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Maharashtra: विदेशी नागरिक से लूट के मामले में दो पुलिसकर्मी गिरफ्तार, तीन की तलाश जारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Nitin Gautam
Updated Sat, 28 Mar 2026 08:48 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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मुंबई के जूहू इलाके में दो पुलिस कांस्टेबल एक फॉरेक्स कंपनी के डिलीवरी एग्जीक्यूटिव का अपहरण कर उससे 10,000 अमेरिकी डॉलर लूटने के आरोप में गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि लूटी गई रकम अभी तक बरामद नहीं हो सकी है। मुंबई पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में तीन अन्य आरोपी अब भी फरार है, उनकी तलाश की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संदीप शिंदे (33) और गजेंद्र राजपूत (40) के रूप में हुई है। दोनों क्रमशः बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स और जोगेश्वरी पुलिस स्टेशन में तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने अपनी वर्दी और पद का दुरुपयोग करते हुए इस पूरी वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस के अनुसार, घटना 25 मार्च की दोपहर करीब 2 बजे की है। पीड़ित बांद्रा स्थित एक फॉरेक्स कंपनी में डिलीवरी एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत है। वह जूहू इलाके में विदेशी मुद्रा देने पहुंचा था। इसी दौरान जूहू सर्कल के पास आरोपियों ने उसे एक एर्टिगा कार में जबरन बैठाकर अगवा कर लिया। कार के अंदर आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की और उसे झूठे केस में फंसाने की धमकी दी।
इसके बाद आरोपी पीड़ित को दहिसर ले गए, जहां उससे 10,000 डॉलर से भरा बैग छीन लिया गया। आरोप है कि इस दौरान पीड़ित की लगातार पिटाई भी की गई। हालांकि, पीड़ित ने शोर मचाया और आसपास के लोग आ गए। इसके बाद पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। सूचना मिलने पर पुलिस की पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंच गई।
लोगों को आता देख आरोपी भगाने लगे लेकिन पुलिस एक ही आरोपी की गिरफ्तार कर पाई जबकि दूसरा भीड़ का फायदा उठाकर भाग गया। फॉरेक्स कंपनी के डिलीवरी एग्जीक्यूटिव से लूट की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और दूसरे आरोपी गजेंद्र राजपूत को ठाणे स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपियों के खिलाफ अपहरण, उगाही, डकैती और सरकारी कर्मचारी बनकर अपराध करने जैसे गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और फरार तीन आरोपियों की तलाश में कई टीमें जुटी हुई हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम का गठन किया गया है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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पुलिस के अनुसार, घटना 25 मार्च की दोपहर करीब 2 बजे की है। पीड़ित बांद्रा स्थित एक फॉरेक्स कंपनी में डिलीवरी एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत है। वह जूहू इलाके में विदेशी मुद्रा देने पहुंचा था। इसी दौरान जूहू सर्कल के पास आरोपियों ने उसे एक एर्टिगा कार में जबरन बैठाकर अगवा कर लिया। कार के अंदर आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की और उसे झूठे केस में फंसाने की धमकी दी।
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इसके बाद आरोपी पीड़ित को दहिसर ले गए, जहां उससे 10,000 डॉलर से भरा बैग छीन लिया गया। आरोप है कि इस दौरान पीड़ित की लगातार पिटाई भी की गई। हालांकि, पीड़ित ने शोर मचाया और आसपास के लोग आ गए। इसके बाद पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। सूचना मिलने पर पुलिस की पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंच गई।
लोगों को आता देख आरोपी भगाने लगे लेकिन पुलिस एक ही आरोपी की गिरफ्तार कर पाई जबकि दूसरा भीड़ का फायदा उठाकर भाग गया। फॉरेक्स कंपनी के डिलीवरी एग्जीक्यूटिव से लूट की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और दूसरे आरोपी गजेंद्र राजपूत को ठाणे स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपियों के खिलाफ अपहरण, उगाही, डकैती और सरकारी कर्मचारी बनकर अपराध करने जैसे गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और फरार तीन आरोपियों की तलाश में कई टीमें जुटी हुई हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम का गठन किया गया है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
नागपुर: 20 साल से पहचान बदलकर छिपा था हत्यारा, सीबीआई ने किया गिरफ्तार
सीबीआई ने 20 साल से फरार हत्या के एक आरोपी को महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार किया है। दुर्गा बहादुर भट्ट छेत्री उर्फ दीपक पर 2005 में केरल के तिरुवनंतपुरम में छात्र श्यामल मंडल के अपहरण और फिरौती के लिए हत्या का आरोप है। इस मामले में उसके साथी मोहम्मद अली को 2022 में ही दोषी ठहराया जा चुका है, जबकि छेत्री पहचान बदलकर फरार था। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का रहने वाला छेत्री, सूरज भट्ट के नाम से नागपुर में रह रहा था। वहां उसने शादी भी कर ली थी। केरल हाईकोर्ट के आदेश पर 2008 में जांच संभालने वाली सीबीआई ने खुफिया जानकारी के आधार पर उसे दबोचा। गौरतलब है कि, श्यामल मंडल का शव 23 अक्तूबर 2005 को तिरुवनंतपुरम के पास मिला था।
एनसीबी मुंबई प्रमुख घावटे पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज
महाराष्ट्र में पुलिस ने नवी मुंबई के बिल्डर गुरुनाथ चिचकर की आत्महत्या के संबंध में नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) के जोनल निदेशक अमित घावटे के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एक पुलिस अधिकारी ने शनिवार को बताया कि गुरुनाथ चिचकर ड्रग्स तस्करी करने वाले गिरोह के सरगना के पिता थे। इस सरगना को प्रत्यर्पण के जरिये पिछले वर्ष ही मलयेशिया से भारत लाया गया था। अधिकारी ने बताया कि कोर्ट के निर्देश के बाद, 2008 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी घावटे के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने, आपराधिक साजिश, जबरन वसूली और भारतीय न्याय संहिता की अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। गुरुनाथ चिचकर ने 25 अप्रैल, 2025 को अपने कार्यालय में पिस्तौल से खुद को गोली मार ली थी। आरोप है कि एनसीबी उन्हें परेशान कर रही थी। एनसीबी कई देशों में सक्रिय एक बड़े ड्रग सिंडिकेट की जांच के सिलसिले में उनके बेटे नवीन की तलाश कर रही थी। पुलिस ने घटनास्थल से एक सुसाइड नोट बरामद किया था, जिसमें चिचकर ने दावा किया था कि वह एनसीबी और पुलिस अधिकारियों की ओर से की जा रही प्रताड़ना से तंग आ चुका था। नवी मुंबई पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी, जिससे बाद में घावटे की भूमिका सामने आई। एनसीबी ने पिछले साल जून में मलयेशिया से प्रत्यर्पण सुनिश्चित करने के बाद नवीन चिचकर (35) को गिरफ्तार किया था। नवीन पर अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का सरगना होने का आरोप है। एनसीबी द्वारा दर्ज कई मामलों में उसकी तलाश थी। बाद में उसके छोटे भाई धीरज को भी गिरफ्तार किया गया था।