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Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार के मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट पर केंद्र का रोड़ा, हाईकोर्ट से कहा- इस जमीन पर हमारा मालिकाना हक
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 06 Jun 2022 07:34 PM IST
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सार
केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा, ''केंद्र सरकार इस बात से इनकार करती है कि आवेदक (महाराष्ट्र सरकार) या किसी अन्य पार्टी के पास जमीन का कोई अधिकार, मालिकाना हक और हित या कब्जा है।"
मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट की विवादित जमीन को लेकर केंद्र दाखिल किया हलफनामा
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
केंद्र ने सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में एक हलफनामा पेश किया जिसमें उसने मुंबई के कांजुरमार्ग इलाके की एक जमीन पर फिर से अपने स्वामित्व और मालिकाना हक का दावा किया है। यह वह जमीन है जहां महाराष्ट्र सरकार ने मेट्रो कार शेड बनाने का प्रस्ताव रखा था और दावा किया था कि एक निजी फर्म ने धोखाधड़ी से आदेश प्राप्त किया।
इस जमीन के मालिकाना हक को लेकर केंद्र और महाराष्ट्र सरकार के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। राज्य सरकार ने अपने मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए करीब 100 एकड़ जमीन पर कार शेड बनाने का प्रस्ताव रखा था।
इस साल मार्च में महाराष्ट्र सरकार को पता चला कि हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2020 में एक निजी फर्म -आदर्श वाटर पार्क एंड रिसोर्ट्स- को कांजुरमार्ग क्षेत्र में 6,000 एकड़ से अधिक भूमि पर स्वीकृति का आदेश दिया है। इसके बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में एक आवेदन दायर किया जिसमें आदेश को चुनौती दी गई और इसे अवैध घोषित करने की मांग की गई।
सोमवार को केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र सरकार के आवेदन के जवाब में अपना हलफनामा सौंपा और दोहराया कि जमीन पर उसका मालिकाना हक है। हलफनामे में कहा गया कि जमीन केंद्र के कब्जे में है।
केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा, ''केंद्र सरकार इस बात से इनकार करती है कि आवेदक (महाराष्ट्र सरकार) या किसी अन्य पार्टी के पास जमीन का कोई अधिकार, मालिकाना हक और हित या कब्जा है।" हलफनामे में दावा किया गया है कि इस साल मार्च में महाराष्ट्र सरकार द्वारा आवेदन दायर करने के बाद ही केंद्र को आदेश के बारे में पता चला।
न्यायमूर्ति एके मेनन की एकल पीठ ने मामले की आगे की सुनवाई की तारीख 13 जून तय की है।
राज्य सरकार ने यह कहते हुए अपने आवेदन में दावा किया था कि निजी फर्म द्वारा धोखाधड़ी से आदेश प्राप्त किया गया था। 1800 एकड़ से अधिक विवादित भूमि उसकी है और निजी फर्म का उस पर कोई अधिकार नहीं है। राज्य ने अपने आवेदन में कहा कि फर्म ने जानबूझकर महाराष्ट्र सरकार को मुकदमे का पक्षकार नहीं बनाया।
28 अक्टूबर 2020 को निजी फर्म ने कुछ व्यक्तियों के खिलाफ 2006 में दायर अपने मुकदमे पर हाईकोर्ट का आदेश प्राप्त किया था। फर्म ने दावा किया कि अगस्त 2005 में एक समझौते के साथ उसने विशिष्ट प्रदर्शन या अनुपालन की मांग की थी और उसे पूरे कांजूर गांव के विकास अधिकार दिए गए थे।
महाराष्ट्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता हिमांशु टक्के के मुताबिक, ''हाईकोर्ट को सूचित नहीं किया गया था कि 6000 एकड़ से अधिक भूमि में से 1800 एक से अधिक राज्य सरकार की है, लगभग 120 एकड़ केंद्र की और कांजुरमार्ग में लगभग 200 एकड़ भूमि पार्सल है।"
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इस जमीन के मालिकाना हक को लेकर केंद्र और महाराष्ट्र सरकार के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। राज्य सरकार ने अपने मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए करीब 100 एकड़ जमीन पर कार शेड बनाने का प्रस्ताव रखा था।
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इस साल मार्च में महाराष्ट्र सरकार को पता चला कि हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2020 में एक निजी फर्म -आदर्श वाटर पार्क एंड रिसोर्ट्स- को कांजुरमार्ग क्षेत्र में 6,000 एकड़ से अधिक भूमि पर स्वीकृति का आदेश दिया है। इसके बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में एक आवेदन दायर किया जिसमें आदेश को चुनौती दी गई और इसे अवैध घोषित करने की मांग की गई।
सोमवार को केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र सरकार के आवेदन के जवाब में अपना हलफनामा सौंपा और दोहराया कि जमीन पर उसका मालिकाना हक है। हलफनामे में कहा गया कि जमीन केंद्र के कब्जे में है।
केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा, ''केंद्र सरकार इस बात से इनकार करती है कि आवेदक (महाराष्ट्र सरकार) या किसी अन्य पार्टी के पास जमीन का कोई अधिकार, मालिकाना हक और हित या कब्जा है।" हलफनामे में दावा किया गया है कि इस साल मार्च में महाराष्ट्र सरकार द्वारा आवेदन दायर करने के बाद ही केंद्र को आदेश के बारे में पता चला।
न्यायमूर्ति एके मेनन की एकल पीठ ने मामले की आगे की सुनवाई की तारीख 13 जून तय की है।
राज्य सरकार ने यह कहते हुए अपने आवेदन में दावा किया था कि निजी फर्म द्वारा धोखाधड़ी से आदेश प्राप्त किया गया था। 1800 एकड़ से अधिक विवादित भूमि उसकी है और निजी फर्म का उस पर कोई अधिकार नहीं है। राज्य ने अपने आवेदन में कहा कि फर्म ने जानबूझकर महाराष्ट्र सरकार को मुकदमे का पक्षकार नहीं बनाया।
28 अक्टूबर 2020 को निजी फर्म ने कुछ व्यक्तियों के खिलाफ 2006 में दायर अपने मुकदमे पर हाईकोर्ट का आदेश प्राप्त किया था। फर्म ने दावा किया कि अगस्त 2005 में एक समझौते के साथ उसने विशिष्ट प्रदर्शन या अनुपालन की मांग की थी और उसे पूरे कांजूर गांव के विकास अधिकार दिए गए थे।
महाराष्ट्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता हिमांशु टक्के के मुताबिक, ''हाईकोर्ट को सूचित नहीं किया गया था कि 6000 एकड़ से अधिक भूमि में से 1800 एक से अधिक राज्य सरकार की है, लगभग 120 एकड़ केंद्र की और कांजुरमार्ग में लगभग 200 एकड़ भूमि पार्सल है।"