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Great Nicobar Project: ग्रेट निकोबार परियोजना पर कांग्रेस ने फिर उठाए सवाल, केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र

पीटीआई, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Mon, 22 Jun 2026 11:59 AM IST
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सार

कांग्रेस ने एक बार फिर ग्रेट निकोबार योजना के लिए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। जयराम रमेश ने पोत परिवहन मंत्री सर्वानंद सोनोवाल को पत्र लिखकर निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी पर सवाल किए हैं। 

Jairam Ramesh writes to Sonowal seeks clarifications on Great Nicobar project transhipment port
जयराम रमेश, कांग्रेस नेता - फोटो : एएनआई
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विस्तार

ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर लगातार सवाल उठा रहे कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल को पत्र लिखा है। इस पत्र में जयराम रमेश ने परियोजना के तहत बनने वाले ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के विकास को लेकर कई स्पष्टीकरण मांगे हैं। पत्र में जयराम रमेश ने ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के विकास के लिए निजी कंपनी की भागीदारी के लिए निविदाएं जारी करने की समय-सीमा और निजी कंपनी के चयन की प्रक्रिया की जानकारी मांगी है। 


उन्होंने यह भी पूछा कि परियोजना में निजी क्षेत्र की न्यूनतम हिस्सेदारी 55 प्रतिशत निर्धारित की गई है, तो क्या 100 प्रतिशत निजी स्वामित्व की अनुमति होगी, या फिर सार्वजनिक संस्थाओं के लिए भी न्यूनतम हिस्सेदारी तय की गई है? जयराम रमेश ने प्रोजेक्ट से पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर चिंता भी जताई। 
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निजी स्वामित्व और फंडिंग पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने कहा कि समिति के रिकॉर्ड के अनुसार परियोजना के विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) में कम से कम 55 प्रतिशत हिस्सेदारी किसी भारतीय स्वामित्व एवं नियंत्रण वाली इकाई के पास होनी चाहिए।
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उन्होंने तीन प्रमुख सवाल उठाए
  • क्या 55 प्रतिशत न्यूनतम निजी हिस्सेदारी का मतलब है कि परियोजना में 100 प्रतिशत निजी स्वामित्व की अनुमति होगी?
  • क्या बंदरगाह क्षेत्र में स्वामित्व का विविधीकरण सुनिश्चित किया जाएगा या फिर हवाईअड्डों की तरह ऐसी स्थिति बनने दी जाएगी, जहां एक ही निजी कंपनी अधिकांश परिसंपत्तियां हासिल कर ले?
  • जब पीपीपीएसी ने परियोजना के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) अनुदान देने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है, तो क्या मंत्रालय अपने बजट से पूंजीगत सहायता उपलब्ध कराएगा?
  • रमेश ने मंत्री से यह भी आग्रह किया कि वे निविदा जारी करने और निजी भागीदार के अंतिम चयन की संभावित समय-सीमा साझा करें।

पहले भी कई मंत्रियों को लिख चुके हैं पत्र
  • जयराम रमेश इससे पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भी कई पत्र लिख चुके हैं। इन पत्रों में उन्होंने परियोजना से होने वाले संभावित पर्यावरणीय विनाश और पारिस्थितिकीय प्रभावों को लेकर चिंता जताई है।
  • हाल ही में उन्होंने पर्यावरण मंत्री यादव को लिखे पत्र में आरोप लगाया था कि परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव आकलन पर्याप्त नहीं हैं और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है।
  • कांग्रेस का आरोप है कि गलाथिया बे में प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट पोर्ट से बड़े पैमाने पर प्रवाल भित्तियों को नुकसान पहुंचेगा और इससे गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा होगा।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी इस परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि सरकार का यह दावा कि परियोजना का उद्देश्य रक्षा और ट्रांसशिपमेंट अवसंरचना का विकास है, जबकि यह भ्रामक है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस परियोजना का असल उद्देश्य एक उद्योगपति को लाभ पहुंचाना है ताकि वह देश की सबसे संवेदनशील पारिस्थितिकीय भूमि पर होटल और कैसीनो विकसित कर सके।
ग्रेट निकोबार परियोजना के तहत प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के साथ एक नागरिक-सह-नौसैनिक हवाईअड्डा, टाउनशिप और बिजली संयंत्र विकसित करने की भी योजना है।
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