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MLC चुनाव नतीजा: महाराष्ट्र में क्लीन स्वीप से चूकी महायुति, नासिक के निर्दलीय ने बिगाड़ा शिंदे का खेल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 22 Jun 2026 11:19 AM IST
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सार

महाराष्ट्र एमएलसी चुनाव में महायुति ने 17 में से 16 सीटों पर जीत दर्ज कर अपना दबदबा कायम रखा। भाजपा ने 9 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि शिवसेना और एनसीपी ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। हालांकि नासिक सीट पर भाजपा के बागी गोकुल गिट्टे ने शिवसेना उम्मीदवार नरेंद्र दराडे को हराकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को बड़ा झटका दिया। आइए, विस्तार से पूरे मामले को जानते हैं...

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नासिक में बागी ने बिगाड़ा खेल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

महाराष्ट्र विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के नतीजों में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने एक बार फिर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। 17 सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा, शिवसेना और एनसीपी (अजित पवार गुट) ने 16 सीटों पर जीत दर्ज कर विपक्ष को बड़ा झटका दिया है। हालांकि नासिक सीट पर महायुति को बड़ा झटका लगा, जहां भाजपा के बागी नेता ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर शिवसेना के उम्मीदवार को हरा दिया। इस नतीजे को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए राजनीतिक झटका माना जा रहा है।



17 सीटों में से छह सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके थे। बाकी 11 सीटों के नतीजे सोमवार को घोषित किए गए। इन 11 सीटों में अकेले भाजपा ने नौ सीटों पर जीत हासिल की। शिवसेना ने परभणी-हिंगोली सीट अपने नाम की, जबकि नासिक में भाजपा के बागी और निर्दलीय उम्मीदवार गोकुल गिट्टे ने जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया। इन नतीजों से राज्य विधान परिषद में महायुति की स्थिति और मजबूत हो गई है।
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क्या नासिक में भाजपा के बागी ने शिंदे की रणनीति को फेल कर दिया?

नासिक सीट इस चुनाव का सबसे चर्चित मुकाबला रही। यहां शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट के उम्मीदवार नरेंद्र दराडे को निर्दलीय उम्मीदवार गोकुल गिट्टे ने हरा दिया। गोकुल गिट्टे भाजपा से जुड़े रहे हैं, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया था। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। चुनाव से पहले महायुति ने कथित तौर पर पार्षदों को एकजुट रखने के लिए उन्हें ठाणे के एक होटल में भी ठहराया था, ताकि किसी तरह की टूट-फूट न हो। इसके बावजूद नासिक में महायुति की रणनीति सफल नहीं हो सकी।

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किन सीटों पर महायुति ने दर्ज की जीत?

महायुति ने राज्य के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जीत दर्ज की। नांदेड़ से भाजपा के अमरनाथ राजूरकर, नागपुर उपचुनाव से डॉ. राजीव पोतदार, भंडारा-गोंदिया से अविनाश ब्रह्मांकर, छत्रपति संभाजीनगर-जालना से सुहास शिरसाट और जलगांव से नंदकिशोर महाजन ने जीत हासिल की। इसके अलावा सांगली-सातारा से पेशेंस कदम, सोलापुर से राजेंद्र राउत, धाराशिव-लातूर-बीड से बसवराज पाटिल और अमरावती से प्रवीण पोटे भी विजयी रहे। परभणी-हिंगोली सीट पर शिवसेना के सईद खान ने जीत दर्ज की।

किन उम्मीदवारों को निर्विरोध चुना गया?

17 में से छह सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे। इनमें वर्धा-गडचिरोली-चंद्रपुर से भाजपा के अरुण लखानी, ठाणे से शिवसेना के रवींद्र फाटक, रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग से एनसीपी के अनिकेत तटकरे, यवतमाल से शिवसेना के दुष्यंत चतुर्वेदी, अहिल्यानगर से भाजपा के प्राजक्त तनपुरे और पुणे से एनसीपी के विक्रम काकड़े शामिल हैं। इन नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि राज्य की राजनीति में फिलहाल महायुति का दबदबा कायम है।

क्या इन नतीजों का असर राज्य की राजनीति पर पड़ेगा?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एमएलसी चुनाव के नतीजों ने महायुति सरकार की संगठनात्मक ताकत को एक बार फिर साबित कर दिया है। हालांकि नासिक सीट पर मिली हार ने यह भी दिखाया है कि बागी नेता भविष्य में गठबंधन के लिए चुनौती बन सकते हैं। विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों से पहले ये नतीजे महायुति के लिए उत्साह बढ़ाने वाले माने जा रहे हैं, जबकि विपक्ष के सामने अपनी रणनीति पर पुनर्विचार की चुनौती खड़ी हो गई है।

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