ब्रिटिश कालीन ढांचे जर्जर: ASI के दायरे से बाहर हैं कई ऐतिहासिक स्थल, संसदीय समिति ने दिया संरक्षण का सुझाव
संसदीय समिति ने देशभर में मौजूद उन ब्रिटिश-युग विरासत स्थलों को लेकर सुझाव जताई है, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण दायरे में नहीं आते। ऐसे गैर-एएसआई विरासत ढांचों की सूची तैयार करने की भी सिफारिश की है।
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एक संसदीय समिति ने ब्रिटिश-युग की उन विरासत स्थलों के संरक्षण का सुझाव दिया है। जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के दायरे में नहीं आतीं। समिति ने राज्य सरकारों के समन्वय से जोखिम वाले गैर-एएसआई विरासत ढांचों की सूची तैयार करने की भी सिफारिश की है। यह रिपोर्ट बुधवार को संसद में पेश की गई।
रिपोर्ट में ध्वस्त किए जा रहे विभिन्न पुराने जिला कलेक्ट्रेट भवनों का जिक्र किया गया है। समिति ने संस्कृति मंत्रालय को रेलवे, जहाजरानी, रक्षा और नागरिक उड्डयन मंत्रालयों के साथ समन्वय स्थापित करने का सुझाव दिया है। इसका उद्देश्य रेल इंजन, जहाज और विमान जैसी विरासत संपत्तियों का संरक्षण करना है। भारत में प्राचीन मंदिरों से लेकर मध्यकालीन और औपनिवेशिक युग की इमारतें मौजूद हैं। कई ब्रिटिश-युग की इमारतें, जिनमें जिला कलेक्ट्रेट, जिला बोर्ड और नगर पालिका कार्यालय शामिल हैं, ऐतिहासिक महत्व के बावजूद असुरक्षित हैं।
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संरक्षण और समन्वय की सिफारिशें
समिति ने संस्कृति मंत्रालय को राज्य सरकारों के साथ मिलकर जोखिम वाले गैर-एएसआई विरासत ढांचों की सूची बनाने की सिफारिश की है। प्रस्तावित नई बुनियादी ढांचा योजना के तहत सौ-दो सौ साल पुराने अग्रभागों और ढांचों के वास्तुशिल्प विरासत घटक की सुरक्षा सुनिश्चित करने को भी कहा गया है। मंत्रालय को रक्षा, रेलवे, पत्तन, जहाजरानी और जलमार्ग और नागरिक उड्डयन मंत्रालयों के साथ समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। सांस्कृतिक संपत्ति को विरूपित या नष्ट करने के लिए दंडात्मक प्रावधानों की आवश्यकता की जांच करने और एक वर्ष के भीतर समिति को कानूनी नोट प्रस्तुत करने को भी कहा गया है।
असुरक्षित विरासत स्थलों पर चिंता
रिपोर्ट में 74 जिला कलेक्ट्रेट भवनों को ध्वस्त किए जाने का मुद्दा उठाया गया है। दरभंगा में डेढ़ सौ साल पुरानी डीजी पोस्ट बिल्डिंग और पटना क्लॉक टॉवर जैसे विशिष्ट उदाहरण भी दिए गए हैं। पटना कलेक्ट्रेट परिसर, जिसमें डच और ब्रिटिश-युग की संरचनाएं थीं। इसको अप्रैल 2022 में ध्वस्त कर दिया गया था। समिति ने गोवा और देशभर में चर्चों और चैपलों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी ध्यान दिया। बिहार में सासाराम किले सहित मानवरहित किलों पर भी चिंता व्यक्त की गई है।
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केंद्र-राज्य सहयोग पर जोर
समिति ने राज्य पुरातात्विक स्थलों के खराब रखरखाव पर भी गौर किया, जहां ठेकेदार-आधारित मरम्मत मूल स्वरुप को बदल देती है। अभिलेखागार और विरासत के लिए एक औपचारिक केंद्र-राज्य समन्वय तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया गया। मंत्रालय को राज्य-स्तरीय पुरातात्विक स्थलों पर संरक्षण हस्तक्षेप के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं विकसित और जारी करनी चाहिए। क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों के कामकाज और समन्वय की समीक्षा करने तथा नब्बे दिनों के भीतर निष्कर्ष समिति को प्रस्तुत करने को भी कहा गया है। समिति ने पटना के कुम्हरार में रखरखाव की कमी और बोधगया मंदिर बहाली परियोजना में एक दशमलव छह आठ करोड़ रुपये जमा होने के बावजूद काम शुरू न होने पर भी चिंता जताई।