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Shiv Sena UBT Rift: बागियों को आदित्य ठाकरे ने बताया बिकाऊ, वफादारी पर भी सवाल; कहा- लालच में विचारधारा छोड़ी
एएनआई, मुंबई
Published by: अमन तिवारी
Updated Mon, 22 Jun 2026 11:40 AM IST
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सार
आदित्य ठाकरे ने बागी सांसदों पर तीखा हमला करते हुए उन्हें बिकाऊ और लालची बताया है। उन्होंने कहा कि इन सांसदों ने विचारधारा के बजाय निजी फायदे को चुना है।
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे ने अपनी पार्टी के बागी सांसदों पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा की। इसमें उन्होंने बागी सांसदों पर विचारधारा के बजाय निजी लालच को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। आदित्य ठाकरे ने इन सांसदों को बिकाऊ करार दिया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने उन मतदाताओं के साथ धोखा किया है जिन्होंने उन्हें महाविकास अघाड़ी (MVA) और 'इंडिया' गठबंधन के समर्थन से जिताया था।
आदित्य ठाकरे ने कहा कि ये सांसद कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी की मदद से चुनाव जीते थे। मतदाताओं ने एनडीए (NDA) के उम्मीदवारों और उनकी विचारधारा के खिलाफ वोट दिया था। लेकिन अब इन सांसदों ने अपनी वफादारी और प्रतिष्ठा को शर्मनाक तरीके से बेच दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक फायदे के लिए जनता के पैसे का इस्तेमाल कर रही है। आदित्य के अनुसार, इन सांसदों ने रातों-रात अपनी विचारधारा सिर्फ इसलिए बदल ली क्योंकि वे लालची हो गए थे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि चुनाव के समय इन नेताओं ने ही गठबंधन के बड़े नेताओं से अपने क्षेत्र में रैलियां करने की मांग की थी।
इस बीच, शिवसेना (यूबीटी) ने पार्टी की बैठक में शामिल न होने वाले सांसदों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है। लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) अनिल देसाई ने यह नोटिस भेजा है। इसमें सांसदों को सख्त चेतावनी दी गई है कि उन्हें दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराया जा सकता है। सांसदों को 24 घंटे के भीतर लिखित में अपना स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। पार्टी ने साफ किया है कि अगर वे जवाब नहीं देते हैं, तो यह माना जाएगा कि उन्होंने खुद ही पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है। इसके बाद संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उन पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो जाएगा।
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यह विवाद तब और गहरा गया जब दिल्ली में हुई संसदीय दल की बैठक में नो में से केवल तीन लोकसभा सांसद ही पहुंचे। बैठक में अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे शामिल हुए। जबकि संजय दीना पाटिल समेत छह सांसद गायब रहे। गायब रहने वाले अन्य सांसदों में नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, ओमप्रकाश राजेनिंबाल्कर और भाऊसाहेब वाकचौरे के नाम शामिल हैं। राज्यसभा सांसद संजय राउत ने पहले ही कह दिया है कि इन अनुपस्थित सांसदों को अयोग्य घोषित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
ये भी पढ़ें: पुणे पोर्शे केस: आरोपी के पिता की जमानत रद्द कराने की मांग, अदालत पहुंची पुलिस; वायरल वीडियो बना मुसीबत
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ये छह सांसद उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल हो सकते हैं। शिवसेना एमएलसी चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया है कि इन सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जताया है। इस पूरे घटनाक्रम को ऑपरेशन टाइगर का नाम दिया जा रहा है। आदित्य ठाकरे ने कहा कि इन सांसदों का यह व्यवहार शर्मनाक है और उन्होंने जनता के भरोसे को पूरी तरह तोड़ दिया है।
आदित्य ठाकरे ने कहा कि ये सांसद कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी की मदद से चुनाव जीते थे। मतदाताओं ने एनडीए (NDA) के उम्मीदवारों और उनकी विचारधारा के खिलाफ वोट दिया था। लेकिन अब इन सांसदों ने अपनी वफादारी और प्रतिष्ठा को शर्मनाक तरीके से बेच दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक फायदे के लिए जनता के पैसे का इस्तेमाल कर रही है। आदित्य के अनुसार, इन सांसदों ने रातों-रात अपनी विचारधारा सिर्फ इसलिए बदल ली क्योंकि वे लालची हो गए थे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि चुनाव के समय इन नेताओं ने ही गठबंधन के बड़े नेताओं से अपने क्षेत्र में रैलियां करने की मांग की थी।
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इस बीच, शिवसेना (यूबीटी) ने पार्टी की बैठक में शामिल न होने वाले सांसदों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है। लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) अनिल देसाई ने यह नोटिस भेजा है। इसमें सांसदों को सख्त चेतावनी दी गई है कि उन्हें दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराया जा सकता है। सांसदों को 24 घंटे के भीतर लिखित में अपना स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। पार्टी ने साफ किया है कि अगर वे जवाब नहीं देते हैं, तो यह माना जाएगा कि उन्होंने खुद ही पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है। इसके बाद संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उन पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो जाएगा।
यह विवाद तब और गहरा गया जब दिल्ली में हुई संसदीय दल की बैठक में नो में से केवल तीन लोकसभा सांसद ही पहुंचे। बैठक में अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे शामिल हुए। जबकि संजय दीना पाटिल समेत छह सांसद गायब रहे। गायब रहने वाले अन्य सांसदों में नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, ओमप्रकाश राजेनिंबाल्कर और भाऊसाहेब वाकचौरे के नाम शामिल हैं। राज्यसभा सांसद संजय राउत ने पहले ही कह दिया है कि इन अनुपस्थित सांसदों को अयोग्य घोषित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
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राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ये छह सांसद उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल हो सकते हैं। शिवसेना एमएलसी चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया है कि इन सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जताया है। इस पूरे घटनाक्रम को ऑपरेशन टाइगर का नाम दिया जा रहा है। आदित्य ठाकरे ने कहा कि इन सांसदों का यह व्यवहार शर्मनाक है और उन्होंने जनता के भरोसे को पूरी तरह तोड़ दिया है।