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मणिपुर में फिर भड़की हिंसा: कांगपोकपी में हमले में महिला और बच्चा घायल, एनएच-37 पर 24 घंटे का बंद
Mon, 06 Jul 2026 12:49 PM IST
एन अर्जुन
अमर उजाला ब्यूरो, इंफाल
अमर उजाला ब्यूरो, इंफाल
Published by: एन अर्जुन
Updated Mon, 06 Jul 2026 12:49 PM IST
सार
मणिपुर में फिर हिंसा भड़की है। ताजा हिंसा में कांगपोकपी जिले में चर्च में प्रार्थना के दौरान एक गांव पर हमला किया गया। आरोप है कि इस दौरान कई घरों में आग लगा दी गई। कुकी संगठनों ने न्यायिक जांच और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की
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मणिपुर में फिर भड़की हिंसा
- फोटो : ANI
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विस्तार
मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय तनाव के बीच एक बार फिर हिंसा भड़क उठी। कांगपोकपी जिले के थिंगखोंगजांग (थिंगखोजांग) कुकी गांव पर हुए कथित सशस्त्र हमले में एक महिला और एक बच्चा घायल हो गए। घटना के बाद कुकी संगठनों ने सोमवार से राष्ट्रीय राजमार्ग-37 (एनएच-37) पर 24 घंटे के बंद का एलान कर दिया है। साथ ही स्वतंत्र न्यायिक जांच, दोषियों की गिरफ्तारी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठाई है। हालांकि, सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
चर्च में प्रार्थना के दौरान हुआ गांव पर हमला
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रविवार शाम गांव के लोग चर्च में प्रार्थना कर रहे थे, तभी हथियारबंद हमलावरों ने गांव पर गोलीबारी की और विस्फोटक फेंके। हमले के दौरान कई घरों में आग लगाए जाने का भी दावा किया गया है। हालांकि
इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। घटना में घायल महिला के पैर में गोली लगने की बात कही जा रही है, जबकि एक बच्चा भी घायल हुआ। दोनों को पहले असम राइफल्स के न्यू कैथेलमणबी शिविर में प्राथमिक उपचार दिया गया और बाद में इम्फाल स्थित रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरआईएमएस) भेजा गया।
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स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि हमले के पीछे एनएससीएन (आईएम) और जेडयूएफ-के के उग्रवादी शामिल थे, हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की ओर से अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की गई है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद कुकी समुदाय के शीर्ष संगठन 'कुकी इनपी मणिपुर' (केआईएम) ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे आम नागरिकों पर सुनियोजित हमला बताया। संगठन का आरोप है कि भारी हथियारों से लैस हमलावरों ने गांव में घुसकर गोलीबारी की, घरों में आग लगाई और महिलाओं व बच्चों को निशाना बनाया, जबकि निकट ही केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का शिविर मौजूद था। संगठन ने सवाल उठाया कि सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद हमलावर कैसे गांव में प्रवेश कर हिंसा फैलाकर आसानी से निकल गए।
केआईएम ने इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र न्यायिक जांच, सुरक्षा चूक की जवाबदेही तय करने और समयबद्ध जांच की मांग की है। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि आसपास के कुकी-जो समुदाय के ग्रामीण जब पीड़ितों की मदद के लिए पहुंचे तो उन्हें सीआरपीएफ कर्मियों ने गांव में प्रवेश करने से रोक दिया, जिससे कुछ देर तनाव की स्थिति बन गई। इस संबंध में भी सुरक्षा बलों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
एनएच-37 पर 24 घंटे का बंद
घटना के विरोध में कुकी सीएसओ वर्किंग कमेटी (केसीडब्ल्यूसी), साउथ वेस्ट सदर हिल्स ने तत्काल प्रभाव से एनएच-37 पर 24 घंटे के पूर्ण बंद की घोषणा की है। संगठन ने कहा कि हमले के लिए जिम्मेदार लोगों की तत्काल गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच, प्रभावित परिवारों को राहत, घायलों का समुचित इलाज औरसंवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जाए।
संगठन ने सुरक्षा व्यवस्था में कथित विफलता का आरोप लगाते हुए 86वीं बटालियन सीआरपीएफ के साथ असहयोग की भी घोषणा की है। हालांकि इन आरोपों पर सीआरपीएफ या राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
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चर्च में प्रार्थना के दौरान हुआ गांव पर हमला
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रविवार शाम गांव के लोग चर्च में प्रार्थना कर रहे थे, तभी हथियारबंद हमलावरों ने गांव पर गोलीबारी की और विस्फोटक फेंके। हमले के दौरान कई घरों में आग लगाए जाने का भी दावा किया गया है। हालांकि
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इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। घटना में घायल महिला के पैर में गोली लगने की बात कही जा रही है, जबकि एक बच्चा भी घायल हुआ। दोनों को पहले असम राइफल्स के न्यू कैथेलमणबी शिविर में प्राथमिक उपचार दिया गया और बाद में इम्फाल स्थित रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरआईएमएस) भेजा गया।
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स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि हमले के पीछे एनएससीएन (आईएम) और जेडयूएफ-के के उग्रवादी शामिल थे, हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की ओर से अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की गई है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद कुकी समुदाय के शीर्ष संगठन 'कुकी इनपी मणिपुर' (केआईएम) ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे आम नागरिकों पर सुनियोजित हमला बताया। संगठन का आरोप है कि भारी हथियारों से लैस हमलावरों ने गांव में घुसकर गोलीबारी की, घरों में आग लगाई और महिलाओं व बच्चों को निशाना बनाया, जबकि निकट ही केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का शिविर मौजूद था। संगठन ने सवाल उठाया कि सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद हमलावर कैसे गांव में प्रवेश कर हिंसा फैलाकर आसानी से निकल गए।
केआईएम ने इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र न्यायिक जांच, सुरक्षा चूक की जवाबदेही तय करने और समयबद्ध जांच की मांग की है। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि आसपास के कुकी-जो समुदाय के ग्रामीण जब पीड़ितों की मदद के लिए पहुंचे तो उन्हें सीआरपीएफ कर्मियों ने गांव में प्रवेश करने से रोक दिया, जिससे कुछ देर तनाव की स्थिति बन गई। इस संबंध में भी सुरक्षा बलों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
एनएच-37 पर 24 घंटे का बंद
घटना के विरोध में कुकी सीएसओ वर्किंग कमेटी (केसीडब्ल्यूसी), साउथ वेस्ट सदर हिल्स ने तत्काल प्रभाव से एनएच-37 पर 24 घंटे के पूर्ण बंद की घोषणा की है। संगठन ने कहा कि हमले के लिए जिम्मेदार लोगों की तत्काल गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच, प्रभावित परिवारों को राहत, घायलों का समुचित इलाज औरसंवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जाए।
संगठन ने सुरक्षा व्यवस्था में कथित विफलता का आरोप लगाते हुए 86वीं बटालियन सीआरपीएफ के साथ असहयोग की भी घोषणा की है। हालांकि इन आरोपों पर सीआरपीएफ या राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।