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Maharashtra: मुंबई एयरपोर्ट पर बड़े तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, 37 करोड़ रुपये का सोना जब्त; 24 महिलाएं गिरफ्तार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitin Gautam Updated Fri, 10 Apr 2026 01:26 PM IST
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महाराष्ट्र की बड़ी खबरें - फोटो : अमर उजाला
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राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक बड़े सोना तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए 24 महिलाओं को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, इनके पास से 29.37 किलोग्राम सोना बरामद किया गया, जिसकी कीमत लगभग 37.74 करोड़ रुपये है। अधिकारी ने बताया कि खुफिया सूचना के आधार पर डीआरआई की मुंबई जोनल यूनिट ने बुधवार को 'ऑपरेशन धाहाबू ब्लिट्ज' चलाया। इसे इस वर्ष मुंबई एयरपोर्ट पर हुई सबसे बड़ी कार्रवाई में से एक माना जा रहा है। 'धाहाबू' स्वाहिली भाषा में सोने को कहा जाता है।
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अधिकारियों ने बताया, 'डीआरआई को सूचना मिली थी कि केन्या के नैरोबी से आने वाली कुछ महिलाएं अपने साथ सोना छिपाकर ला रही हैं। इसके बाद नैरोबी से मुंबई पहुंची 24 विदेशी महिलाओं को रोका गया। उनकी जांच के दौरान बैग और कपड़ों से 25.10 किलोग्राम सोने की ईंटें और 4.27 किलोग्राम सोने के आभूषण बरामद किए गए।'
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जांच में सामने आया कि इन महिलाओं को सोना छिपाने और सुरक्षा जांच से बच निकलने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया था। इससे यह संकेत मिलता है कि यह एक सुनियोजित तस्करी गिरोह है, जो ऐसे कैरियर के जरिए एयरपोर्ट सुरक्षा को चकमा देने की कोशिश कर रहा था। अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार महिलाओं को अदालत में पेश किया जाएगा, जबकि तस्करी रैकेट के सरगनाओं को पकड़ने के लिए आगे की जांच जारी है।

ठाणे में मेडिकल सर्टिफिकेट के बदले रिश्वत लेते डॉक्टर गिरफ्तार
महाराष्ट्र के ठाणे जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने एक मेडिकल ऑफिसर को गिरफ्तार किया है। आरोपी डॉक्टर का नाम अनिल पाटिल है और वह मुरबाड ग्रामीण अस्पताल में तैनात है। डॉक्टर पर कथित तौर बंदूक के लाइसेंस को रिन्यू कराने के लिए जरूरी मेडिकल सर्टिफिकेट देने के बदले 2,000 रुपये रिश्वत लेने का आरोप है। एसीबी के मुताबिक, एक व्यक्ति अपने पिता के रिवॉल्वर लाइसेंस के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने अस्पताल आया था। वहां एम्बुलेंस ड्राइवर महेंद्र हिंदुराव ने डॉक्टर के नाम पर 3,000 रुपये की मांग की। बाद में बातचीत के बाद सौदा 2,000 रुपये में तय हुआ। शिकायतकर्ता रिश्वत नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने एसीबी को इसकी जानकारी दे दी। एसीबी की टीम ने गुरुवार को अस्पताल परिसर में जाल बिछाया। टीम ने मेडिकल ऑफिसर को रिश्वत की रकम लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। एम्बुलेंस ड्राइवर फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। एसीबी अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस खेल में और लोग भी शामिल हैं। डॉक्टर अनिल पाटिल के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है।
 

ठाणे में बुजुर्ग से 28 लाख की ठगी, जालसाजों ने डिजिटल अरेस्ट का बनाया शिकार
महाराष्ट्र के ठाणे जिले में एक 64 साल के बुजुर्ग से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करीब 28 लाख रुपये की ठगी हुई है। पीड़ित बुजुर्ग कल्याण पश्चिम की रौनक सिटी में रहते हैं। पुलिस ने शुक्रवार को इस मामले की जानकारी दी। पीड़ित ने बताया कि एक अप्रैल से सात अप्रैल के बीच उनके पास कई अनजान और अंतरराष्ट्रीय नंबरों से व्हाट्सएप कॉल आए। फोन करने वालों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया। उन्होंने बुजुर्ग को डराया कि उनके बैंक खाते मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी गतिविधियों से जुड़े हैं। जालसाजों ने बुजुर्ग को गिरफ्तार करने की धमकी दी। उन्होंने जांच और वेरिफिकेशन के नाम पर पैसे भेजने का दबाव बनाया। डर की वजह से बुजुर्ग ने आरोपियों के बताए खातों में कुल 27.9 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में उन्हें अहसास हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। खड़कपाड़ा पुलिस स्टेशन ने बुधवार को इस मामले में केस दर्ज किया। पुलिस अब उन बैंक खातों और कॉल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। आरोपियों को पकड़ने के लिए डिजिटल सबूतों की मदद ली जा रही है।
 

छोटी बहन को ज्यादा प्यार मिलने के शक में घर से भागी किशोरी
महाराष्ट्र के पालघर जिले में एक 13 साल की लड़की अपनी मां से नाराज होकर घर से भाग गई। उसे लगता था कि उसकी मां छोटी बहन को ज्यादा प्यार करती है और हमेशा उसी का पक्ष लेती है। यह घटना सफाले पुलिस स्टेशन के हंजरोली गांव की है। पुलिस ने बताया कि लड़की काफी मानसिक तनाव में थी और खुद को नुकसान भी पहुंचा सकती थी। जब वह घर से गायब हुई, तो पुलिस और गांव वालों ने मिलकर उसकी तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद उसे द्रांजरोली बांध के पास सुरक्षित ढूंढ लिया गया। जिला पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख ने बताया 'हमारी सबसे पहली चिंता उसकी सुरक्षा थी। अच्छी बात ये है कि उसे कोई नुकसान नहीं हुआ। उसे बचाने के बाद, उसके बुरे विचारों और इमोशनल परेशानी को दूर करने के लिए उसकी प्रोफेशनल काउंसलिंग की गई, अब उसे सुरक्षित उसके माता-पिता को सौंप दिया गया है।
 

अंबेडकर जयंती के मौके पर महाराष्ट्र में सुरक्षा-सुविधाओं के कड़े इंतजाम के आदेश दिए गए
महाराष्ट्र के कोंकण विभाग में डॉ बीआर अंबेडकर की 135वीं जयंती मनाने की तैयारियां जोरों पर हैं। कोंकण मंडल की आयुक्त रुबल अग्रवाल ने अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। उन्होंने 14 अप्रैल को होने वाले कार्यक्रमों के लिए सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर कड़े निर्देश दिए हैं। इस साल जयंती के मौके पर चैत्यभूमि पर हेलीकॉप्टर से फूलों की बारिश की जाएगी। इसके साथ ही पूरे विभाग में 'सामाजिक समता सप्ताह' मनाया जाएगा। इस दौरान जिला कलेक्टर महापुरुषों की मूर्तियों को रोशन करेंगे और लोगों को संविधान की प्रतियां बांटेंगे। सामाजिक समानता को बढ़ावा देने के लिए कई जगहों पर भाषण और अन्य कार्यक्रम भी होंगे।

इस मौके पर मुंबई की चैत्यभूमि पर लाखों अनुयायियों के आने की उम्मीद है। इसे देखते हुए पुलिस, नगर निगम और जिला प्रशासन मिलकर काम करेंगे। आयुक्त ने नगर निगम को साफ-सफाई, पीने के पानी, अस्थाई शौचालयों और स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर इंतजाम करने को कहा है। लोगों के आने-जाने के लिए रेलवे और बेस्ट (BEST) बसें आपसी तालमेल से काम करेंगी। आपात स्थिति के लिए एम्बुलेंस की भी तैनात रहेंगी। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारी पुलिस बल के साथ सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और एक मुख्य कंट्रोल रूम भी बनाया जाएगा।
 

बयानों में अंतर के कारण हत्या की आरोपी महिला कोर्ट से बरी
महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने 48 साल की एक महिला को हत्या के आरोप से बरी कर दिया है। यह महिला बोल नहीं सकती है। उस पर अपनी होने वाली बहू की हत्या का आरोप था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मृतक लड़की ने जो बयान दिए थे, उनमें बहुत अंतर था। इस वजह से अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित करने में नाकाम रहा। यह मामला अक्टूबर 2020 का है। मामले में पालघर जिले की रहने वाली कमल चंद्रकांत कनोजा पर आरोप लगा था कि उन्होंने अपने सौतेले बेटे की होने वाली पत्नी अमिता गोतर्णा पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। अमिता उस समय इसी परिवार के साथ रह रही थी। इस घटना में अमिता 72 प्रतिशत तक जल गई थी और नासिक के सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।

बचाव पक्ष के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि अमिता के बयानों में तालमेल नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि अमिता के पिता और भाई ने उसे गलत बयान देने के लिए सिखाया होगा। कोर्ट ने पाया कि अमिता ने दो अलग-अलग तरह के बयान दिए थे। पुलिस को दिए बयान में उसने कमल को दोषी बताया, लेकिन मजिस्ट्रेट के सामने दिए बयान में उसने इसे एक हादसा बताया। मजिस्ट्रेट को दिए बयान में उसने कहा था कि आग लगने के समय वहां कोई मौजूद नहीं था। जज एन के करांडे ने कहा कि उस डॉक्टर से भी पूछताछ नहीं की गई, जिसने अमिता को बयान देने के लिए मानसिक रूप से ठीक बताया था। इसके अलावा केमिकल रिपोर्ट से भी महिला के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला। इन सब बातों को देखते हुए कोर्ट ने कमल को रिहा करने का आदेश दिया।
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