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बंगाल में बड़ा फैसला: स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक पढ़ाए जाएंगे श्यामा प्रसाद मुखर्जी, CM शुभेंदु ने किया एलान
सार
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अगले शैक्षणिक सत्र से स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को शामिल किया जाए। उन्होंने पश्चिम बंगाल के गठन, राष्ट्रवाद, संसद में उनके भाषण, केंद्रीय मंत्री और कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में उनकी भूमिका पढ़ाए जाने की वकालत की। साथ ही मित्रा इंस्टीट्यूशन के जीर्णोद्धार के लिए 25 लाख रुपये देने की घोषणा की।
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सीएम शुभेंदु अधिकारी का बड़ा फैसला
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रख्यात शिक्षाविद् और राष्ट्रवादी नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर सोमवार को बड़ा एलान करते हुए कहा कि अगले शैक्षणिक सत्र से राज्य के स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों तक के पाठ्यक्रम में उनके जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में योगदान को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को डॉ. मुखर्जी के व्यक्तित्व और उनके राष्ट्रवादी विचारों से परिचित कराना समय की आवश्यकता है।
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मुख्यमंत्री ने कोलकाता स्थित मित्रा इंस्टीट्यूशन पहुंचकर डॉ. मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसी विद्यालय में उन्होंने शिक्षा ग्रहण की थी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों में 'नेशन फर्स्ट' की भावना विकसित करना ही डॉ. मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि देश को सर्वोपरि रखने का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था। सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार पाठ्यक्रम में आवश्यक बदलाव कर डॉ. मुखर्जी के जीवन, शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान और राष्ट्रीय एकता के प्रति उनके दृष्टिकोण को शामिल करेगी।
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इसके साथ ही सीएम ने मित्रा इंस्टीट्यूशन के विकास और आधारभूत सुविधाओं के उन्नयन के लिए भी कई घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी शिक्षाविद् थे। उन्होंने शिक्षा और राष्ट्र निर्माण को एक-दूसरे का पूरक माना और युवाओं को राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति जागरूक करने का काम किया।
उधर, कोलकाता स्थित भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। प्रदेश भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस दौरान नेताओं ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक पहचान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने युवाओं तक उनके विचार पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
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गौरतलब है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ था। वे देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों में गिने जाते हैं और स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री भी रहे। बाद में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जिसे भारतीय जनता पार्टी का वैचारिक आधार माना जाता है। उनकी 125वीं जयंती के अवसर पर राज्यभर में विभिन्न सरकारी और संगठनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
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मुख्यमंत्री ने कोलकाता स्थित मित्रा इंस्टीट्यूशन पहुंचकर डॉ. मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसी विद्यालय में उन्होंने शिक्षा ग्रहण की थी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों में 'नेशन फर्स्ट' की भावना विकसित करना ही डॉ. मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि देश को सर्वोपरि रखने का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था। सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार पाठ्यक्रम में आवश्यक बदलाव कर डॉ. मुखर्जी के जीवन, शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान और राष्ट्रीय एकता के प्रति उनके दृष्टिकोण को शामिल करेगी।
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इसके साथ ही सीएम ने मित्रा इंस्टीट्यूशन के विकास और आधारभूत सुविधाओं के उन्नयन के लिए भी कई घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी शिक्षाविद् थे। उन्होंने शिक्षा और राष्ट्र निर्माण को एक-दूसरे का पूरक माना और युवाओं को राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति जागरूक करने का काम किया।
उधर, कोलकाता स्थित भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। प्रदेश भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस दौरान नेताओं ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक पहचान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने युवाओं तक उनके विचार पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
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गौरतलब है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ था। वे देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों में गिने जाते हैं और स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री भी रहे। बाद में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जिसे भारतीय जनता पार्टी का वैचारिक आधार माना जाता है। उनकी 125वीं जयंती के अवसर पर राज्यभर में विभिन्न सरकारी और संगठनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए गए।