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'विकास और पर्यावरण साथ-साथ': मंत्री भूपेंद्र यादव बोले- यही भारत का नया मॉडल; वायु प्रदूषण को माना बड़ी चुनौती

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 05 Jun 2026 09:08 AM IST
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सार

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। सरकार जंगल बढ़ाने, सौर ऊर्जा को मजबूत करने, प्रदूषण कम करने और कचरा प्रबंधन सुधारने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के साथ प्रकृति की रक्षा जरूरी है। भारत रीसाइक्लिंग, हरित ऊर्जा और वृक्षारोपण को बढ़ावा दे रहा है। आइए, विस्तार से जानते हैं, केंद्रीय मंत्री ने और क्या कुछ कहा...

Minister Bhupender Yadav Says Development Environment Go Hand-in-Hand Indias New Model Pollution as Challenge
भूपेंद्र यादव, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

केंद्र सरकार ने साफ किया है कि भारत विकास और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ लेकर आगे बढ़ने की नीति पर काम कर रहा है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि पिछले एक दशक में देश ने जंगल बढ़ाने, जैव विविधता बचाने और नवीकरणीय ऊर्जा को मजबूत करने में बड़ी प्रगति की है। उन्होंने कहा कि भारत ऐसा विकास मॉडल अपना रहा है जिसमें आर्थिक तरक्की भी हो और प्रकृति भी सुरक्षित रहे। सरकार का कहना है कि आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने पर भी जोर दिया जाएगा।



भारत पर्यावरण और विकास में संतुलन कैसे बना रहा है?
भूपेंद्र यादव ने कहा कि सरकार ने ठोस कचरा प्रबंधन नियम, पर्यावरण ऑडिट और बड़े स्तर पर वृक्षारोपण जैसे कई कदम उठाए हैं। उनका कहना है कि इन योजनाओं का मकसद लोगों की जिंदगी आसान बनाना और पर्यावरण को सुरक्षित रखना है। उन्होंने कहा कि साफ हवा, स्वच्छ पानी और प्राकृतिक संसाधन आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाना जरूरी है। इसी सोच के साथ सरकार विकास योजनाओं को आगे बढ़ा रही है।
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क्या पिछले वर्षों में जंगल और संरक्षण क्षेत्र बढ़े हैं?
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 2014 के बाद देश में टाइगर रिजर्व, संरक्षित वन क्षेत्र और जैव विविधता संरक्षण कार्यक्रमों में तेजी आई है। उन्होंने कहा कि अगस्थ्यमलाई, खांगचेंदजोंगा, पन्ना और हिमाचल प्रदेश के कोल्ड डेजर्ट क्षेत्र जैसे कई भारतीय बायोस्फीयर रिजर्व को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। इससे पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि युवाओं में भी प्रकृति बचाने को लेकर रुचि बढ़ रही है और लोग वृक्षारोपण अभियानों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
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विकास परियोजनाओं के बीच जंगलों की सुरक्षा कैसे होगी?
इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के कारण होने वाली कटाई को लेकर उठ रहे सवालों पर भूपेंद्र यादव ने कहा कि सरकार की प्रतिपूरक वनीकरण नीति के तहत जितनी वन भूमि विकास कार्यों में इस्तेमाल होती है, उसकी भरपाई पौधारोपण से की जाती है। उन्होंने दावा किया कि आर्थिक विकास और सड़कों, रेल तथा अन्य परियोजनाओं के विस्तार के बावजूद देश में वन और पेड़ों का क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। मंत्री ने कहा कि कई बंजर जमीनों को लगातार पौधारोपण करके हरित क्षेत्र में बदला गया है।

प्रमुख क्षेत्र

सरकार का फोकस

वन संरक्षण

प्रतिपूरक वनीकरण

ऊर्जा

सौर और हरित ऊर्जा

कचरा प्रबंधन

रीसाइक्लिंग और पुन: उपयोग

जल संरक्षण

संसाधनों का बेहतर उपयोग

प्रदूषण नियंत्रण  

130 शहरों में वायु गुणवत्ता सुधार 


कचरे और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर सरकार क्या कर रही है?
भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत अब सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार रीसाइक्लिंग, दोबारा उपयोग और संसाधनों की रिकवरी को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी ईपीआर और अर्बन माइनिंग जैसी योजनाओं पर काम हो रहा है। मंत्री ने कहा कि कचरे में छिपे उपयोगी पदार्थों को दोबारा इस्तेमाल में लाया जा सकता है। इससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम होगा और प्रदूषण भी घटेगा।

जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा पर भारत की क्या रणनीति है?
भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से क्षमता बढ़ाई है। इसके साथ ही जलविद्युत और दूसरी हरित ऊर्जा तकनीकों में भी निवेश किया जा रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में भारत की भूमिका को भी अहम बताया। मंत्री ने कहा कि भारत लगातार यह मांग उठा रहा है कि विकसित देश जलवायु वित्त से जुड़े अपने वादों को पूरा करें। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने जलवायु और अनुकूलन कार्यक्रमों का बड़ा हिस्सा घरेलू संसाधनों से पूरा किया है।

प्रदूषण और कचरा प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती क्यों बने हुए हैं?
केंद्रीय मंत्री ने माना कि वायु प्रदूषण, कचरा प्रबंधन और जल संरक्षण अभी भी बड़ी चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि 130 शहरों में हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए काम चल रहा है। साथ ही शहरी कचरा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए नगर निकायों और स्थानीय प्रशासन की भागीदारी जरूरी है। भूपेंद्र यादव ने कहा कि टिकाऊ विकास तभी संभव है जब जिम्मेदारी के साथ संसाधनों का उपयोग हो और आम लोगों की भागीदारी बढ़े। उन्होंने दोहराया कि देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों को साथ लेकर चलना ही भारत का भविष्य है।


 
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