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Maharashtra Political Crisis: सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने निपटाए सभी जरूरी काम

Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Wed, 29 Jun 2022 07:46 PM IST
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सार

महाराष्ट्र सरकार के एक मंत्री से मिली जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने सदन में बहुमत साबित करने के राज्यपाल के आदेश को बरकरार रखा तो 30 जून को महाविकास आघाड़ी की सरकार इसका सामना नहीं करेगी...

Maharashtra Political Crisis: Congress, NCP and Shiv Sena seem less likely to succeed in the floor test to be held on June 30
उद्धव ठाकरे - फोटो : ANI (File Photo)
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विस्तार

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले की निगाह सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है। उन्होंने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि उम्मीद पर दुनिया टिकी है। सब कुछ तो अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा। जब पटोले से बात हो रही थी, उसी समय मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे कैबिनेट मीटिंग की अध्यक्षता कर रहे थे। कांग्रेस के कोटे से दो मंत्रियों ने बैठक खत्म होने से पहले बाहर आना जरूरी समझ लिया। पता करने पर सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री उद्धव सभी जरूरी काम निपटा रहे थे।

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कैबिनेट की मीटिंग में उद्धव ठाकरे ने एक तरह से विदाई जैसा संबोधन दिया। इस दौरान महाराष्ट्र के दो शहरों के नाम बदलने का प्रस्ताव आया और उसे मंजूरी दी गई। महाराष्ट्र सरकार के एक मंत्री से मिली जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने सदन में बहुमत साबित करने के राज्यपाल के आदेश को बरकरार रखा तो 30 जून को महाविकास आघाड़ी की सरकार इसका सामना नहीं करेगी। सूत्र का कहना है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के आखिरी संबोधन से उन्हें इसी का आभास हुआ है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट की बैठक के दौरान भी उद्धव ने कहा कि उनके अपने लोगों ने उनके साथ विश्वासघात किया। ऐसे में यही कयास हैं कि 30 जून को फ्लोर टेस्ट होने की दशा में मुख्यमंत्री अपना भाषण देकर पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर सकते हैं।

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30 जून के फ्लोर टेस्ट से क्यों कतरा रही है सरकार?

कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के नेताओं को 30 जून को होने वाले बहुमत परीक्षण में सफलता मिलने के आसार कम नजर आ रहे हैं। इस मामले में एनसीपी और कांग्रेस दोनों का पूरा दारोमदार शिवसेना पर टिका है। बागी विधायक शिवसेना के हैं और यह उसका आंतरिक मामला भी है। वहीं शिवसेना के नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मुंबई में विधायकों के लौटने और महाराष्ट्र विधानसभा का सदन एक-दो दिन चलने के बाद ही अच्छा निर्णायक परिणाम आ सकता है। महाराष्ट्र कांग्रेस के एक बड़े नेता का कहना है कि उन्हें इस तरह से और अचानक राज्यपाल द्वारा बहुमत साबित करने के निर्देश देने का अंदाजा नहीं था।

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