Maharashtra: कोर्ट ने अभय लोढ़ा को बरी करने से किया इनकार; ठाणे दरगाह के ध्वस्तीकरण पर लगी 'सुप्रीम' रोक
नागपुर जिले में फार्मा कंपनी की इकाई में विस्फोट के बाद एक व्यक्ति की मौत हो गई। हादसे में छह लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने बताया कि पूर्वी महाराष्ट्र जिले के भीलगांव में अंकित पल्प्स एंड बोर्ड्स प्राइवेट लिमिटेड की इकाई के ग्लास लाइन रिएक्टर में विस्फोट हुआ। विस्फोट का कारण अभी पता नहीं चल सका है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि विस्फोट सुबह करीब 11 बजे हुआ। सभी घायलों का कैम्पटी शहर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक की हालत गंभीर है। जिस कंपनी की इकाई में धमाका हुआ है, यह माइक्रोक्रिस्टलाइन सेलुलोज (एमसीसी) का उत्पादन होता है। इसका उपयोग दवा और खाद्य उद्योगों में होता है। दवा उद्योग में एमसीसी का उपयोग मुख्य रूप से एक एक्सीपिएंट1 (बाइंडर/फिलर) के रूप में किया जाता है।
भाजपा में असमंजस; प्रदेश अध्यक्ष बावनकुले को मामले की जानकारी नहीं
महाराष्ट्र के पूर्व शिवसेना (यूबीटी) नेता सुधाकर बडगुजर को भाजपा में शामिल किए जाने को लेकर असमंजस का माहौल है। खबरों के मुताबिक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले को पूरे मामले की जानकारी नहीं है। नासिक के नेता सुधाकर को बीजेपी में शामिल करने से जुड़े एक सवाल पर बावनकुले ने मंगलवार को जोर देकर कहा कि उन्हें सत्तारूढ़ पार्टी में होने वाले संभावित बदलाव की जानकारी नहीं है। बता दें कि सुधाकर के भाजपा में शामिल होने के मुद्दे पर भाजपा विधायक सीमा हिरय ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए उन्हें 'राष्ट्र-विरोधी' करार दिया। इससे सत्तारूढ़ पार्टी का आंतरिक प्रतिरोध उजागर हो गया। नासिक (पश्चिम) से निर्वाचित विधायक हिरय ने अपना विरोध दर्ज कराते हुए कहा, 'मैं उन पार्टी कार्यकर्ताओं में से एक थी, जिन्होंने सुधाकर के खिलाफ विरोध किया और राष्ट्र-विरोधी करार दिया। उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्होंने मेरे खिलाफ चुनाव भी लड़ा था। ऐसे में मैं उनका भाजपा में स्वागत कैसे कर सकती हूं? सुधाकर शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत के करीबी माने जाते हैं। उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें सुधाकर 1993 के मुंबई सीरियल बम विस्फोट मामले के आरोपी सलीम 'कुत्ता' के साथ नाचते हुए दिखे थे। भाजपा ने उनकी तीखी आलोचना की थी।
केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने आश्वासन दिया है कि पुणे जिले से शुरू होने वाली वार्षिक 'पालकी' शोभा यात्रा के दौरान भक्तों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। देहू से बुधवार को और आलंदी से गुरुवार को इस शोभायात्रा की शुरुआत होगी। बता दें कि हर साल वारकरी संप्रदाय के श्रद्धालु संत तुकाराम और संत ज्ञानेश्वर की 'पालकी' शोभा यात्रा निकालते हैं। भगवान विट्ठल के भक्त पुणे के देहू और आलंदी से आषाढ़ी एकादशी से पहले पड़ोसी सोलापुर जिले के पंढरपुर में भगवान विट्ठल के मंदिर तक यात्रा निकालते हैं। मंत्री ने कहा कि पालकी जुलूस को सुव्यवस्थित करने के लिए पुणे के पुलिस आयुक्त और नगर निगम प्रमुख के साथ मार्ग की समीक्षा की गई है। उन्होंने कहा, पुणे शहर के विश्रांतवाड़ी में जहां सड़क पर अवरोध लगता है, वहां बैरिकेडिंग लगाई जाएगी। पालकी यात्रा में मार्च करने वाले वारकरियों के लिए कोई बाधा नहीं होगी।
महाराष्ट्र पुलिस ने नवी मुंबई में एक महिला स्पा मालिक को धमकी देने के मामले में दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सानपाड़ा पुलिस थाने के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि महिला को कथित तौर पर धमकाने और उससे पांच साल में 43.46 लाख रुपये की जबरन वसूली करने के आरोप में मुंबई के विक्रोली निवासी दो व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। जबरन वसूली और अन्य अपराधों से जुड़े कानूनी प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायत के मुताबिक कथित तौर पर 50,000 रुपये का मासिक "हफ्ता" (सुरक्षा राशि) मांगा और मई 2020 से अप्रैल 2025 के बीच उससे 43,46,701 रुपये की जबरन वसूली की। मामले की जांच जारी है।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ठाणे में एक दरगाह (धार्मिक तीर्थस्थल) को ध्वस्त करने पर एक सप्ताह तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति संदीप मेहता और प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई पर सात दिनों की अंतरिम रोक लगाने का निर्देश दिया और दरगाह का प्रबंधन करने वाले ट्रस्ट को आदेश दिया कि वह ढांचे को ध्वस्त करने के निर्देश देने वाले आदेश को वापस लेने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट जाए।
शीर्ष अदालत ट्रस्ट की तरफ से 10 मार्च को हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दरगाह के अनधिकृत हिस्सों को ध्वस्त करने का आदेश दिया गया था। ट्रस्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को इस आधार पर चुनौती दी कि उसने इस महत्वपूर्ण तथ्य पर विचार नहीं किया कि निर्माण के संबंध में दायर दीवानी मुकदमा अप्रैल 2025 में खारिज कर दिया गया था। ट्रस्ट के वकील ने कहा कि निर्माण का 3,600 वर्ग फुट - कुल 17,610 वर्ग फुट क्षेत्र - विवादास्पद मुद्दा था। पीठ ने कहा कि मुकदमे के बारे में खुलासा न करना शर्मनाक है और यदि पहले खुलासा किया जाता तो उच्च न्यायालय अलग निष्कर्ष दे सकता था।
पीठ ने राज्य सरकार के वकील से कहा, 'हमारा प्रस्ताव है कि हम उन्हें इस तथ्य के मद्देनजर रिकॉल दाखिल करने की अनुमति दें कि उच्च न्यायालय ने मुकदमे के निपटारे के तथ्य पर विचार करना छोड़ दिया है... हम उन्हें सात दिनों तक सुरक्षा प्रदान करेंगे।' पीठ ने कहा कि यदि उच्च न्यायालय रिकॉल पर सुनवाई करने से इनकार करता है तो ट्रस्ट सर्वोच्च न्यायालय में जाने के लिए स्वतंत्र है।
मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में व्यवसायी अभय लोढ़ा को बरी करने से इनकार करते हुए कहा कि अपराध में उनकी सकारात्मक संलिप्तता स्पष्ट है। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने आरोप लगाया है कि लोढ़ा ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर यूको बैंक से 74.82 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। लोढ़ा टॉपवर्थ स्टील्स एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड (टीएसपीपीएल) और टॉपवर्थ ग्रुप के प्रमोटर और एमडी हैं।
पिछले सप्ताह विशेष सीबीआई न्यायाधीश वी पी देसाई ने उनकी बरी करने की याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि जांच से पता चला है कि वह मामले में मुख्य आरोपी है और 'उसकी संलिप्तता के बिना अपराध नहीं किया जा सकता था'। मंगलवार को उपलब्ध आदेश में कहा गया है, 'अपराध के सभी महत्वपूर्ण चरणों में लोढ़ा की सकारात्मक संलिप्तता है।' यूको बैंक द्वारा दर्ज की गई शिकायत के आधार पर, सीबीआई ने 2018 में लोढ़ा और अक्षता मर्केंटाइल प्राइवेट लिमिटेड (एएमपीएल) नामक फर्म के पदाधिकारियों सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि लोढ़ा द्वारा प्रवर्तित टॉपवर्थ समूह की कंपनी एएमपीएल ने यूको बैंक में डिस्काउंटेड एलसी (लेटर ऑफ क्रेडिट) से प्राप्त 74.82 करोड़ रुपये को समूह की अन्य कंपनियों में डायवर्ट किया। ऋण राशि का एक हिस्सा (43 लाख रुपये) अभय लोढ़ा और अश्विन लोढ़ा के नाम पर एक होम लोन की ईएमआई का भुगतान करने के लिए इस्तेमाल किया गया था। लोढ़ा ने अपनी डिस्चार्ज याचिका में दावा किया कि वह "निर्दोष हैं और उन्हें मामले में झूठा फंसाया गया है", और वह न तो एएमपीएल के निदेशक थे और न ही वह इसके दिन-प्रतिदिन के मामलों में शामिल थे।