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'अत्यंत गंभीर आर्थिक मंदी' से उबरने के लिए मनमोहन सिंह ने सुझाए पांच उपाय

Thu, 12 Sep 2019 09:00 PM IST
अमर शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Thu, 12 Sep 2019 09:00 PM IST
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Manmohan Singh suggests 5 measures to overcome 'very severe economic slowdown'
manmohan singh - फोटो : अमर उजाला

प्रखर अर्थशास्त्री, कांग्रेस नेता और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का मानना है कि पांच सुधारात्मक उपाय मौजूदा मंदी के दौर से देश को उबार सकते हैं। सिंह के मुताबिक आर्थिक मंदी का यह दौर स्ट्रक्चरल और साइक्लिक दोनों है, जो कि मुख्यतौर पर नोटबंदी और जीएसटी को त्रुटिपूर्ण तरीके से लागू करने की वजह से पैदा हुआ है।

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मनमोहन सिंह ने एक हिंदी दैनिक अखबार को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि पांच सुधार उपायों को लागू करने से पहले, पहला कदम यह स्वीकार करना है कि देश एक आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। सरकार को विशेषज्ञों और सभी हितधारकों को खुले दिमाग से सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह इस मामले पर मोदी सरकार द्वारा कोई केंद्रित दृष्टिकोण नहीं देख रहे हैं।
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सिंह ने अर्थव्यवस्था को उच्च विकास के रास्ते पर ले जाने के लिए पांच उपाय सुझाए। उन्होंने कहा, "मोदी सरकार को हेडलाइन प्रबंधन की आदत से बाहर आना चाहिए। पहले ही काफी समय बर्बाद हो चुका है। सेक्टरवार घोषणाएं करने के बजाय, अब पूरे आर्थिक ढांचे को एक साथ आगे बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।"

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  1. पहला उपाय कि जीएसटी को तर्कसंगत करना होगा, भले ही इससे थोड़े समय के लिए टैक्स का नुकसान हो।
  2. दूसरा उपाय ग्रामीण खपत बढ़ाने और कृषि को पुनर्जीवित करने के लिए नए उपाय ढूंढने होंगे। उन्होंने कहा, "कांग्रेस के घोषणापत्र में 'ठोस विकल्पों' का उल्लेख किया गया है, जिसमें कृषि बाजारों को मुक्त करके लोगों के हाथों में पैसा पहुंच सकता है।"
  3. तीसरा उपाय, पूंजी निर्माण के लिए कर्ज की कमी दूर करनी होगी।
  4. चौथा उपाय कपड़ा, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रियायती आवास जैसे प्रमुख रोजगार देनेवाले क्षेत्रों को पुनर्जीवित करना होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए आसान ऋण की आवश्यकता होगी, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए।
  5. पांचवें उपाय में संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बीच चल रहे टैरिफ युद्ध के कारण उभरते हुए निर्यात बाजारों को पहचानना होगा। उन्होंने कहा, "हमें अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध के कारण उभर रहे नए निर्यात अवसरों को पहचानना चाहिए। याद रखें, स्ट्रक्चरल और साइक्लिक दोनों समस्याओं के समाधान जरूरी हैं। फिर, हम 3-4 वर्षों में उच्च विकास दर को वापस हासिल कर सकते हैं।"

भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार इनकार की मुद्रा में नहीं रह सकती। भारत बहुत चिंताजनक आर्थिक मंदी में है। पिछली तिमाही की 5 फीसदी जीडीपी विकास दर 6 वर्षों में सबसे कम है। नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ भी 15 साल के निचले स्तर पर है।



अर्थव्यवस्था के कई प्रमुख क्षेत्रों को प्रभावित हुए हैं। ऑटोमोबाइल सेक्टर उत्पादन में भारी गिरावट से संकट में है। साढ़े तीन लाख से ज्यादा नौकरियां जा चुकी हैं। मानेसर, पिंपरी-चिंचवाड़ और चेन्नई जैसे ऑटोमोटिव हबों में हालात बहुत खराब हैं। इसका असर इससे संबंधित उद्योगों पर भी है।
 

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