस्तार में कैसी अड़चन, शिंदे के सामने क्या हैं मुश्किलें?

Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Tue, 12 Jul 2022 07:54 PM IST
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सार

महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा की नई सरकार के गठन के बाद डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने जल्द से जल्द मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना व्यक्त की थी। भाजपा के कई नेता और शिवसेना के बागी तथा कई निर्दलीय नेता यथाशीघ्र मंत्रिमंडल विस्तार की बाट जोट रहे हैं...

Maharashtra: Many BJP leaders and Shiv Sena rebels and independent leaders waiting for Eknath Shinde's cabinet expansion as soon as possible
उद्धव ठाकरे, एकनाश शिंदे और देवेंद्र फडणवीस - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
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विस्तार

बाला साहब ठाकरे का उत्तराधिकार संभालने के बाद अब तक का सबसे बुरा दौर देख रहे महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का डर खत्म हो गया है। अब वह पार्टी और शिवसेना की ताकत को सहेजने में लग गए हैं। लेकिन इसके साथ-साथ मुख्यमंत्री बनने के बाद एकनाथ शिंदे का डर शुरू हो गया है। महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में लोगों की निगाह इन्हीं दोनों चर्चाओं पर टिकी हुई हैं। राजनीति के कुछ पंडि़तों का मानना है कि उद्धव ठाकरे के साथ जितना बुरा होना था, हो चुका है। अब तो बड़ा बोझ उठाने की बारी एकनाथ की है। पहला पड़ाव तो मंत्रिमंडल विस्तार का ही है।

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मंत्रिमंडल के विस्तार में प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का मान रखना है। खास तौर से अमित शाह का। अमित शाह के बारे में कहा जाता है कि वे सियासी सौदेबाजी में माहिर हैं। शाह ने दिल्ली में एकनाथ शिंद और देवेंद्र फड़णवीस का शानदार स्वागत किया। खुश होकर गले मिले और विदा करने से पहले एकनाथ शिंदे को समझा दिया कि अब उन्हें साबित करना है। अंदरखाने से मिली जानकारी के मुताबिक मुंबई पहुंचने के पहले शिंदे खुद को साबित करने के लक्ष्य को दिमाग में बिठाकर गए हैं। बताते हैं शाह के मंत्र ने डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी है।

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मंत्रिमंडल विस्तार बन रहा है एकनाथ शिंद के गले की फांस

महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा की नई सरकार के गठन के बाद डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने जल्द से जल्द मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना व्यक्त की थी। भाजपा के कई नेता और शिवसेना के बागी तथा कई निर्दलीय नेता यथाशीघ्र मंत्रिमंडल विस्तार की बाट जोट रहे हैं। लेकिन एकनाथ शिंदे जल्दबाजी में कोई खतरा नहीं मोल लेना चाहते। जबकि शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे और राज्यसभा सांसद संजय राउत को इसी समय का बेसब्री से इंतजार है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा चार विधायकों पर एक मंत्री का अनुपात चाहती है। शिवसेना के करीब 40 बागी विधायकों और 10 से अधिक निर्दलीयों को भी अपना भाग्य चमकने की उम्मीद दिखाई दे रही है। अधिकतम 42-46 विधायकों को ही मंत्री बनाए जाने की उम्मीद है। इसमें शिवसेना के आठ विधायक उद्धव सरकार में मंत्री थे। वह किसी भी हाल में अपना रुतबा नहीं गंवाना चाहेंगे। 100 से अधिक विधायकों वाली भाजपा ने डिप्टी सीएम से संतोष किया है। लेकिन पोर्टफोलियों में तो उसे इज्जतदार भागीदारी चाहिए। ऐसे में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सामने बड़ी चुनौती इस स्थिति से पार पाने की ही है।


इसलिए शिंदे कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहते। वह इससे पहले बीएमसी चुनाव या वहां से उद्धव ठाकरे की टीम को कमजोर कर देना चाहते हैं। हालांकि भाजपा के सूत्र कह रहे हैं कि दो-चार दिन में मंत्रिमंडल विस्तार हो जाएगा। शिवसेना के एक बागी विधायक को भी राष्ट्रपति चुनाव से पहले विस्तार हो जाने की उम्मीद है। कारण कुछ भी हो लेकिन एक बात तय है कि शिंदे को फिलहाल सिर मुड़ाते ही ओले पड़ना मंजूर नहीं है।

महाराष्ट्र में कमजोर हो रही है उद्धव सेना

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुई बगावत ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को काफी बड़ा झटका दिया है। शिंदे अपने राजनीतिक गुरु आनंद दिघे को आगे करके अपना क्रेज बना रहे हैं। इसके साथ-साथ शिंदे, उनके बेटे और लोकसभा सांसद भवना गवली समेत अन्य की कोशिश बृहन्मुंबई महानगर पालिका में शिवसेना की जड़ें खोदने में लगे हैं। ठाणे में शिंदे को कोई चिंता नहीं है। वहां के 66 पार्षदों ने शिंदे के साथ खड़ा होने का मन बनाया है। ठाणे में शिंदे का सिक्का चलता है, लेकिन अन्य नगरपालिकाओं में वह डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस के साथ शिवसेना को कमजोर करने में लगे हैं। पिछले दो दशक से अधिक समय तक बृहन्मुंबई महानगर पालिका पर शिवसेना का ही कब्जा है। इस बार भाजपा वहां अपने लिए अवसर देख रही है। इस अवसर का भार भी एकनाथ शिंदे के कंधे पर ही है।

संजय राउत के ट्वीट के मायने निकाल रहे हैं लोग

शिवसेना के नेता संजय राउत ने एक बड़ा अस्पष्ट सा ट्वीट किया है। उन्होंने ट्वीट में लिखा है कि अब नहीं कोई बात खतरे की .......अब सभी को सभी से खतरा है। राउत ने इस ट्वीट में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस, पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को टैग किया है। इस ट्वीट का लोग अपने हिसाब से मायने निकाल रहे हैं। इसके साथ-साथ संजय राउत ने राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करने का संकेत दिया है। उद्धव ठाकरे ने इसके बाबत पार्टी नेताओं की बैठक बुलाई थी और इस बैठक में उद्धव समर्थक कई नेता द्रौपदी मुर्मू का संमर्थन कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि राउत अब उसी खतरे की तरफ इशारा कर रहे हैं, जो एकनाथ शिंदे के भी दिमाग में कहीं न कहीं चल रहा है।  

डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस की मुस्कराहट का राज

बीडी चतुर्वेदी पालघर में रहते हैं। मुंबई के दादर में कारोबार करते हैं। राजनीति में बड़ी दिलचस्पी रहती है। वह बताते हैं कि एकनाथ-फडणवीस सरकार गठन के बाद डिप्टी सीएम के स्वागत, अभिनंदन में तमाम पोस्टर लगे हैं। इस पोस्टर में केंद्रीय गृहमंत्री नहीं दिखाई दे रहे हैं। इसे लेकर भी राजनीतिक किस्सा कहानियों में चर्चा है। कल्याण सेट्टी कहते हैं कि देवेंद्र को मुख्यमंत्री बनाए जाने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन महाराष्ट्र भाजपा में चर्चा थी कि उनका पत्ता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने काट दिया। हो सकता है फडणवीस समर्थकों ने इस बहाने अपनी नाराजगी जाहिर की हो। हालांकि अब तो सार्वजनिक स्थल पर वह काफी मुस्कराते नजर आते हैं।

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