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Maharashtra: 'शिवसेना का ठाकरे खेमा हताशा में कर रहा अनर्गल बयानबाजी'; मेगा प्रेस वार्ता पर शिंदे गुट का तंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 17 Jan 2024 03:15 PM IST
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सार
शिवसेना के दो-फाड़ होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और वर्तमान CM एकनाथ शिंदे आमने-सामने हैं। ताजा घटनाक्रम में शिंदे गुट ने कहा कि ठाकरे खेमा 'पीपुल्स कोर्ट' और 'मेगा प्रेस कॉन्फ्रेंस' जैसी कवायद कर अनर्गल बयानबाजी कर रहा है। ठाकरे का खेमा हताशा में ऐसा कर रहा है।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे (फाइल)
- फोटो : social media
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विस्तार
महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कभी पूर्व CM उद्धव ठाकरे के करीबी रहे थे, लेकिन आज बदले हुए सियासी चौसर पर दोनों एक दूसरे पर हमला करने का कोई मौका नहीं गंवाते। ताजा घटनाक्रम में शिंदे खेमे ने ठाकरे गुट को आड़े हाथ लिया है। शिंदे खेमे का दावा है कि शिवसेना (UBT) हताश हो चुका है। महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले ठाकरे गुट ने मंगलवार को 'मेगा प्रेस वार्ता' सह 'पीपुल्स कोर्ट' का नाम दिया। ठाकरे गुट पहले भी कहता रहा है कि वह इस राजनीतिक लड़ाई को जनता के बीच लड़ेगा।
निराशा और हताशा में कर रहे बयानबाजी
छत्रपति संभाजी नगर में बुधवार को पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे के गुट पर कटाक्ष करते हुए शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा कि संवाददाता सम्मेलन से विरोधी खेमे की हताशा साफ झलकती है। इनका आरोप है कि ठाकरे खेमे के नेताओं ने जबरन पार्टी कार्यकर्ताओं को 'मेगा प्रेस कॉन्फ्रेंस' में शामिल कराया। उन्हें मजबूर किया गया। शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के प्रवक्ता संजय शिरसाट ने कहा, 'जब लोग निराश होते हैं तो ऐसा करते हैं। वे अपना जनाधार और अस्तित्व खो चुके हैं। पार्टी ने मेगा प्रेस वार्ता नहीं चुनावी रैली का आयोजन किया था।'
CM एकनाथ शिंदे का खेमा बॉम्बे हाईकोर्ट क्यों गया?
उन्होंने कहा कि हताशा में उद्धव ठाकरे गुट के नेता अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। जनता इन नेताओं को सिरे से खारिज कर चुकी है। स्पीकर नार्वेकर के फैसले पर शिरसाट ने कहा कि वे विधानसभा अध्यक्ष के फैसले की आलोचना नहीं कर रहे, लेकिन अगर उनके दावों में दम था तो ठाकरे गुट के 14 विधायकों को अयोग्य ठहराया जाना चाहिए था। ऐसा नहीं किया गया, इसलिए शिंदे खेमे ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
2018 से पहले पैर छुए, कांग्रेस-NCP के साथ गठबंधन पर विद्रोह
शिवसेना में विभाजन से पहले कभी एकनाथ शिंदे ने पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे के पैर भी छुए थे। इस पर एक सवाल के जवाब में शिरसाट ने कहा, अगर ऐसी धारणा है कि संस्कारी शख्स कमजोर या असहा होने के कारण आपके पैर छू रहा है तो यह मूर्खता है। उन्होंने कहा कि शिंदे ने 2018 से पहले उद्धव के पैर छुए थे, लेकिन जब उन्होंने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के साथ गठबंधन कर महाविकास अघाड़ी सरकार (MVA) बनाने का फैसला लिया तो पार्टी में विद्रोह हुआ। बता दें कि उद्धव ठाकरे के इस्तीफे के बाद पूर्व CM देवेंद्र फडणवीस के समर्थन से शिंदे मुख्यमंत्री बने। बाद में इनके साथ NCP का अजित पवार खेमा भी जुड़ गया। पवार डिप्टी सीएम हैं।
जनता के साथ-साथ कानून की अदालत में भी लड़ाई
बता दें कि विधायकों की अयोग्यता मामले में महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर के फैसले से अंतुष्ट ठाकरे गुट सुप्रीम कोर्ट तक अपील कर चुका है। इसके साथ ही पार्टी ने एलान किया है कि अब ये लड़ाई महाराष्ट्र की जनता के बीच जाकर लड़ी जाएगी। बॉम्बे हाईकोर्ट में फरवरी में सुनवाई की तारीख मुकर्रर हुई है। सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल सुनवाई की तारीख नहीं मिली है। ऐसे में महाराष्ट्र की ये राजनीतिक लड़ाई लंबा खिंचने के पूरे आसार हैं।
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निराशा और हताशा में कर रहे बयानबाजी
छत्रपति संभाजी नगर में बुधवार को पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे के गुट पर कटाक्ष करते हुए शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा कि संवाददाता सम्मेलन से विरोधी खेमे की हताशा साफ झलकती है। इनका आरोप है कि ठाकरे खेमे के नेताओं ने जबरन पार्टी कार्यकर्ताओं को 'मेगा प्रेस कॉन्फ्रेंस' में शामिल कराया। उन्हें मजबूर किया गया। शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के प्रवक्ता संजय शिरसाट ने कहा, 'जब लोग निराश होते हैं तो ऐसा करते हैं। वे अपना जनाधार और अस्तित्व खो चुके हैं। पार्टी ने मेगा प्रेस वार्ता नहीं चुनावी रैली का आयोजन किया था।'
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CM एकनाथ शिंदे का खेमा बॉम्बे हाईकोर्ट क्यों गया?
उन्होंने कहा कि हताशा में उद्धव ठाकरे गुट के नेता अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। जनता इन नेताओं को सिरे से खारिज कर चुकी है। स्पीकर नार्वेकर के फैसले पर शिरसाट ने कहा कि वे विधानसभा अध्यक्ष के फैसले की आलोचना नहीं कर रहे, लेकिन अगर उनके दावों में दम था तो ठाकरे गुट के 14 विधायकों को अयोग्य ठहराया जाना चाहिए था। ऐसा नहीं किया गया, इसलिए शिंदे खेमे ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
2018 से पहले पैर छुए, कांग्रेस-NCP के साथ गठबंधन पर विद्रोह
शिवसेना में विभाजन से पहले कभी एकनाथ शिंदे ने पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे के पैर भी छुए थे। इस पर एक सवाल के जवाब में शिरसाट ने कहा, अगर ऐसी धारणा है कि संस्कारी शख्स कमजोर या असहा होने के कारण आपके पैर छू रहा है तो यह मूर्खता है। उन्होंने कहा कि शिंदे ने 2018 से पहले उद्धव के पैर छुए थे, लेकिन जब उन्होंने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के साथ गठबंधन कर महाविकास अघाड़ी सरकार (MVA) बनाने का फैसला लिया तो पार्टी में विद्रोह हुआ। बता दें कि उद्धव ठाकरे के इस्तीफे के बाद पूर्व CM देवेंद्र फडणवीस के समर्थन से शिंदे मुख्यमंत्री बने। बाद में इनके साथ NCP का अजित पवार खेमा भी जुड़ गया। पवार डिप्टी सीएम हैं।
जनता के साथ-साथ कानून की अदालत में भी लड़ाई
बता दें कि विधायकों की अयोग्यता मामले में महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर के फैसले से अंतुष्ट ठाकरे गुट सुप्रीम कोर्ट तक अपील कर चुका है। इसके साथ ही पार्टी ने एलान किया है कि अब ये लड़ाई महाराष्ट्र की जनता के बीच जाकर लड़ी जाएगी। बॉम्बे हाईकोर्ट में फरवरी में सुनवाई की तारीख मुकर्रर हुई है। सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल सुनवाई की तारीख नहीं मिली है। ऐसे में महाराष्ट्र की ये राजनीतिक लड़ाई लंबा खिंचने के पूरे आसार हैं।
