Maharashtra Political Crisis: उद्धव सरकार के बहाने दांव पर मराठा सरदार शरद पवार की साख, भाजपा को आखिरी चाल का इंतजार
भाजपा के नेताओं को उम्मीद है कि एकनाथ शिंदे जब मुंबई आएंगे तो उन्हें 37 से अधिक विधायक समर्थन देंगे। भाजपा की इस उम्मीद के जवाब में एनसीपी और शिवसेना पूरी तरह ना में सिर हिला देते हैं। एक सांसद महोदय नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि एकनाथ शिंदे के मुंबई आने के बाद उनके पास 25 विधायक भी नहीं रहेंगे...
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महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलने के बाद बदली सियासी तस्वीर के बीच एनसीपी प्रमुख और मराठा राजनीति के सरदार शरद पवार की पूरी राजनीतिक साख दांव पर लगी है। उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले को भरोसा है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार महाराष्ट्र में बनी रहेगी। यही भरोसा आदित्य ठाकरे के करीबी और शिवसेना की युवा इकाई से जुड़े नेता का भी है। जयंत पाटील समेत तमाम नेता आखिरी दांव चलने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। दरअसल महाविकास आघाड़ी सरकार एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने ही बनवाई थी। एनसीपी के नेता कहते हैं कि सिर मुड़ाते ही ओले पड़े थे, जब अजीत पवार देवेंद्र फडणवीस के पास चले गए थे, और देवेंद्र 48 घंटे के मुख्यमंत्री बने थे। शिवसेना नेता कहते हैं कि सीन वही ढाई साल पहले वाला है, बस किरदार बदल गए हैं।
सरकार बचाने की पूरी कोशिश
शिवसेना के नेताओं के अलावा एनसीपी भी सरकार बचाने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। एनसीपी प्रमुख शरद पवार चाहते हैं कि किसी भी तरह से महाविकास आघाड़ी की सरकार न गिरने पाए। एनसीपी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ऐसा हुआ तो विपक्ष में बैठी भाजपा के कुछ नेताओं के लिए यह काफी बड़ा झटका होगा। सूत्र का कहना है कि जब से महाविकास आघाड़ी की सरकार महाराष्ट्र की सत्ता में है, भाजपा के नेताओं ने गिराने, तोड़ने-फोड़ने या सरकार को तंग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसका सारा कार्यक्रम दिल्ली से ही चला है। यह पवार बनाम दिल्ली के पॉवरफुल नेता की राजनीतिक लड़ाई भी है।
राज्य सरकार के एक मंत्री की मानें तो अजीत पवार को घेरने की खूब कोशिश हुई। एनसीपी में भी कई प्रयोग किए गए। शरद पवार की गुजरात में अमित शाह से मुलाकात के बारे में पूछने पर सूत्र का कहना है कि राजनीति में बहुत कुछ चलता रहता है। यह भाजपा के नेताओं को भी पता है कि भाऊ (शरद पवार) राजनीति के कैसे खिलाड़ी हैं? वह कहते हैं कि हमारे दो नेता अनिल देशमुख (पूर्व गृहमंत्री) और नवाब मलिक (अभी मंत्री हैं) जेल में हैं। यहां तक के घटनाक्रम में भी बहुत राजनीति हुई है। एनसीपी नेता का कहना है कि एनसीपी को तोड़ने की भी कोशिश हुई, कांग्रेस को भी दो फाड़ करने के प्रयास हुए, लेकिन विरोधियों को सफलता नहीं मिल पाई।
शिवसेना का आत्मविश्वास ले डूबा
एनसीपी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि बीच में सबकुछ ठीक चल रहा था। हम सभी को लग रहा था कि कुछ कांग्रेस के विधायक पार्टी का साथ छोड़ सकते हैं। एनसीपी में इस तरह की संभावना नहीं रह गई थी। खुद पवार हर कड़ी पर नजर रख रहे थे। सूत्र के मुताबिक हमारे नेता ने भाजपा के ऑपरेशन लोटस को लेकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चेताया था। लेकिन मुझे लगता है कि शिवसेना जरूरत से अधिक आत्मविश्वास में थी। बताते हैं कि दरअसल शिवसेना में उद्धव और आदित्य के साथ-साथ महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे बराबर छवि और पकड़ रखते थे। शिवसेना पुराने शिवसैनिक एकनाथ को लेकर कुछ ज्यादा आश्वस्त भी थी। एकनाथ शिंदे के बेटे तो शिवसेना से सांसद भी हैं।
भाजपा को पवार के आखिरी दांव का इंतज़ार
भाजपा के नेताओं को उम्मीद है कि एकनाथ शिंदे जब मुंबई आएंगे तो उन्हें 37 से अधिक विधायक समर्थन देंगे। भाजपा की इस उम्मीद के जवाब में एनसीपी और शिवसेना पूरी तरह ना में सिर हिला देते हैं। एक सांसद महोदय नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि एकनाथ शिंदे के मुंबई आने के बाद उनके पास 25 विधायक भी नहीं रहेंगे। सूत्र का कहना है कि शिवसेना, इसके कैडर, संगठन को समझना होगा। अभी भी जिला से लेकर ब्लाक तक की इकाई, लोकसभा, राज्यसभा के सदस्य सब बालासाहब ठाकरे परिवार और उद्धव ठाकरे के साथ खड़े हैं। उद्धव ठाकरे और उनकी पत्नी रश्मि ठाकरे ने पूरा जोर लगा रखा है। यही कारण है कि भाजपा पूरे घटनाक्रम में पर्दे के पीछे है, लेकिन फूंक-फूंककर कदम रख रही है।
सूत्र का कहना है कि हम सब चाहते हैं कि गुवाहाटी गए सभी विधायक मुंबई आएं। सरकार का विश्वास मत तो सदन में ही होगा। एकनाथ शिंदे के पास 40 के करीब भी विधायक हैं, तो उन्हें सदन में सरकार को गिराने की प्रक्रिया के बारे में सोचना चाहिए। ये भरोसा शिंदे गुट की तरफ से भाजपा को मिला भी है, तभी मंगलवार रात फडणवीस राज्यपाल से मिलने भी गए और फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की। जाहिर है ऐसे में शरद पवार के लिए बाजी को पलटना इस बार आसान नहीं लगता, लेकिन पवार इस खेल के बड़े खिलाड़ी रहे हैं, उनका आखिरी दांव क्या होगा, सबकी नजर इसी पर है।