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केतन अग्रवाल हत्याकांड: महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष ने उठाए सवाल, स्पीकर का सरकार को SIT जांच का आदेश

पीटीआई, मुंबई। Published by: राकेश कुमार Updated Thu, 25 Jun 2026 03:34 PM IST
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सार

पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या उनकी ही मंगेतर और उसके प्रेमी ने मिलकर की थी। इस मामले को लेकर महाराष्ट्र विधानसभा में भारी बहस हुई। विधायक सुनील शेलके की मांग के बाद पीठासीन अधिकारी ने सरकार को एसआईटी जांच के आदेश दिए हैं, जिस पर विपक्ष ने कानूनी सवाल उठाए हैं।
 

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महाराष्ट्र विधानसभा - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या का मामला अब महाराष्ट्र विधानसभा में पहुंच गया है। सदन के पीठासीन अधिकारी राजू खरे ने सरकार को बड़ा निर्देश दिया है। उन्होंने इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) बनाने को कहा है।


मंगेतर ने ही उतारा मौत के घाट
यह पूरी घटना बेहद चौंकाने वाली है। 26 साल के केतन अग्रवाल की शादी तय हो चुकी थी। नवंबर में राजस्थान के उदयपुर के एक महल में उनका विवाह होने वाला था। उनकी मंगेतर का नाम सिया गोयल है। पुलिस के मुताबिक, सिया का चेतन चौधरी नाम के युवक से प्रेम प्रसंग था। इन दोनों ने मिलकर 18 जून को केतन को पुणे के लोहागढ़ किले के पास बुलाया। वहां दोनों ने मिलकर केतन को एक गहरी खाई में धकेल दिया। इस हादसे में केतन की मौत हो गई। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
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विधानसभा में उठा परिवार पर कार्रवाई का मुद्दा
एनसीपी विधायक सुनील शेलके ने इस मामले को विधानसभा में पूरी ताकत से उठाया। उन्होंने मांग की कि लड़की के परिवार को भी इस केस में आरोपी बनाया जाए। शेलके का दावा है कि लड़की के परिवार को उसके अफेयर की जानकारी थी। उन्होंने यह बात अग्रवाल परिवार से छिपाई। विधायक ने मांग की है कि इस मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में होनी चाहिए।
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हादसे की कहानी निकली मर्डर
विधायक शेलके ने बताया कि शुरुआत में केतन के परिवार को लगा कि यह एक कार एक्सीडेंट था। बाद में पुणे ग्रामीण पुलिस की गहन जांच से सच सामने आया। पुलिस को दोनों आरोपियों के फोन कॉल रिकॉर्ड और कई पुख्ता सबूत मिले हैं। शेलके ने पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक और उनकी टीम की तारीफ की। उन्होंने कहा कि पुलिस ने बेहतरीन काम करके गवाहों के बयान दर्ज किए और सच को उजागर किया।

क्या सरकार मानेगी विधानसभा का आदेश?
पीठासीन अधिकारी राजू खरे ने जैसे ही एसआईटी जांच का आदेश दिया, सदन में बहस छिड़ गई। शिवसेना (उद्धव गुट) के विधायक भास्कर जाधव ने इस पर एक कानूनी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या पीठासीन अधिकारी का यह निर्देश सरकार के लिए मानना जरूरी है? जाधव ने पुराने मामलों का हवाला दिया जहां मुख्यमंत्री ने ऐसे निर्देशों को नहीं माना था। इस पर बीजेपी नेता सुधीर मुनगंटीवार ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विधानसभा और विधान परिषद के नियम अलग-अलग होते हैं।
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